महिला आरक्षण: 543 सीटों पर लागू हो कानून, भाजपा महिला विरोधी — अजय राय का बड़ा हमला
सारांश
Key Takeaways
- अजय राय ने भाजपा को महिला विरोधी करार देते हुए सभी 543 लोकसभा सीटों पर महिला आरक्षण तत्काल लागू करने की मांग की।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में परिसीमन की शर्त जोड़ी गई है, जिसे कांग्रेस आरक्षण टालने की चाल बताती है।
- राघव चड्ढा सहित 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर कांग्रेस ने आप-भाजपा के बीच भ्रष्टाचार के गठजोड़ का आरोप लगाया।
- भाजपा पर महाराष्ट्र में शिवसेना, बिहार में जदयू और ओडिशा में नवीन पटनायक की पार्टी को कमजोर करने का पैटर्न गिनाया गया।
- गाजीपुर के कटारिया में नाबालिग की मौत पर कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने यूपी सरकार पर सवाल उठाए।
- यह मुद्दा 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने की रणनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ, 26 अप्रैल 2025 — उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने शनिवार को केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार महिला विरोधी है और महिला आरक्षण विधेयक को देश की सभी 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) पर भी निशाना साधा और कहा कि दोनों दलों के बीच भ्रष्टाचार की मिलीभगत है।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का स्पष्ट रुख
अजय राय ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "2023 में सर्वसम्मति से कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक पास कराया था।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की मांग है कि यह आरक्षण सभी 543 संसदीय सीटों पर लागू हो, न कि किसी सीमित दायरे में।
राय ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन विधेयक लाने की कोशिश कर रही थी, जो असल में इस कानून को अनिश्चितकाल के लिए टालने की चाल थी। उन्होंने कहा, "भाजपा महिला विरोधी है और महिला आरक्षण के नाम पर केवल झूठ फैला रही है।"
परिसीमन की आड़ में आरक्षण को टालने का आरोप
गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 संसद में पारित हुआ था, लेकिन उसमें एक शर्त जोड़ी गई कि यह कानून परिसीमन के बाद ही लागू होगा। विपक्षी दल लगातार इस शर्त को महिला आरक्षण को दशकों तक टालने की साजिश बताते रहे हैं।
कांग्रेस का तर्क है कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जा सकता था। अजय राय ने याद दिलाया कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने देश को पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल दिए।
आप-भाजपा गठजोड़ पर तीखा हमला
राघव चड्ढा सहित 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने की खबरों के संदर्भ में अजय राय ने कहा, "पूरी आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार में लिप्त है और भाजपा व आप के बीच गठबंधन है — वे आपस में मिलकर काम करते हैं।"
यह बयान ऐसे समय आया है जब आप और भाजपा दोनों दिल्ली की राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी के रूप में खुद को पेश करते हैं। कांग्रेस का यह आरोप राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ सकता है।
भाजपा पर सहयोगियों को तबाह करने का आरोप
अजय राय ने भाजपा पर सहयोगी दलों को निगलने का पुराना पैटर्न गिनाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना को तोड़कर एकनाथ शिंदे को पहले मुख्यमंत्री बनाया, फिर उपमुख्यमंत्री बनाकर पार्टी पर कब्जा कर लिया।
बिहार में नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) को कमजोर कर उन्हें दिल्ली भेज दिया और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बना दिया। ओडिशा में नवीन पटनायक का पहले समर्थन किया और अंत में उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया। राय ने कहा, "भाजपा जहां भी जाती है, अपने सहयोगियों को बर्बाद कर देती है।"
गाजीपुर में नाबालिग की मौत पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
गाजीपुर के कटारिया इलाके में एक नाबालिग की संदिग्ध मौत पर कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा, "यह एक बेहद दुखद घटना है। राज्य में लड़कियों के खिलाफ जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं, उससे सरकार पर गंभीर सवाल उठते हैं।"
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा बार-बार राजनीतिक केंद्र में आता रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के विरुद्ध अपराध में उत्तर प्रदेश लगातार शीर्ष राज्यों में रहा है, जो सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के विरोधाभास को उजागर करता है।
राजनीतिक विश्लेषण: महिला आरक्षण बनाम चुनावी राजनीति
महिला आरक्षण का मुद्दा 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भी गरमाया था और अब 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह फिर से केंद्र में आ रहा है। कांग्रेस इसे भाजपा के खिलाफ एक प्रमुख चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्र सरकार परिसीमन की समयसीमा स्पष्ट करती है और महिला आरक्षण को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है।