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बड़ी कार्रवाई: ULFA के 3 सशस्त्र सदस्य नगालैंड में गिरफ्तार, 4 ग्रेनेड बरामद

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बड़ी कार्रवाई: ULFA के 3 सशस्त्र सदस्य नगालैंड में गिरफ्तार, 4 ग्रेनेड बरामद

सारांश

असम राइफल्स ने नगालैंड के मोन जिले में ULFA (I) के तीन सशस्त्र सदस्यों को गिरफ्तार किया और 4 ग्रेनेड बरामद किए। तेजपुर, जोरहाट और गोलाघाट के ये उग्रवादी 2011 से 2022 के बीच संगठन में शामिल हुए थे। असम में भी अलग-अलग जिलों से कई संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं।

मुख्य बातें

असम राइफल्स ने 25 अप्रैल को नगालैंड के मोन जिले में ULFA (I) के 3 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार सदस्यों में लेफ्टिनेंट गजेंद्र असम (35) , लांस कॉर्पोरल ब्रोजेन असम (27) और सार्जेंट पुहोर असम (26) शामिल हैं।
सुरक्षा बलों ने तीनों के पास से 4 ग्रेनेड बरामद किए, जो बड़े हमले की आशंका को दर्शाते हैं।
चराइदेव जिले में ULFA (I) से जुड़े वांग उर्फ नोनी को भी हिरासत में लिया गया।
तिनसुकिया पुलिस ने ULFA (I) नेटवर्क से जुड़े 7 संदिग्धों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया।
यह अभियान पूर्वोत्तर में ULFA (I) के स्लीपर नेटवर्क के विरुद्ध चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है।

डिब्रूगढ़, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम राइफल्स ने शुक्रवार को नगालैंड के मोन जिले में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम (इंडिपेंडेंट) — जिसे ULFA (I) के नाम से जाना जाता है — के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया। सुरक्षा बलों ने इनके पास से चार ग्रेनेड भी बरामद किए, जो इस अभियान की गंभीरता को रेखांकित करते हैं।

कैसे हुई गिरफ्तारी — पूरा घटनाक्रम

खुफिया एजेंसियों से मिली सूचना के आधार पर असम राइफल्स के जवानों ने मोन जिले के फोमचिंग उपमंडल स्थित शांगन्यू गांव में छापेमारी की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तीनों संदिग्ध फोमचिंग क्षेत्र में सक्रिय थे और अभियान शुरू होते समय शांगन्यू गांव की दिशा में आगे बढ़ रहे थे।

समय रहते की गई इस कार्रवाई से सुरक्षा बलों ने न केवल तीनों को दबोचा, बल्कि संभावित हिंसक घटना को भी टाल दिया।

गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान

गिरफ्तार तीनों सदस्यों की पहचान इस प्रकार हुई है:

स्वघोषित लेफ्टिनेंट गजेंद्र असम (35 वर्ष) — असम के तेजपुर निवासी, जो 2011 में ULFA (I) में शामिल हुए थे।

स्वघोषित लांस कॉर्पोरल ब्रोजेन असम (27 वर्ष)जोरहाट जिले के निवासी, जो 2022 में संगठन से जुड़े।

स्वघोषित सार्जेंट पुहोर असम (26 वर्ष)गोलाघाट जिले के निवासी, जो 2019 में संगठन में भर्ती हुए।

तीनों के पास से बरामद चार ग्रेनेड यह संकेत देते हैं कि ये किसी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में थे।

असम-नगालैंड में ULFA विरोधी अभियानों की श्रृंखला

यह गिरफ्तारी एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि हाल के हफ्तों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है।

असम के चराइदेव जिले में इससे पहले ULFA (I) से कथित संबंधों के आरोप में वांग उर्फ नोनी को सोनारी उपमंडल के नामटोला क्षेत्र से हिरासत में लिया गया था। अधिकारियों को संदेह है कि वांग संगठन के लिए संदेश वाहक और परिचालन सहायक के रूप में काम कर रहा था।

एक अन्य कार्रवाई में तिनसुकिया पुलिस ने जिले के विभिन्न हिस्सों से ULFA (I) से जुड़े होने के संदेह में सात व्यक्तियों को हिरासत में लिया। इनकी पहचान बोरदुमसा के बारलिन नियोग, पेंगरी के मिथु गोहेन और लिलांबर मोरन, काकोपाथर के बिकाश डेका, अरुणाचल प्रदेश के मियाओ के शिबा देब और परितोष देब, तथा माकुम के मनोब डे के रूप में हुई है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार इन सभी का संगठन के साथ लंबे समय से संपर्क था और सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता था। सभी सातों से फिलहाल व्यापक पूछताछ जारी है।

ULFA (I) और पूर्वोत्तर में उग्रवाद — व्यापक संदर्भ

ULFA (I) असम का सबसे पुराना और सक्रिय उग्रवादी संगठन है, जिसे भारत सरकार ने प्रतिबंधित घोषित किया हुआ है। संगठन का नेतृत्व परेश बरुआ के हाथों में है, जो म्यांमार-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों से संगठन का संचालन करते हैं।

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में ULFA (I) की गतिविधियां असम से बाहर नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमावर्ती इलाकों तक फैली हैं। नगालैंड का मोन जिला भौगोलिक रूप से म्यांमार से सटा हुआ है, जो उग्रवादियों के लिए पारगमन और शरण का मार्ग बनता रहा है।

केंद्र सरकार और असम सरकार दोनों ने पिछले कुछ वर्षों में ULFA (I) के विरुद्ध वार्ता और सैन्य दोनों मोर्चों पर दबाव बनाए रखा है। 2023 में ULFA के शांतिवार्ता समर्थक गुट के साथ शांति समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, लेकिन परेश बरुआ गुट अब भी हिंसा की राह पर है।

आगे क्या होगा

सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार तीनों ULFA सदस्यों से पूछताछ कर संगठन के नेटवर्क, फंडिंग स्रोत और अगली संभावित कार्रवाइयों का पता लगाने की कोशिश करेंगी। इस अभियान की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि खुफिया तंत्र और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है। आने वाले हफ्तों में पूर्वोत्तर में इसी तरह के और अभियानों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह संकेत है कि परेश बरुआ का गुट असम से बाहर नगालैंड की दुर्गम सीमाओं का उपयोग पुनर्गठन के लिए कर रहा है। विडंबना यह है कि जब ULFA का एक धड़ा शांति वार्ता की मेज पर बैठा है, तब दूसरा धड़ा सक्रिय रूप से ग्रेनेड लेकर गांवों की ओर बढ़ रहा था। तिनसुकिया और चराइदेव में एक साथ हुई गिरफ्तारियां यह भी बताती हैं कि संगठन का स्थानीय स्लीपर नेटवर्क अभी भी जीवित है — जिसे तोड़ना सैन्य अभियानों से ज्यादा सामाजिक-आर्थिक रणनीति की मांग करता है। मुख्यधारा की कवरेज गिरफ्तारी की संख्या गिनती है, लेकिन असली सवाल यह है कि इन युवाओं को संगठन में भर्ती करने वाली व्यवस्था को कब तोड़ा जाएगा।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ULFA (I) के तीन सदस्य कहाँ से गिरफ्तार किए गए?
असम राइफल्स ने नगालैंड के मोन जिले के फोमचिंग उपमंडल स्थित शांगन्यू गांव में छापेमारी कर ULFA (I) के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। ये तीनों असम के तेजपुर, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के निवासी हैं।
गिरफ्तार ULFA सदस्यों के पास क्या बरामद हुआ?
सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार तीनों ULFA (I) सदस्यों के पास से चार ग्रेनेड बरामद किए। यह बरामदगी संकेत देती है कि ये किसी बड़े हमले की तैयारी में थे।
ULFA (I) क्या है और यह क्यों प्रतिबंधित है?
ULFA (I) यानी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम (इंडिपेंडेंट) असम का एक सशस्त्र उग्रवादी संगठन है, जिसे भारत सरकार ने प्रतिबंधित घोषित किया है। यह संगठन असम को भारत से अलग करने की मांग करता है और परेश बरुआ के नेतृत्व में हिंसक गतिविधियां जारी रखे हुए है।
तिनसुकिया में ULFA से जुड़े कितने लोग गिरफ्तार हुए?
तिनसुकिया पुलिस ने ULFA (I) से संबंध के संदेह में सात व्यक्तियों को हिरासत में लिया। इनमें बोरदुमसा, पेंगरी, काकोपाथर, मियाओ (अरुणाचल प्रदेश) और माकुम के निवासी शामिल हैं।
क्या ULFA के साथ शांति वार्ता चल रही है?
ULFA के शांतिवार्ता समर्थक गुट के साथ केंद्र सरकार की वार्ता प्रक्रिया 2023 में आगे बढ़ी थी। हालांकि परेश बरुआ के नेतृत्व वाला ULFA (I) गुट अब भी वार्ता से इनकार करते हुए सशस्त्र गतिविधियां जारी रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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