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ULFA के 3 उग्रवादी गिरफ्तार: नगालैंड में असम राइफल्स का बड़ा ऑपरेशन, 4 ग्रेनेड बरामद

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ULFA के 3 उग्रवादी गिरफ्तार: नगालैंड में असम राइफल्स का बड़ा ऑपरेशन, 4 ग्रेनेड बरामद

सारांश

नगालैंड के मोन जिले में असम राइफल्स ने ULFA-I के तीन सशस्त्र सदस्यों को गिरफ्तार किया और चार ग्रेनेड बरामद किए। चराइदेव व तिनसुकिया में भी समानांतर कार्रवाई में आठ और संदिग्ध हिरासत में लिए गए। पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियान तेज हुआ।

मुख्य बातें

असम राइफल्स ने 25 अप्रैल को नगालैंड के मोन जिले के शांगन्यू गांव में छापेमारी कर ULFA-I के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार उग्रवादियों में तेजपुर के गजेंद्र असम (35) , जोरहाट के ब्रोजेन असम (27) और गोलाघाट के पुहोर असम (26) शामिल हैं।
तीनों के पास से 4 हथगोले (ग्रेनेड) बरामद किए गए, जो बड़ी वारदात की आशंका को जन्म देते हैं।
चराइदेव जिले में वांग उर्फ नोनी को ULFA-I का संदेशवाहक होने के संदेह में हिरासत में लिया गया।
तिनसुकिया पुलिस ने ULFA-I से जुड़े 7 संदिग्धों को एक समन्वित अभियान में हिरासत में लिया।
यह कार्रवाई पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी अभियानों की एक व्यापक और समन्वित रणनीति का हिस्सा है।

डिब्रूगढ़, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नगालैंड के मोन जिले में असम राइफल्स ने शुक्रवार को एक सफल आतंकवाद विरोधी अभियान के तहत प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम (इंडिपेंडेंट) — जिसे ULFA-I भी कहा जाता है — के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनके पास से चार हथगोले (ग्रेनेड) भी बरामद किए गए, जो इस अभियान की गंभीरता को रेखांकित करते हैं।

कैसे हुई गिरफ्तारी — अभियान का पूरा घटनाक्रम

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिली सटीक सूचना के आधार पर असम राइफल्स के जवानों ने मोन जिले के फोमचिंग उपमंडल के अंतर्गत शांगन्यू गांव में छापेमारी की। तीनों संदिग्ध फोमचिंग क्षेत्र में सक्रिय थे और अभियान शुरू होने के समय शांगन्यू गांव की दिशा में आगे बढ़ रहे थे।

यह ऑपरेशन उस समय और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है जब असम और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवादी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा बल लगातार समन्वित अभियान चला रहे हैं। नगालैंड की सीमा असम से लगती है और यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से ULFA-I के लिए पारगमन मार्ग के रूप में उपयोग होता रहा है।

गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान और संगठन में भूमिका

गिरफ्तार तीनों व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

स्वघोषित लेफ्टिनेंट गजेंद्र असम (35 वर्ष), मूल निवासी तेजपुर, असम — जो 2011 में ULFA-I में शामिल हुआ था और संगठन में एक वरिष्ठ पद पर था।

स्वघोषित लांस कॉर्पोरल ब्रोजेन असम (27 वर्ष), मूल निवासी जोरहाट जिला, असम — जो 2022 में संगठन से जुड़ा।

स्वघोषित सार्जेंट पुहोर असम (26 वर्ष), मूल निवासी गोलाघाट जिला, असम — जो 2019 में उग्रवादी संगठन में भर्ती हुआ।

तीनों के पास से बरामद चार ग्रेनेड यह संकेत देते हैं कि ये किसी बड़ी वारदात की तैयारी में थे। सुरक्षा बल अब इनसे पूछताछ कर संगठन के नेटवर्क और आगामी योजनाओं का पता लगाने में जुटे हैं।

चराइदेव और तिनसुकिया में भी ULFA-I के खिलाफ कार्रवाई

इससे पहले असम के चराइदेव जिले में भी ULFA-I से कथित संबंधों के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था। आरोपी की पहचान वांग उर्फ नोनी के रूप में हुई, जिसे सोनारी उपमंडल के नामटोला क्षेत्र में चलाए गए सुरक्षा अभियान के दौरान पकड़ा गया। अधिकारियों को संदेह है कि वह संगठन के लिए संदेशवाहक और परिचालन सहायक के रूप में काम कर रहा था।

एक अलग कार्रवाई में तिनसुकिया पुलिस ने जिले के विभिन्न हिस्सों से ULFA-I से जुड़े होने के संदेह में सात व्यक्तियों को हिरासत में लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार इन सभी का संगठन के साथ लंबे समय से संपर्क था और ये सूचनाओं के आदान-प्रदान में सहयोग करते थे।

इन सातों की पहचान इस प्रकार हुई: बोरदुमसा के बारलिन नियोग, पेंगरी के मिथु गोहेन और लिलांबर मोरन, काकोपाथर के बिकाश डेका, अरुणाचल प्रदेश के मियाओ के शिबा देब और परितोष देब, तथा माकुम के मनोब डे। इन सभी से उनके नेटवर्क और संगठन से जुड़ाव की गहन जांच जारी है।

ULFA-I और पूर्वोत्तर में उग्रवाद — व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि ULFA-I — यानी परेश बरुआ गुट — वर्षों से असम में स्वतंत्र राज्य की मांग को लेकर सशस्त्र संघर्ष जारी रखे हुए है। भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित किया हुआ है। ULFA का एक धड़ा शांति वार्ता में शामिल हो चुका है, लेकिन परेश बरुआ नेतृत्व वाला इंडिपेंडेंट गुट अभी भी म्यांमार और चीन सीमावर्ती क्षेत्रों से सक्रिय माना जाता है।

यह उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने ULFA-I के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन किए हैं, जो संगठन की परिचालन क्षमता को कमजोर करने की दिशा में एक सुसंगत रणनीति का हिस्सा प्रतीत होते हैं। 2011 से लेकर 2022 तक की भर्ती तारीखें यह भी दर्शाती हैं कि संगठन अभी भी युवाओं को अपने जाल में फंसाने में सक्षम है — यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।

आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार उग्रवादियों से पूछताछ के आधार पर ULFA-I के नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश करेंगी। इस अभियान की सफलता पूर्वोत्तर में उग्रवाद विरोधी रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाती हैं कि ULFA-I अभी भी युवाओं को बरगलाने में सक्षम है — तमाम अभियानों के बावजूद। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर 'गिरफ्तारी की संख्या' तक सीमित रह जाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि इन उग्रवादियों की भर्ती और फंडिंग का स्रोत क्या है और क्या सरकार की पुनर्वास नीतियां पर्याप्त रूप से प्रभावी हैं। जब तक सामाजिक-आर्थिक असंतोष और सीमापारीय समर्थन के मूल कारणों का समाधान नहीं होता, तब तक केवल गिरफ्तारियां स्थायी समाधान नहीं बन सकतीं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नगालैंड में ULFA के कितने सदस्य गिरफ्तार हुए और कहाँ से?
असम राइफल्स ने नगालैंड के मोन जिले के शांगन्यू गांव में छापेमारी कर ULFA-I के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। इनके पास से चार ग्रेनेड भी बरामद किए गए।
गिरफ्तार ULFA सदस्यों के नाम और वे कहाँ के निवासी हैं?
गिरफ्तार तीनों सदस्य असम के हैं — तेजपुर के गजेंद्र असम (35), जोरहाट के ब्रोजेन असम (27) और गोलाघाट के पुहोर असम (26)। ये क्रमशः 2011, 2022 और 2019 में ULFA-I में शामिल हुए थे।
ULFA-I क्या है और यह क्यों प्रतिबंधित है?
ULFA-I यानी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम (इंडिपेंडेंट) परेश बरुआ के नेतृत्व वाला उग्रवादी गुट है जो असम को भारत से अलग स्वतंत्र राज्य बनाने की मांग करता है। भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित संगठन घोषित किया हुआ है।
तिनसुकिया में ULFA से जुड़े कितने लोगों को हिरासत में लिया गया?
तिनसुकिया पुलिस ने ULFA-I से संबंध के संदेह में सात व्यक्तियों को हिरासत में लिया। इनमें बोरदुमसा, पेंगरी, काकोपाथर, मियाओ और माकुम के निवासी शामिल हैं।
असम में ULFA विरोधी अभियान का क्या असर होगा?
इस समन्वित कार्रवाई से ULFA-I के स्थानीय नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। गिरफ्तार सदस्यों से पूछताछ के आधार पर सुरक्षा बल संगठन के अन्य सदस्यों और आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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