खेलो भारत मिशन पर मांडविया का बड़ा बयान: हर जिले में दिखनी चाहिए खेल क्रांति
सारांश
Key Takeaways
- श्रीनगर में शनिवार, 25 जनवरी को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों का चिंतन शिविर आयोजित हुआ।
- केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने खेलो भारत मिशन को हर जिले और हर मैदान तक पहुंचाने का आह्वान किया।
- 15 से अधिक राज्यों के खेल मंत्री और अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद, गगन नारंग जैसे दिग्गज शामिल हुए।
- जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की परिकल्पना का समर्थन किया।
- शिविर में कोच प्रमाणीकरण, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, केंद्र-राज्य समन्वय और प्रतिभा पहचान प्रणाली पर ठोस सहमति बनी।
- भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी के मद्देनजर यह शिविर दीर्घकालिक खेल रणनीति की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
श्रीनगर, 25 जनवरी। खेलो भारत मिशन को जमीनी हकीकत में बदलने की प्रतिबद्धता के साथ केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शनिवार को श्रीनगर में आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों के चिंतन शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की खेल महत्वाकांक्षाएं तभी साकार होंगी जब हर खेल के मैदान, हर जिले और हर युवा के सपने में यह मिशन जीवंत हो उठे।
चिंतन शिविर का उद्देश्य और स्वरूप
इस दो-दिवसीय चिंतन शिविर में 15 से अधिक राज्यों के खेल मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और देश की प्रख्यात खेल हस्तियां एकत्रित हुईं। शिविर में पदक रणनीति, नीति समन्वय, स्वच्छ एवं सुरक्षित खेल वातावरण तथा प्रतिभा पहचान एवं विकास पर केंद्रित विषयगत सत्र आयोजित किए गए।
आदिले सुमारीवाला, अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग जैसे दिग्गज खेल व्यक्तित्वों ने भी इस मंच पर अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी शिविर में भाग लेकर भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की परिकल्पना का समर्थन किया।
मांडविया के मुख्य संदेश और दिशा-निर्देश
डॉ. मांडविया ने राज्य सरकारों को केवल नीति अपनाने तक सीमित न रहकर सक्रिय कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति का पैमाना जिलों, प्रशिक्षण प्रणालियों और जमीनी खेल पारिस्थितिकी तंत्र में दिखने वाले ठोस परिणाम होंगे।
उन्होंने वैश्विक खेल शक्ति बनने की 10 वर्षीय योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महज कागजी दस्तावेज नहीं बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने राज्य सरकारों और खेल संघों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को समाप्त कर एक एकीकृत प्रतिभा विकास प्रणाली बनाने पर जोर दिया।
शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को जमीनी खेल पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ बताते हुए मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक प्रतिभा पहचान के लिए शिक्षा प्रणाली के साथ घनिष्ठ समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अवसर के अभाव में एक भी प्रतिभाशाली बच्चा पीछे रह जाता है, तो यह केवल उस बच्चे का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का नुकसान है।
खेल और सामाजिक एकता का संबंध
डॉ. मांडविया ने जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में खेल की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खेल एक परिवर्तनकारी उपकरण की तरह काम करते हैं जो सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं।
यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में खेल अकादमियों और युवा कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज हुए हैं। खेलो भारत के तहत इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है।
व्यवस्थागत सुधार और ओलंपिक लक्ष्य
मंत्री ने कोचों के नियमित प्रमाणीकरण और उन्नयन, वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियों और खेल प्रशासन में क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब बुनियादी ढांचा, प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षित मानव संसाधन एक अटूट श्रृंखला में जुड़ेंगे, तभी ओलंपिक पोडियम पर तिरंगा लहराएगा।
खेल सचिव हरि रंजन राव ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन महज एक सम्मेलन नहीं, बल्कि चिंतन, संकल्प और नवीकृत प्रतिबद्धता का सामूहिक अवसर है। प्रतिभागियों ने सतत निगरानी, मूल्यांकन और राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर भी सहमति जताई।
गौरतलब है कि भारत ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी पेश की है और 2028 लॉस एंजेलेस ओलंपिक में पदक तालिका में बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में यह चिंतन शिविर उस दीर्घकालिक रणनीति की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। आने वाले महीनों में राज्यों द्वारा इस शिविर में लिए गए संकल्पों के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।