रिश्वतखोरी पर ACB का प्रहार: BMC जूनियर इंजीनियर 2.5 लाख रुपए लेते रंगे हाथ धरा
सारांश
Key Takeaways
- ACB ने 24 अप्रैल 2025 को मुंबई में BMC के जूनियर इंजीनियर विशाल भावसार वाणी को 2.5 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
- आरोपी BMC के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स विभाग में तैनात था और उसने ड्रेनेज क्लियरेंस के बदले कुल 10 लाख रुपए की मांग रखी थी।
- शिकायतकर्ता ने 22 अप्रैल को ACB से संपर्क किया, जिसके बाद सहायक आयुक्त प्रवीण पाटिल की निगरानी में ट्रैप ऑपरेशन चलाया गया।
- आरोपी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
- ACB जांच कर रही है कि इस भ्रष्टाचार नेटवर्क में अन्य सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं या नहीं।
- ACB ने नागरिकों से अपील की है कि रिश्वतखोरी की सूचना तुरंत हेल्पलाइन या आधिकारिक वेबसाइट पर दें।
ACB की ताबड़तोड़ कार्रवाई, BMC इंजीनियर गिरफ्तार
मुंबई में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 24 अप्रैल 2025 को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर विशाल भावसार वाणी को 2.5 लाख रुपए की रिश्वत स्वीकार करते हुए मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने एक निर्माण स्थल को ड्रेनेज क्लियरेंस दिलाने के बदले कुल 10 लाख रुपए की मांग की थी।
कैसे बिछाया गया ACB का जाल?
मामले की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से साफ इनकार करते हुए 22 अप्रैल 2025 को ACB से संपर्क किया। शिकायत मिलते ही ACB ने तत्काल कार्ययोजना तैयार की और एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन की रूपरेखा बनाई।
इस पूरी कार्रवाई की निगरानी सहायक आयुक्त प्रवीण पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने की। 24 अप्रैल को जैसे ही आरोपी इंजीनियर विशाल भावसार वाणी ने 2.5 लाख रुपए की पहली किश्त स्वीकार की, ACB की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि विशाल भावसार वाणी ने एक निर्माण स्थल को आवश्यक सरकारी मंजूरियां, विशेष रूप से ड्रेनेज क्लियरेंस, दिलाने के एवज में कुल 10 लाख रुपए की रिश्वत की मांग रखी थी। बातचीत के दौरान उसने पहली किश्त के रूप में 2.5 लाख रुपए लेने पर सहमति जताई।
गिरफ्तारी के बाद ACB ने आरोपी के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस भ्रष्टाचार नेटवर्क में अन्य सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं।
मुंबई प्रशासन में भ्रष्टाचार का पैटर्न
यह मामला कोई अकेली घटना नहीं है। BMC जैसी देश की सबसे बड़ी नगर निगम में निर्माण अनुमतियों और क्लियरेंस के नाम पर रिश्वतखोरी की शिकायतें वर्षों से सामने आती रही हैं। ACB महाराष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, नगर निगम और सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े विभाग सबसे अधिक संवेदनशील बने हुए हैं।
गौरतलब है कि स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स विभाग मुंबई जैसे शहर में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां हर साल मानसून के दौरान जलभराव एक गंभीर समस्या बनती है। ऐसे संवेदनशील विभाग में रिश्वतखोरी न केवल आर्थिक भ्रष्टाचार है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा है — क्योंकि अनुचित ड्रेनेज क्लियरेंस से अवैध या अनुपयुक्त निर्माण को मंजूरी मिल सकती है।
ACB की अपील और आगे की जांच
ACB ने मुंबई के नागरिकों से अपील की है कि रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार की जानकारी तुरंत ACB की हेल्पलाइन या आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज करें। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य नामों का खुलासा भी हो सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या BMC प्रशासन इस मामले में आंतरिक विभागीय जांच का भी आदेश देता है।