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ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी 'पूरी तरह जारी', 37 जहाज रोके गए — ट्रंप का सख्त रुख

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ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी 'पूरी तरह जारी', 37 जहाज रोके गए — ट्रंप का सख्त रुख

सारांश

अमेरिकी सेना ने पुष्टि की कि ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह लागू है और 37 जहाजों का मार्ग बदला गया। 'सेवन' जहाज को अरब सागर में रोककर वापस भेजा गया। ट्रंप ने इस्लामाबाद वार्ता रद्द कर ईरान पर दबाव और बढ़ाया।

मुख्य बातें

यूएस सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी 26 अप्रैल 2025 तक पूरी तरह लागू है।
नाकाबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 37 जहाजों का मार्ग परिवर्तित किया जा चुका है।
'सेवन' नाम के व्यापारिक जहाज को अरब सागर में रोककर ईरान की ओर वापस भेजा गया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता रद्द कर ईरान पर दबाव और बढ़ाया।
ईरान के नरमपंथी और कट्टरपंथी IRGC के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर खुला मतभेद सामने आया।
होर्मुज से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है, जिससे भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

वाशिंगटन, 26 अप्रैलअमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह प्रभावी है और ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को रोकने की कार्रवाई बिना किसी रुकावट के जारी है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि नाकाबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 37 जहाजों का मार्ग परिवर्तित किया जा चुका है।

'सेवन' जहाज को अरब सागर में रोका, वापस भेजा गया

'सेवन' नाम के एक व्यापारिक जहाज को शनिवार को अरब सागर में अमेरिकी नौसेना ने रोका। इसके बाद इस जहाज को अमेरिकी निर्देशों के अनुसार वापस ईरान की दिशा में मोड़ दिया गया और अब इसकी सतत निगरानी की जा रही है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि अमेरिका अपनी नौसैनिक रणनीति में किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 अप्रैल को घोषणा की थी कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू करेगी। यह फैसला पाकिस्तान में 11 और 12 अप्रैल को हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के पहले दौर की विफलता के तुरंत बाद आया, जहाँ दोनों पक्षों के बीच कोई शांति समझौता नहीं हो सका।

ईरान की चेतावनी और आंतरिक मतभेद

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी नाकाबंदी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को खतरा पहुंचा, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। होर्मुज दुनिया का सबसे व्यस्त तेल पारगमन मार्ग है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान के मुख्य सैन्य कमांड 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' ने शनिवार को दोहराया कि यदि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी नाकेबंदी और समुद्री डकैती जारी रखता है, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा।

ईरान के भीतर भी गहरे मतभेद उजागर हुए हैं। नरमपंथी माने जाने वाले विदेश मंत्री अराघची ने शुक्रवार को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है, लेकिन कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार को इसे फिर से बंद कर दिया। यह आंतरिक विरोधाभास ईरानी नेतृत्व की कमज़ोरी और भ्रम को उजागर करता है।

ट्रंप ने इस्लामाबाद वार्ता रद्द की, ईरान पर दबाव बरकरार

राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि इस सप्ताहांत इस्लामाबाद जाने वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा रद्द कर दी गई है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है और यदि ईरान बातचीत चाहता है तो उसे खुद पहल करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा में समय बर्बाद होता है और ईरानी नेतृत्व के भीतर अत्यधिक मतभेद और भ्रम की स्थिति है।

इस्लामाबाद में वार्ता पुनः शुरू करने की कोशिशें विफल होने के बाद ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह बनाए रखी है।

वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का सीधा असर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यह जलमार्ग सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान से निर्यात होने वाले तेल का प्रमुख मार्ग है। भारत, जो ऐतिहासिक रूप से इस मार्ग से तेल आयात करता रहा है, इस तनाव से सीधे प्रभावित हो सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में पहले से ही भारी तनाव है और वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में हैं। यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल और भारत जैसे देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में नजर रहेगी कि ट्रंप प्रशासन की अगली कूटनीतिक चाल क्या होगी और IRGC की प्रतिक्रिया इस संकट की दिशा कैसे तय करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित आर्थिक दबाव की रणनीति है जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बंधक बनाकर ईरान को वार्ता की मेज पर झुकाने की कोशिश है। विडंबना यह है कि जहाँ ईरान के नरमपंथी संवाद की कोशिश कर रहे हैं, वहीं IRGC उन्हीं प्रयासों को पलट रहा है — यह आंतरिक टकराव ईरान की कूटनीतिक कमज़ोरी को उजागर करता है। मुख्यधारा की रिपोर्टिंग इस बात को नज़रअंदाज़ कर रही है कि होर्मुज की नाकाबंदी का सबसे बड़ा शिकार भारत जैसे देश होंगे जो इस मार्ग से अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करते हैं। यह संकट जितना लंबा खिंचेगा, वैश्विक तेल बाजार और भारत की महंगाई पर उतना ही गहरा असर पड़ेगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी क्या है और यह कब शुरू हुई?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 अप्रैल को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकेगी। यह नाकाबंदी ईरान के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को रोककर ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति है।
अब तक कितने जहाजों को अमेरिका ने रोका है?
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकाबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 37 जहाजों का मार्ग परिवर्तित किया जा चुका है। हाल ही में 'सेवन' नाम के व्यापारिक जहाज को अरब सागर में रोककर वापस ईरान की ओर भेजा गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है, जो भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है। नाकाबंदी लंबी चली तो तेल कीमतों में उछाल और भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
ट्रंप ने इस्लामाबाद वार्ता क्यों रद्द की?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है और ईरान को खुद आगे आकर बातचीत करनी होगी। उन्होंने ईरानी नेतृत्व में भारी मतभेद और भ्रम का हवाला देते हुए यात्रा को समय की बर्बादी बताया।
ईरान के भीतर नरमपंथी और कट्टरपंथी गुट में क्या मतभेद है?
विदेश मंत्री अराघची ने शुक्रवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला घोषित किया, लेकिन कट्टरपंथी IRGC ने शनिवार को इसे फिर बंद कर दिया। यह आंतरिक विरोधाभास ईरान की एकजुट कूटनीतिक नीति की कमी को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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