महिला आरक्षण विधेयक: विपक्ष के विरोध पर CM माणिक साहा बोले — महिलाएं देंगी मुंहतोड़ जवाब
सारांश
Key Takeaways
- त्रिपुरा CM माणिक साहा ने 25 अप्रैल 2026 को अगरतला में 'जनक्रोश महिला पदयात्रा' को संबोधित किया।
- उन्होंने विपक्ष के महिला आरक्षण विधेयक विरोध को 'महिलाओं के साथ अन्याय' और 'अस्वीकार्य' बताया।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 कानून बन चुका है, लेकिन जनगणना-परिसीमन की शर्त के कारण लागू नहीं हो पाया।
- 30 अप्रैल 2026 को त्रिपुरा विधानसभा में विधेयक समर्थन में प्रस्ताव पेश होगा।
- कांग्रेस, TMC और CPM सहित विपक्षी गठबंधन ने संशोधन प्रक्रिया का विरोध किया है।
- कार्यक्रम में राजीव भट्टाचार्य, मिमी मजूमदार, कल्याणी साहा रॉय और अंतरा देब सरकार उपस्थित रहीं।
अगरतला, 25 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करके विपक्षी दलों ने देश की महिलाओं के साथ घोर अन्याय किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस रुख का जवाब भारत भर की महिलाएं भविष्य में अवश्य देंगी। यह बयान अगरतला में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित 'जनक्रोश महिला पदयात्रा' के दौरान आया।
पदयात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
यह जनक्रोश महिला पदयात्रा 17 अप्रैल 2026 को संसद में महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े संशोधनों के पारित न होने के विरोध में आयोजित की गई थी। भाजपा का आरोप है कि विपक्षी गठबंधन ने इस ऐतिहासिक विधेयक की राह में जानबूझकर अड़ंगा लगाया।
गौरतलब है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पहले ही संसद में पारित होकर कानून का रूप ले चुका है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई है, जो अभी प्रक्रियाधीन है।
CM साहा का विपक्ष पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे विपक्ष के इस रुख की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि 30 अप्रैल 2026 को त्रिपुरा राज्य विधानसभा में पेश होने वाले प्रस्ताव का समर्थन करें।
साहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विधेयक को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और व्यापक संसदीय चर्चाओं के बाद इसे पारित कराया गया था। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 में विधेयक को संशोधन के लिए संसद में पुनः प्रस्तुत किया गया, जिसका मुख्य कारण इसके कार्यान्वयन में होने वाली संभावित देरी को कम करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 2011 की जनगणना के आधार पर कुछ बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि जनगणना पूरी होने की प्रतीक्षा किए बिना विधेयक को जल्द लागू किया जा सके।
विपक्षी गठबंधन का विरोध और राजनीतिक समीकरण
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अन्य क्षेत्रीय दलों ने इस संशोधन प्रक्रिया का विरोध किया है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार की मंशा पर सवाल उठाए जाने चाहिए, क्योंकि कानून बनने के बाद भी उसके क्रियान्वयन को जनगणना से जोड़ा गया है।
यह विरोधाभास उल्लेखनीय है — एक ओर भाजपा महिला सशक्तिकरण का श्रेय लेती है, वहीं विपक्ष का सवाल है कि यदि इरादा नेक था तो जनगणना की शर्त क्यों जोड़ी गई? आलोचकों का कहना है कि इस शर्त के चलते 2029 या उसके बाद तक विधेयक लागू नहीं हो पाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख नेता
इस जनक्रोश महिला पदयात्रा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद राजीव भट्टाचार्य, महिला मोर्चा अध्यक्ष मिमी मजूमदार, राज्य विधानसभा में मुख्य सचेतक कल्याणी साहा रॉय, विधायक अंतरा देब सरकार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
आगे क्या होगा — राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
CM साहा ने कहा कि महिलाएं पहले ही सड़कों पर उतर कर अपना विरोध दर्ज करा चुकी हैं और आने वाले दिनों में यह आवाज और मुखर होगी। 30 अप्रैल 2026 को त्रिपुरा विधानसभा में पेश होने वाला प्रस्ताव इस मुद्दे पर राज्य की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करेगा।
यह मुद्दा 2026-27 के विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हथियार बन सकता है। महिला मतदाताओं की संख्या और उनकी भागीदारी को देखते हुए, यह विधेयक चुनावी नतीजों पर गहरा असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर जो दल महिलाओं का विश्वास जीतेगा, वह राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में होगा।