पाकिस्तान में मानसून का कहर: 107 मौतें, गिलगित-बाल्टिस्तान से पंजाब तक तबाही
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने रविवार, 26 जुलाई को बताया कि 26 जून से जारी मानसून बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 107 लोगों की मौत हो चुकी है और 344 लोग घायल हुए हैं। यह आँकड़ा पाकिस्तान के कई प्रांतों में एक साथ जारी मानसूनी आपदा की भयावहता को दर्शाता है।
मुख्य घटनाक्रम
पिछले 24 घंटों में पंजाब में सात, सिंध में दो, तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) और खैबर पख्तूनख्वा में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। इस दौरान 25 लोग और घायल हुए — जिनमें पंजाब के 20, खैबर पख्तूनख्वा के तीन और सिंध के दो लोग शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 447 घरों को नुकसान पहुँचा है और 269 पशुओं की भी मौत हुई है।
लाहौर और पंजाब में तबाही
लाहौर की गढ़ी शहू रेलवे कॉलोनी, बॉबी प्लाजा, सग्गियन पिंड और काहना में छत गिरने की चार अलग-अलग घटनाओं में एक पुरुष, एक महिला और एक बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पाँच लोग घायल हुए। पंजाब के कसूर जिले में अड्डा ढिंग शाह के पास एक घर की छत गिरने से एक पुरुष और एक बच्चे समेत दो लोगों की मौत हुई और तीन अन्य घायल हुए।
फैसलाबाद में भारी बारिश से एक घर की छत गिरने से एक महिला की मौत हो गई। गुजरांवाला की पठान कॉलोनी के पास खेतों में जमा बारिश के पानी में डूबने से एक बच्चे की जान चली गई। रिपोर्टों के अनुसार, इन मौतों की मुख्य वजहें डूबना और इमारतों का गिरना रही हैं, जबकि छत गिरने और बिजली का करंट लगने से लोग घायल हुए।
गिलगित-बाल्टिस्तान में ग्लेशियर संकट
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के कई इलाकों का सड़क संपर्क लगातार चौथे दिन भी बाधित रहा। अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियल झील फटने की घटनाओं ने राजमार्गों को क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे राहत और मरम्मत कार्य में गंभीर दिक्कत आ रही है। पीओजीबी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के महानिदेशक अताउर रहमान काकर ने बताया कि 18 जुलाई से 21 जुलाई के बीच तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया था, जिससे ग्लेशियर तेजी से पिघले और कई इलाकों में ग्लेशियल झील फटने की घटनाएँ हुईं।
रिपोर्टों के अनुसार, हजारों लोग और पर्यटक सड़क बंद होने के कारण कई घाटियों में फँसे हुए हैं। प्रभावित इलाकों में पीने के पानी, बिजली और संचार सेवाओं का भी गंभीर संकट बना हुआ है।
सरकार की अपील
एनडीएमए ने लोगों — खासकर कमजोर और जोखिम वाले इलाकों में रहने वालों — से सतर्क रहने और अधिकारियों के सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। मानसून बारिश अभी भी जारी है और आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते ग्लेशियल झील विस्फोट (GLOF) के खतरों से जूझ रहा है। गौरतलब है कि 2022 की विनाशकारी बाढ़ में पाकिस्तान के एक-तिहाई हिस्से में पानी भर गया था और 1,700 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। राहत एजेंसियाँ प्रभावित इलाकों में पहुँचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सड़क संपर्क टूटा होने से यह काम बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।