पाकिस्तान में मानसून का कहर: 26 जून से 1 अगस्त के बीच 196 मौतें, 404 घायल
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में इस वर्ष के मानसून सीजन ने भारी तबाही मचाई है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) के आंकड़ों के अनुसार, 26 जून से 1 अगस्त 2026 के बीच बारिश से जुड़ी घटनाओं में 196 लोगों की मौत हो चुकी है और 404 लोग घायल हुए हैं। करंट लगना, अचानक आई बाढ़, डूबना, बिजली गिरना तथा घर और पेड़ गिरने की घटनाएं इन मौतों की प्रमुख वजह रही हैं।
प्रांतवार नुकसान का ब्यौरा
एनडीएमए की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित प्रांत खैबर पख्तूनख्वा रहा, जहाँ इस अवधि में 55 लोगों की जान गई और 82 लोग घायल हुए। पंजाब में 47 मौतें और 295 घायल दर्ज किए गए — घायलों की संख्या के लिहाज़ से यह सबसे बुरी तरह प्रभावित प्रांत है। बलूचिस्तान में 8 मौतें और 15 घायल, जबकि सिंध में 5 मौतें और 7 घायल हुए।
पिछले 24 घंटों में भी स्थिति गंभीर बनी रही — इस दौरान 4 और लोगों की मौत हुई और 16 लोग घायल हुए, जिनमें डूबने और बिजली गिरने की घटनाएं शामिल हैं।
राहत एवं बचाव अभियान
एनडीएमए ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान चलाए गए राहत और बचाव अभियानों में पंजाब से 9 लोगों, सिंध से 5 लोगों और खैबर पख्तूनख्वा से 2 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। हालाँकि, बाढ़ प्रभावित कई इलाकों में राहत सामग्री पहुँचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में संपर्क टूटा
जुलाई में पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के कई इलाकों का सड़क संपर्क बाधित हो गया। अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटनाओं ने सड़कों और राजमार्गों को व्यापक नुकसान पहुँचाया, जिससे मरम्मत कार्य भी प्रभावित हुआ। नगर जिले की हिस्पर घाटी के निवासियों के अनुसार, मरीजों और छात्रों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है — खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की कमी हो गई है।
डायमर, अस्तोर, घिजर और पीओजीबी के अन्य प्रभावित जिलों में भी बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें आ रही हैं। सड़कें बंद होने के कारण हज़ारों स्थानीय लोग और पर्यटक फँसे हुए हैं।
आम जनता पर असर
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीने के पानी, बिजली और संचार सेवाओं की गंभीर कमी देखी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर राहत और पुनर्निर्माण कार्य और भी कठिन हो गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में 2022 की विनाशकारी बाढ़ ने देश के एक-तिहाई हिस्से को जलमग्न कर दिया था और 1,700 से अधिक लोगों की जान ली थी — इस बार की स्थिति उस त्रासदी की पुनरावृत्ति की आशंका जगाती है।
आगे क्या
मानसून का सीजन अभी जारी है और आने वाले हफ्तों में और बारिश की संभावना है। एनडीएमए ने प्रांतीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों को अलर्ट पर रखा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान में GLOF की घटनाएं और अचानक बाढ़ की आवृत्ति बढ़ती जा रही है, जो दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन नीति की माँग करती है।