शंकर शाह-रघुनाथ शाह बलिदान दिवस: शिवराज चौहान, CM मोहन यादव समेत नेताओं ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर 18 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के राजनीतिक जगत ने एकजुट होकर इन वीर पिता-पुत्र को श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव तक, सत्तारूढ़ दल के नेताओं के साथ विपक्षी कांग्रेस ने भी इन जनजातीय नायकों की वीरगाथा को याद किया।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी श्रद्धांजलि पोस्ट करते हुए लिखा, '1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अमर नायक, जनजातीय गौरव, अमर बलिदानी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। आपके साहस और वीरता की गौरवगाथा सदैव देश की भावी पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के लिए मर-मिटने की प्रेरणा देती रहेगी।'
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, 'मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पित करने वाले जनजातीय नायक राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता के लिए पिता-पुत्र का अदम्य साहस देश के गौरवशाली शौर्य इतिहास का अविस्मरणीय अध्याय है।'
उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की श्रद्धांजलि
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने एक्स पर लिखा, 'गोंडवाना साम्राज्य के महान नायक, 1857 की क्रांति के अग्रदूत महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध उन्होंने अपने अदम्य शौर्य और पराक्रम से क्रांति की ज्योति प्रज्वलित की।'
राज्य सरकार में ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा, 'ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों के विरुद्ध क्रांति का बिगुल फूंककर गोंडवाना की पावन माटी पर मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राण न्योछावर करने वाली इस वीर पिता-पुत्र की जोड़ी का साहस और समर्पण हम सभी के लिए वंदनीय है।'
विपक्ष की आवाज़
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी महाराजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन वीरों का बलिदान युगों-युगों तक आने वाली पीढ़ियों को देशप्रेम की प्रेरणा देता रहेगा। यह तथ्य उल्लेखनीय है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने इस अवसर पर एक स्वर में इन जनजातीय वीरों का स्मरण किया।
शंकर शाह और रघुनाथ शाह: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह गोंडवाना साम्राज्य के शासक थे जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उनके अभियान को देशद्रोह मानकर अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें तोप से उड़ा दिया था। यह घटना 18 सितंबर 1858 को जबलपुर में हुई थी। आज उनका बलिदान दिवस जनजातीय गौरव और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
आम जनता और जनजातीय समाज पर असर
इन नायकों की स्मृति जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी है। प्रतिवर्ष उनके बलिदान दिवस पर मध्य प्रदेश में विशेष रूप से जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस वर्ष वरिष्ठ नेताओं की व्यापक श्रद्धांजलि ने इस दिवस को और अधिक महत्त्व प्रदान किया। आने वाले समय में भी जनजातीय नायकों की विरासत को राष्ट्रीय स्मृति में स्थायी स्थान दिलाने की कोशिशें जारी रहने की उम्मीद है।