राजगुरु जयंती: ओम बिरला, अमित शाह और जेपी नड्डा ने किया अमर शहीद को नमन
सारांश
मुख्य बातें
अमर शहीद शिवराम हरि राजगुरु की जयंती पर 24 अगस्त को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने इस महान क्रांतिकारी के बलिदान को याद किया।
ओम बिरला की श्रद्धांजलि
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देने वाले महान क्रांतिकारी और अमर शहीद शिवराम हरि राजगुरु की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।' उन्होंने कहा कि भगत सिंह और सुखदेव के साथ राजगुरु का संघर्ष भारत के स्वाधीनता संग्राम का वह गौरवशाली अध्याय है, जिसने देश के युवाओं में स्वतंत्रता की चेतना को नई ऊर्जा दी। बिरला ने यह भी रेखांकित किया कि अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय और दमन के विरुद्ध राजगुरु ने अदम्य साहस, निर्भीकता और राष्ट्रभक्ति के साथ संघर्ष किया।
अमित शाह का संदेश
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'मातृभूमि की स्वाधीनता को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय बनाकर राजगुरु ने भगत सिंह और सुखदेव के साथ मिलकर क्रांति की ऐसी ज्वाला प्रज्वलित की, जिसने पूरे स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा व ऊर्जा दी।' शाह ने यह भी स्मरण कराया कि राजगुरु ने अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के आगे कभी सिर नहीं झुकाया और हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को गले लगा लिया। शाह के अनुसार, मात्र 22 वर्ष की आयु में दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान देश के युवाओं को सदैव राष्ट्र प्रथम के लिए प्रेरित करता रहेगा।
जेपी नड्डा और नितिन नवीन का नमन
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने राजगुरु को 'मां भारती का वीर सपूत' बताते हुए कहा कि उनका अटूट समर्पण देशवासियों को राष्ट्रसेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा। BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी अपनी पोस्ट में कहा कि राजगुरु ने युवा अवस्था में ही क्रांतिकारी आंदोलन का मार्ग चुना और 22 वर्ष की आयु में हँसते-हँसते अपना सर्वस्व राष्ट्र के चरणों में अर्पित कर दिया।
राजगुरु का ऐतिहासिक योगदान
गौरतलब है कि शिवराम हरि राजगुरु भारत के स्वाधीनता संग्राम के उन अग्रणी क्रांतिकारियों में से थे, जिन्होंने भगत सिंह और सुखदेव के साथ मिलकर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध को नई धार दी। तीनों को एक साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी दी गई थी — यह तारीख आज भी 'शहीद दिवस' के रूप में मनाई जाती है। यह ऐसे समय में है जब देश अपनी स्वतंत्रता की विरासत को पुनः स्मरण कर रहा है, कि इन नेताओं ने राजगुरु के बलिदान को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया।
युवाओं के लिए संदेश
सभी नेताओं ने एक स्वर में राजगुरु के बलिदान को आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बताया। राष्ट्रभक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा के इस प्रतीक को हर वर्ष उनकी जयंती पर स्मरण किया जाता है, और इस बार वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारियों की भागीदारी ने इस स्मरण को विशेष महत्त्व दिया।