शहीद सुखदेव जयंती पर अमित शाह और मुख्यमंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि, बोले — बलिदान सदा प्रेरित करेगा

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शहीद सुखदेव जयंती पर अमित शाह और मुख्यमंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि, बोले — बलिदान सदा प्रेरित करेगा

सारांश

15 मई को शहीद सुखदेव की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह से लेकर पाँच राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने भगत सिंह और राजगुरु के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाले इस अमर क्रांतिकारी के बलिदान को राष्ट्रप्रेरणा का अक्षय स्रोत बताया।

मुख्य बातें

15 मई 2026 को अमर क्रांतिकारी शहीद सुखदेव की जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सुखदेव ने भगत सिंह और राजगुरु के साथ लाला लाजपत राय की मृत्यु के प्रतिशोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी , हरियाणा के नायब सैनी और राजस्थान के भजनलाल शर्मा ने भी सुखदेव को नमन किया।
सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को हुआ था; 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्हें फाँसी दी गई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने 15 मई 2026 को अमर क्रांतिकारी शहीद सुखदेव की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने एकस्वर में कहा कि सुखदेव का सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की राह दिखाता रहेगा।

अमित शाह की श्रद्धांजलि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, 'अमर क्रांतिकारी सुखदेव की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान के प्रतीक सुखदेव ने स्वाधीनता को जीवन का लक्ष्य बनाकर मातृभूमि की आजादी हेतु अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।' शाह ने आगे कहा कि लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध लेने में सुखदेव ने भगत सिंह और राजगुरु के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और उनका यह बलिदान सदैव राष्ट्रभक्तों को प्रेरित करता रहेगा।

मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, 'मातृभूमि की स्वतंत्रता और गौरव की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले अमर क्रांतिकारी सुखदेव की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। उनका त्यागमय व राष्ट्रनिष्ठ जीवन प्रत्येक नागरिक को कर्तव्यपथ पर अडिग रहकर मां भारती की अस्मिता और गौरव की रक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा।'

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'अपनी युवा अवस्था में ही मातृभूमि की वेदी पर प्राणों की आहुति देने वाले सुखदेव जी का अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति हर पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज है। देश उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।'

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिखा कि सुखदेव का साहस, देशभक्ति और बलिदान सदैव राष्ट्रवासियों को प्रेरित करता रहेगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर लिखा कि मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण और त्याग हर भारतीय के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सुखदेव का सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति की राह पर सदैव प्रेरित करता रहेगा।

कौन थे शहीद सुखदेव

सुखदेव थापर का जन्म 15 मई 1907 को हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रणी क्रांतिकारियों में से थे जिन्होंने अपनी युवावस्था में ही देश के लिए प्राणों की आहुति दे दी। भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष को एक नई धार दी। लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध लेने की योजना में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्हें भगत सिंह और राजगुरु के साथ फाँसी दे दी गई।

राष्ट्रीय स्मरण का महत्व

गौरतलब है कि सुखदेव की जयंती पर इस वर्ष देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। यह ऐसे समय में आया है जब युवाओं में राष्ट्रीय नायकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास तेज हो रहे हैं। केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक, सभी ने इस अवसर पर क्रांतिकारी सुखदेव के जीवन और संघर्ष को स्मरण किया।

देश के नेताओं की यह एकजुट श्रद्धांजलि इस बात का संकेत है कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों की विरासत आज भी राष्ट्रीय चेतना में जीवित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन श्रद्धांजलियों के पीछे पाठ्यक्रम, संग्रहालय और सार्वजनिक स्मृति में ठोस निवेश भी है। सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरु की विचारधारा केवल बलिदान तक सीमित नहीं थी — वे औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध एक सुस्पष्ट राजनीतिक दृष्टि रखते थे, जिसे अक्सर स्मरण समारोहों में नजरअंदाज किया जाता है। राष्ट्रीय नायकों की विरासत तब सार्थक होती है जब उनके विचारों पर भी उतनी ही गंभीरता से बात हो, जितनी उनके बलिदान पर।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शहीद सुखदेव कौन थे और उनकी जयंती कब है?
सुखदेव थापर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी थे, जिनका जन्म 15 मई 1907 को हुआ था। भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष किया और 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष की आयु में फाँसी पर चढ़ गए।
अमित शाह ने सुखदेव जयंती पर क्या कहा?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सुखदेव ने भगत सिंह और राजगुरु के साथ लाला लाजपत राय की मृत्यु का प्रतिशोध लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि सुखदेव का सर्वोच्च बलिदान सदैव राष्ट्रभक्तों को देशसेवा और मातृभूमि के प्रति समर्पण के लिए प्रेरित करता रहेगा।
किन-किन मुख्यमंत्रियों ने सुखदेव जयंती पर श्रद्धांजलि दी?
उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की रेखा गुप्ता, बिहार के सम्राट चौधरी, हरियाणा के नायब सैनी और राजस्थान के भजनलाल शर्मा ने 15 मई 2026 को सुखदेव जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुखदेव का स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान था?
सुखदेव ने भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के माध्यम से क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व किया। लाला लाजपत राय की मृत्यु के प्रतिशोध की योजना में उनकी केंद्रीय भूमिका रही और उन्होंने अपनी युवावस्था में ही देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरु को फाँसी कब दी गई थी?
तीनों क्रांतिकारियों — सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरु — को 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फाँसी दी गई थी। इस दिन को शहीद दिवस के रूप में याद किया जाता है।
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