16 मई: वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव एक साथ, जानें शुभ मुहूर्त और अशुभ काल

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16 मई: वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव एक साथ, जानें शुभ मुहूर्त और अशुभ काल

सारांश

16 मई को ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव का दुर्लभ संयोग है। ब्रह्म मुहूर्त से गोधूलि तक कई शुभ काल हैं, जबकि राहुकाल और यमगंड से बचना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

16 मई 2025 को वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव एकसाथ मनाए जाएंगे।
अमावस्या तिथि 16 मई प्रातः 5:11 बजे से 17 मई रात्रि 1:30 बजे तक।
सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 से 12:45 बजे तक।
राहुकाल प्रातः 8:54 से 10:36 बजे तक — इस दौरान पूजा-संकल्प से बचें।
शनि भक्त काले तिल , सरसों का तेल और लोहे की वस्तुएं दान करके शनि शांति प्राप्त कर सकते हैं।
पूरे दिन आडल योग रहेगा।

16 मई 2025 को सनातन धर्म के दो महत्वपूर्ण पर्व एकसाथ मनाए जाएंगे — वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सवज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के इस संयोग पर विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख और आरोग्य की कामना से व्रत रखेंगी, जबकि शनिभक्त शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।

वट सावित्री व्रत का महत्व और पौराणिक संदर्भ

धर्मशास्त्रों के अनुसार, सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस दिलाने के लिए अपनी बुद्धि और अटूट भक्ति का परिचय दिया था। इसी पौराणिक कथा की स्मृति में सुहागिन स्त्रियाँ वट वृक्ष (बरगद) की जड़ में जल, पुष्प, अक्षत और फल अर्पित कर पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से पारिवारिक सुख और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है।

शनि जन्मोत्सव: पूजा विधि और दान का महत्व

शनि जयंती पर शनि दोष और साढ़े साती के प्रभाव को कम करने के लिए शनि शांति पूजा और तेलाभिषेक का विशेष विधान है। धर्माचार्यों के अनुसार, इस दिन काले तिल, सरसों का तेल और लोहे की वस्तुएं दान करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। हवन और दीप-दान भी शुभ माने जाते हैं।

अमावस्या तिथि और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

दृक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को प्रातः 5 बजकर 11 मिनट से आरंभ होगी और 17 मई की रात्रि 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 30 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 7 बजकर 5 मिनट पर होगा।

शुभ मुहूर्त और योग

पंचांग के अनुसार 16 मई के प्रमुख शुभ काल इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:07 से 4:48 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:45 बजे तक। विजय मुहूर्त: दोपहर 2:34 से 3:28 बजे तक। अमृत काल: दोपहर 1:15 से 2:40 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: सायं 7:04 से 7:25 बजे तक। इस दिन पूरे दिन आडल योग रहेगा।

अशुभ काल — इन समयों में पूजा से बचें

पंचांग के अनुसार 16 मई के अशुभ समय इस प्रकार हैं:

राहुकाल: प्रातः 8:54 से 10:36 बजे तक। यमगंड: दोपहर 2:00 से 3:42 बजे तक। गुलिक काल: प्रातः 5:30 से 7:12 बजे तक। दुर्मुहूर्त: प्रातः 5:30 से 6:24 बजे तक और 6:24 से 7:19 बजे तक। इन कालों में शुभ कार्य, पूजा-पाठ और व्रत-संकल्प से परहेज करना उचित माना जाता है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार, इन दोनों व्रतों और पूजाओं के एकसाथ पड़ने से इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त का लाभ उठाकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पाठकों के लिए असली उपयोगिता सटीक मुहूर्त सूचना में है — जो अक्सर अस्पष्ट या परस्पर विरोधाभासी रूप में परोसी जाती है। पंचांग-आधारित समय सारणी को स्पष्ट और एक स्थान पर प्रस्तुत करना ही इस खबर की असली सेवा है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि आडल योग जैसे कालों की व्याख्या अलग-अलग पंचांगों में भिन्न हो सकती है, इसलिए स्थानीय पुरोहित या मान्य पंचांग से पुष्टि करना श्रेयस्कर रहेगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

16 मई 2025 को वट सावित्री व्रत और शनि जन्मोत्सव एकसाथ क्यों है?
इस वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या 16 मई को पड़ रही है, और शनि जयंती भी इसी तिथि को मनाई जाती है, इसलिए दोनों पर्व एक ही दिन हैं। यह संयोग धार्मिक दृष्टि से विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
वट सावित्री व्रत में कौन-सी पूजा विधि अपनाई जाती है?
विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की जड़ में जल, पुष्प, अक्षत, फल और धागा अर्पित करती हैं और पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह व्रत सावित्री की भक्ति और बुद्धि की स्मृति में किया जाता है।
16 मई को शनि जन्मोत्सव पर क्या दान करें?
शनि जयंती पर काले तिल, सरसों का तेल और लोहे की वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा तेलाभिषेक और शनि शांति हवन से शनि दोष व साढ़े साती के प्रभाव में कमी आती है।
16 मई 2025 का सबसे अच्छा पूजा मुहूर्त कौन-सा है?
दृक पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 11:50 से 12:45 बजे) और ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:07 से 4:48 बजे) सर्वश्रेष्ठ हैं। अमृत काल दोपहर 1:15 से 2:40 बजे तक भी शुभ है।
16 मई को किन समयों में पूजा और शुभ कार्य नहीं करने चाहिए?
राहुकाल (प्रातः 8:54 से 10:36 बजे), यमगंड (दोपहर 2:00 से 3:42 बजे) और दुर्मुहूर्त (प्रातः 5:30 से 7:19 बजे) में शुभ कार्यों से परहेज उचित है। गुलिक काल प्रातः 5:30 से 7:12 बजे तक भी अशुभ माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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