पायधुनी कांड: पोस्टमार्टम में जिंक फास्फाइड से मौत की पुष्टि, तरबूज में जहर का रहस्य बरकरार

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पायधुनी कांड: पोस्टमार्टम में जिंक फास्फाइड से मौत की पुष्टि, तरबूज में जहर का रहस्य बरकरार

सारांश

मुंबई के पायधुनी में एक परिवार के चार सदस्यों की मौत का रहस्य गहराता जा रहा है। पोस्टमार्टम में जिंक फास्फाइड की पुष्टि हो गई, लेकिन तरबूज में यह जहर कैसे पहुँचा — आत्महत्या, हादसा या हत्या — यह सवाल 100 बयानों और FSL रिपोर्ट के बाद भी अनुत्तरित है।

मुख्य बातें

सर जे जे अस्पताल की अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जिंक फास्फाइड से चारों की मौत की पुष्टि हुई।
26 अप्रैल की रात करीब 1 बजे परिवार ने तरबूज खाया; 12 घंटों के भीतर सभी की मौत हो गई।
FSL रिपोर्ट में भी तरबूज और विसरा सैंपल में जिंक फास्फाइड की मौजूदगी पहले ही पुष्ट हो चुकी थी।
पुलिस अब तक करीब 100 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिनमें 20 से अधिक दवा विक्रेता शामिल हैं।
जांच का दायरा 22 से 25 अप्रैल के बीच जिंक फास्फाइड की खरीद और परिवार से संपर्क पर केंद्रित।
मामला — आत्महत्या, हादसा या हत्या — अभी तक अनिर्धारित।

मुंबई के पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सर जे जे अस्पताल की अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि सभी चारों की मौत जिंक फास्फाइड नामक जहरीले रसायन से हुई — यही रसायन आमतौर पर चूहे मारने की दवा के रूप में इस्तेमाल होता है। इसके बावजूद मुंबई पुलिस अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि यह सामूहिक आत्महत्या थी, दुर्घटना थी, या किसी सुनियोजित साजिश का नतीजा।

मुख्य घटनाक्रम

जांच के अनुसार, 26 अप्रैल की रात घटना से पहले परिवार ने पाँच रिश्तेदारों के साथ घर पर भोजन किया था। मेहमानों के जाने के बाद रात करीब 1 बजे परिवार के चारों सदस्यों ने तरबूज खाया। अगले 12 घंटों के भीतर सभी की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट में भी तरबूज और मृतकों के विसरा सैंपल में जिंक फास्फाइड की मौजूदगी की पुष्टि पहले ही हो चुकी थी। अब अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस निष्कर्ष पर मुहर लगा दी है।

जांच का दायरा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब तक करीब 100 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं — इनमें रिश्तेदार, पड़ोसी और इलाके में चूहे मारने की दवा बेचने वाले 20 से अधिक दुकानदार शामिल हैं। जांच का फोकस अब परिवार के उन रिश्तेदारों और मेहमानों पर है जो उस रात घर पर आए थे।

अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि 22 से 25 अप्रैल के बीच किसने जिंक फास्फाइड खरीदा और परिवार के घर आया था। मामले से जुड़े लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी खंगाले जा रहे हैं। इसके अलावा उस मोबाइल एक्सेसरीज मार्केट के व्यापारियों से भी पूछताछ की गई है, जहाँ मृतक अब्दुल्ला दोकाडिया काम करते थे।

पुलिस की स्थिति

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल किसी पर सीधा संदेह नहीं है और कोई ठोस सुराग भी सामने नहीं आया है। व्यापक जांच के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि परिवार ने स्वयं यह कदम उठाया या कोई बाहरी साजिश थी।

रहस्य बरकरार

सबसे बड़ा सवाल यह है कि तरबूज में जिंक फास्फाइड कैसे पहुँचा — क्या उसे जानबूझकर मिलाया गया, या यह किसी और माध्यम से परिवार तक पहुँचा? यह सस्पेंस अभी भी बरकरार है। गौरतलब है कि जिंक फास्फाइड एक तीव्र विषैला रसायन है जो पानी या नमी के संपर्क में आते ही फॉस्फीन गैस छोड़ता है — यही गैस घातक होती है।

आगे क्या

पुलिस CDR विश्लेषण, दुकानदारों के बिक्री रिकॉर्ड और पारिवारिक संबंधों की गहन पड़ताल जारी रखे हुए है। जब तक मौत का तरीका और जिम्मेदार व्यक्ति या परिस्थिति स्पष्ट नहीं होती, मामला अनसुलझा बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मुंबई पुलिस 100 बयानों के बाद भी मामले की प्रकृति तय नहीं कर पाई है — यह जांच की सीमा को उजागर करता है। तरबूज में जिंक फास्फाइड की मौजूदगी आकस्मिक दूषण की संभावना को लगभग खारिज करती है, क्योंकि यह रसायन बाजार में खुले तरबूज में स्वाभाविक रूप से नहीं पहुँचता। ऐसे में जब तक CDR विश्लेषण और दुकानदारों के बिक्री रिकॉर्ड सामने नहीं आते, 'अज्ञात कारण' की आड़ में जांच की धीमी रफ्तार पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पायधुनी कांड में मौत का कारण क्या निकला?
सर जे जे अस्पताल की अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार परिवार के चारों सदस्यों की मौत जिंक फास्फाइड नामक जहरीले रसायन से हुई। FSL रिपोर्ट ने भी तरबूज और मृतकों के विसरा सैंपल में इसी रसायन की मौजूदगी की पुष्टि की थी।
जिंक फास्फाइड तरबूज में कैसे पहुँचा?
यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस यह जाँच कर रही है कि 22 से 25 अप्रैल के बीच किसने यह रसायन खरीदा और परिवार के संपर्क में आया। तरबूज में जानबूझकर मिलाया गया या किसी अन्य तरीके से पहुँचा — यह सस्पेंस बरकरार है।
क्या यह हत्या है, आत्महत्या है या हादसा?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। मामले की प्रकृति — सामूहिक आत्महत्या, दुर्घटना या सुनियोजित हत्या — तय करने के लिए जांच जारी है।
पुलिस ने अब तक जांच में क्या किया है?
पुलिस ने करीब 100 लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें रिश्तेदार, पड़ोसी और 20 से अधिक दवा विक्रेता शामिल हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और मृतक अब्दुल्ला दोकाडिया के कार्यस्थल के व्यापारियों से भी पूछताछ हुई है।
जिंक फास्फाइड क्या होता है और यह इतना खतरनाक क्यों है?
जिंक फास्फाइड एक तीव्र विषैला रसायन है जिसका उपयोग मुख्यतः चूहे मारने की दवा के रूप में होता है। नमी या पानी के संपर्क में आने पर यह घातक फॉस्फीन गैस उत्सर्जित करता है, जो श्वसन तंत्र और अंगों को तेजी से नुकसान पहुँचाती है।
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