शलभासन के फायदे: कोर मसल्स, पाचन और कब्ज में राहत — आयुष मंत्रालय की योग सीरीज

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शलभासन के फायदे: कोर मसल्स, पाचन और कब्ज में राहत — आयुष मंत्रालय की योग सीरीज

सारांश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आयुष मंत्रालय की दैनिक योग श्रृंखला में शलभासन की बारी आई — एक ऐसा आसन जो कोर मसल्स, पाचन और कब्ज तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करता है। लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 15 मई 2025 को अपनी योग दिवस श्रृंखला में शलभासन (Locust Pose) की जानकारी साझा की।
यह आसन कोर मसल्स , पाचन तंत्र और कब्ज तीनों में राहत देने में प्रभावी माना जाता है।
अभ्यास की शुरुआत 3 से 4 बार से करें; पेट के बल लेटकर सांस के साथ पैर ऊपर उठाएँ।
लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित।
गर्भवती महिलाएँ , हर्निया के रोगी और हाल ही में सर्जरी हुए लोग पहले विशेषज्ञ से परामर्श लें।

आयुष मंत्रालय ने 15 मई 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी के तहत अपनी दैनिक योगासन श्रृंखला में शलभासन (Locust Pose) के लाभों की विस्तृत जानकारी साझा की। मंत्रालय के अनुसार, यह आसन विशेष रूप से कमज़ोर कोर मसल्स, खराब पाचन और पुरानी कब्ज जैसी सामान्य समस्याओं में प्रभावी राहत देता है।

शलभासन क्या है और यह कैसे काम करता है

शलभासन को अंग्रेज़ी में Locust Pose कहा जाता है। इस आसन में साधक पेट के बल लेटकर दोनों पैरों को ऊपर उठाता है, जिससे शरीर का आकार तीर जैसा बन जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह स्थिति पेट के निचले हिस्से, पीठ की मांसपेशियों और समग्र कोर क्षेत्र पर एक साथ दबाव डालती है, जिससे ये सभी क्षेत्र सक्रिय और मज़बूत होते हैं।

गौरतलब है कि शरीर अक्सर किसी बड़ी समस्या के उभरने से पहले हल्के संकेत देता है — जैसे बार-बार थकान, पेट में भारीपन या पीठ में हल्का दर्द। मंत्रालय का कहना है कि इन्हीं प्रारंभिक संकेतों को समय रहते पहचानकर शलभासन के नियमित अभ्यास से नियंत्रित किया जा सकता है।

मुख्य स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार शलभासन के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

कोर मसल्स को मज़बूती: पेट और पीठ की मांसपेशियाँ एक साथ सक्रिय होती हैं, जिससे शरीर का संतुलन और स्थिरता बेहतर होती है। पाचन में सुधार: इस आसन के दौरान पेट के अंगों पर पड़ने वाला दबाव पाचन क्रिया को उत्तेजित करता है। कब्ज से राहत: नियमित अभ्यास आँतों की गतिशीलता बढ़ाता है, जिससे कब्ज जैसी आम समस्या में राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त, यह पीठ और कमर के दर्द को कम करने, शरीर की सहनशक्ति बढ़ाने और थकान दूर करने में भी सहायक बताया गया है।

सही विधि: चरण-दर-चरण अभ्यास

योग विशेषज्ञों के अनुसार शलभासन की सही विधि इस प्रकार है: सबसे पहले मैट पर पेट के बल लेट जाएँ और ठोड़ी ज़मीन पर टिकाएँ। दोनों हाथ शरीर के साथ सटाकर रखें, हथेलियाँ नीचे की ओर। इसके बाद सांस अंदर लेते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे जितना संभव हो ऊपर उठाएँ। कुछ सेकंड इसी स्थिति में रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए पैरों को धीरे-धीरे नीचे लाएँ। शुरुआत में 3 से 4 बार करें और अभ्यास बढ़ने के साथ दोहराव की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह आसन सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। गर्भवती महिलाओं, हर्निया के रोगियों, पीठ की गंभीर समस्या से पीड़ित व्यक्तियों और हाल ही में किसी सर्जरी से गुज़रे लोगों को किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद ही यह आसन करना चाहिए।

किसके लिए विशेष रूप से उपयोगी

आयुष मंत्रालय ने विशेष रूप से उन लोगों के लिए इस आसन की अनुशंसा की है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं — जैसे कार्यालय कर्मचारी, सॉफ्टवेयर पेशेवर या छात्र। लंबे समय तक बैठे रहने से कोर की मांसपेशियाँ निष्क्रिय हो जाती हैं और पाचन तंत्र प्रभावित होता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पहले मंत्रालय की यह श्रृंखला रोज़ एक नए आसन पर केंद्रित है, जो आम जन को सरल और प्रभावी योग विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें वैज्ञानिक शोध के सीधे संदर्भों का अभाव है — दावे मंत्रालय के अपने वक्तव्यों पर आधारित हैं, किसी पीयर-रिव्यूड अध्ययन पर नहीं। यह ध्यान देने योग्य है कि शलभासन जैसे आसन पारंपरिक योग ग्रंथों में सदियों से वर्णित हैं, किंतु आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इनके दावों की पुष्टि के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है। पाठकों को सलाह है कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग को पूरक चिकित्सा के रूप में अपनाएँ, न कि चिकित्सकीय उपचार के विकल्प के रूप में।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शलभासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
शलभासन एक योगासन है जिसे अंग्रेज़ी में Locust Pose कहते हैं। इसमें पेट के बल लेटकर दोनों पैरों को सांस लेते हुए ऊपर उठाया जाता है और कुछ सेकंड रोककर सांस छोड़ते हुए नीचे लाया जाता है। शुरुआत में इसे 3 से 4 बार करने की सलाह दी जाती है।
शलभासन से कब्ज में कैसे राहत मिलती है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, शलभासन के दौरान पेट के अंगों पर पड़ने वाला दबाव आँतों की गतिशीलता को बढ़ाता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज जैसी समस्या में राहत मिलती है। नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियाँ भी मज़बूत होती हैं।
शलभासन किन लोगों के लिए सबसे ज़्यादा फायदेमंद है?
यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, जैसे कार्यालय कर्मचारी या छात्र। लंबे समय तक बैठने से कोर मसल्स निष्क्रिय हो जाती हैं और पाचन प्रभावित होता है, जिसे यह आसन ठीक करने में मदद करता है।
शलभासन करते समय कौन-सी सावधानियाँ ज़रूरी हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार गर्भवती महिलाओं, हर्निया के रोगियों, पीठ की गंभीर समस्या से पीड़ित व्यक्तियों और हाल ही में सर्जरी हुए लोगों को यह आसन करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
आयुष मंत्रालय की योग सीरीज क्यों शुरू की गई है?
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पहले आयुष मंत्रालय प्रतिदिन एक नए योगासन और उसके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी साझा कर रहा है। इस श्रृंखला का उद्देश्य आम जन को सरल और प्रभावी योग विकल्पों से परिचित कराना है।
राष्ट्र प्रेस
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