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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस: राजनाथ सिंह, अमित शाह समेत केंद्रीय मंत्रियों ने अर्पित की श्रद्धांजलि

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस: राजनाथ सिंह, अमित शाह समेत केंद्रीय मंत्रियों ने अर्पित की श्रद्धांजलि

सारांश

23 जून को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर केंद्र सरकार के आठ से अधिक वरिष्ठ मंत्रियों ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी। 'एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' के उनके संकल्प को BJP आज अपनी राजनीतिक विरासत का केंद्र मानती है।

मुख्य बातें

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस 23 जून को मनाया गया; उनकी मृत्यु 1953 में कश्मीर हिरासत में हुई थी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह समेत आठ से अधिक केंद्रीय मंत्रियों ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
अमित शाह ने कश्मीर में 'दो विधान, दो प्रधान, दो निशान' के विरोध और बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने के संघर्ष को याद किया।
मुखर्जी को स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में स्मरण किया।
जगत प्रकाश नड्डा ने भारतीय जनसंघ से BJP तक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को डॉ.
मुखर्जी की दूरदर्शिता का प्रमाण बताया।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी एवं शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर 23 जून 2026 को केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक, सभी ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रति समर्पण को याद किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक अस्मिता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण हेतु अविस्मरणीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि 'राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का उनका संकल्प, साहस और बलिदान आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करता है।'

गृह मंत्री अमित शाह का संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया कि डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर में 'दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' का मुखर विरोध किया और बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए संघर्ष किया। शाह ने कहा, 'कश्मीर से लेकर बंगाल तक, राष्ट्रनिर्माण के एकसूत्र में बंधकर यह देश उनके पदचिह्नों पर आगे बढ़ता रहेगा।'

अन्य केंद्रीय मंत्रियों की भावांजलि

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन 'त्याग, तपस्या और राष्ट्रभक्ति की अमिट गाथा है।' उन्होंने 'एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे' के उद्घोष को याद करते हुए कहा कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की दिशा में हर कदम पर डॉ. मुखर्जी का स्मरण शक्ति और मार्गदर्शन देता है।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने डॉ. मुखर्जी को स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में स्मरण करते हुए उनके त्याग, राष्ट्रनिष्ठा और एकात्म भारत के संकल्प को नमन किया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सत्ता का त्याग कर देश की एकता और अखंडता के लिए डॉ. मुखर्जी ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक्स पर लिखा कि डॉ. मुखर्जी ने 'एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' का प्रखर उद्घोष कर जम्मू-कश्मीर को देश का अभिन्न अंग बनाने के संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि भारतीय जनसंघ से लेकर आज की भारतीय जनता पार्टी (BJP) तक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद डॉ. मुखर्जी की दूरदर्शिता का प्रमाण है।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 'एक निशान, एक प्रधान, एक विधान' के संकल्प के साथ डॉ. मुखर्जी ने देशहित में जो अद्वितीय योगदान दिया, वह भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

डॉ. मुखर्जी की विरासत और ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु 23 जून 1953 को कश्मीर की हिरासत में हुई थी, जब वे अनुच्छेद 370 के तहत लागू परमिट प्रणाली का विरोध करते हुए बिना परमिट जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर गिरफ्तार किए गए थे। उनकी मृत्यु की परिस्थितियाँ आज भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं। वे स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री भी रहे और बाद में नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर जनसंघ की स्थापना की, जो आगे चलकर BJP का वैचारिक आधार बना।

राजनीतिक महत्व

हर वर्ष 23 जून को BJP और उससे जुड़े संगठन डॉ. मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाते हैं। इस वर्ष भी केंद्र सरकार के लगभग सभी प्रमुख मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी, जो पार्टी की वैचारिक जड़ों से जुड़ाव को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद BJP डॉ. मुखर्जी के 'एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' के नारे को अपनी राजनीतिक उपलब्धि से जोड़कर प्रस्तुत करती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक विधान' के नारे को अपनी सबसे बड़ी संवैधानिक उपलब्धि से जोड़ती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि डॉ. मुखर्जी की हिरासत में मृत्यु की परिस्थितियों की स्वतंत्र जाँच की माँग दशकों से अनसुनी है। श्रद्धांजलि की भाषा और राजनीतिक संदेश के बीच की यह महीन रेखा ही बताती है कि विरासत की राजनीति में तथ्य और आस्था कहाँ मिलते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस प्रतिवर्ष 23 जून को मनाया जाता है। इसी दिन 1953 में कश्मीर में हिरासत के दौरान उनकी मृत्यु हुई थी, जब वे परमिट प्रणाली के विरोध में बिना अनुमति जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर गिरफ्तार किए गए थे।
डॉ. मुखर्जी के 'एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' नारे का क्या अर्थ है?
यह नारा डॉ. मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को शेष भारत के समान संवैधानिक दर्जा दिलाने की माँग के रूप में दिया था। वे चाहते थे कि कश्मीर में अलग संविधान, अलग प्रधान (मुख्यमंत्री का पुराना पदनाम) और अलग झंडे की व्यवस्था समाप्त हो।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना क्यों की?
डॉ. मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। वे कश्मीर नीति और पाकिस्तान के साथ नेहरू-लियाकत समझौते सहित कई नीतिगत मुद्दों पर कांग्रेस से असहमत थे।
23 जून 2026 को किन-किन केंद्रीय मंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
BJP के लिए डॉ. मुखर्जी की विरासत का क्या महत्व है?
BJP भारतीय जनसंघ की वैचारिक उत्तराधिकारी है, जिसकी स्थापना डॉ. मुखर्जी ने की थी। पार्टी उनके 'एक निशान, एक विधान' के संकल्प को 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने की उपलब्धि से जोड़ती है और उन्हें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अग्रदूत मानती है।
राष्ट्र प्रेस
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