श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 73वें बलिदान दिवस पर BJP मुख्यालय में श्रद्धांजलि, नितिन नवीन बोले — मोदी पूरा कर रहे उनका सपना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 23 जून 2026 को BJP मुख्यालय, नई दिल्ली में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 73वीं पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उनके साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष और वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे भी उपस्थित रहीं।
श्रद्धांजलि समारोह और नेताओं की उपस्थिति
BJP मुख्यालय में आयोजित इस स्मरण कार्यक्रम में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। नितिन नवीन ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके 73वें बलिदान दिवस पर सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। वे एक प्रखर राष्ट्रवादी, महान विचारक और देश के पहले उद्योग मंत्री थे।'
नवीन ने आगे कहा, 'उन्होंने जो सपना देखा था और जो बलिदान दिया था, वह बलिदान अब हमारे सामने साकार हो रहा है।'
अनुच्छेद 370 और कश्मीर एकीकरण का संदर्भ
नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल, असम और पंजाब की सीमाओं की रक्षा के लिए श्यामा प्रसाद ने संघर्ष किया और बलिदान दिया था।'
गौरतलब है कि डॉ. मुखर्जी का निधन 1953 में जम्मू-कश्मीर में हिरासत के दौरान हुआ था, जब वे 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' के अपने संकल्प को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
BJP और जनसंघ की वैचारिक विरासत
नवीन ने कहा, 'डॉ. मुखर्जी ने 1951 में जिस सोच और भावना से जनसंघ की स्थापना की थी — कि एक राष्ट्रवादी सोच का नेतृत्व बने — आज कह सकते हैं कि BJP के 14 करोड़ से अधिक कार्यकर्ता उस सोच पर खरा उतरते हुए भारत को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. मुखर्जी के जन्मस्थान पश्चिम बंगाल में आज BJP की सरकार है, जो उनके दिखाए मार्ग पर चल रही है।
एक्स पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की पोस्ट
नितिन नवीन ने एक्स पर लिखा, 'भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और माँ भारती की अखंडता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे', का उनका संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता का अटल संकल्प था।'
डॉ. मुखर्जी की विरासत और प्रेरणा
नवीन ने कहा, 'डॉ. मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवादी विचारधारा को एक सशक्त दिशा दी और अपने विचारों, साहस एवं त्याग से राष्ट्र प्रथम की भावना को जन-जन तक पहुँचाया।' उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन और बलिदान यह प्रेरणा देता रहेगा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है।
यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ जब BJP अपनी वैचारिक जड़ों को पुनः रेखांकित करने और संगठनात्मक विस्तार को गति देने में जुटी है। आने वाले समय में पार्टी इस विरासत को अपने राजनीतिक अभियानों का आधार बनाती रहेगी।