आयुष्मान भारत के 8 साल: PM मोदी बोले — 60 करोड़ लोगों को मिला ₹5 लाख तक का हेल्थ कवर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2026 को आयुष्मान भारत योजना के आठ वर्ष पूरे होने पर कहा कि यह योजना अब 60 करोड़ से अधिक भारतीयों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान कर रही है, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना बन गई है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में उन्होंने इसे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए इलाज के खर्च में 'रिकॉर्ड बचत' का माध्यम बताया।
योजना की मुख्य उपलब्धियाँ
मोदी ने अपने बयान में कहा, 'आठ साल पहले, आयुष्मान भारत की शुरुआत इस सोच के साथ की गई थी कि हर भारतीय को बेहतरीन और किफायती हेल्थकेयर मिल सके।' उन्होंने बताया कि आज 48.54 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 13 करोड़ से अधिक लोग अब तक इस योजना के तहत इलाज का लाभ उठा चुके हैं। देशभर में 39,000 से अधिक सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों के माध्यम से कुल ₹2 लाख करोड़ से अधिक का अस्पताल उपचार लाभ प्राप्त किया गया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य ढाँचे पर असर
योजना केवल बीमा कवर तक सीमित नहीं रही — आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अब तक 500 करोड़ से अधिक विजिट दर्ज की जा चुकी हैं, जो जमीनी स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को दर्शाती हैं। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य अवसंरचना दशकों से चुनौतियों का सामना करती रही है।
केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आठ साल पहले 'सेवा का संकल्प' लिया था, जिसने लाखों परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई को विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना बताते हुए इसे 'आधे अरब से अधिक लोगों' का कवच करार दिया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस योजना ने 'गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज के खर्च की चिंता कम कर, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन का संबल' बनाने का काम किया है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि भारत में आउट-ऑफ-पॉकेट स्वास्थ्य व्यय परंपरागत रूप से परिवारों को कर्ज के दुष्चक्र में धकेलता रहा है। इस योजना का लक्ष्य उसी वित्तीय बोझ को कम करना था — और ₹2 लाख करोड़ के संचयी उपचार लाभ का आँकड़ा इसके व्यापक पैमाने को रेखांकित करता है।
आगे की राह
योजना के आठवें वर्ष में प्रवेश के साथ, सरकार की प्राथमिकता अब नामांकन विस्तार से हटकर सेवा गुणवत्ता और अस्पताल नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित होती दिख रही है। स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों के अनुसार, योजना की दीर्घकालिक सफलता का मापदंड यह होगा कि लाभार्थियों को वास्तविक जरूरत के समय गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिल पाती है या नहीं।