आयुष्मान भारत के 8 साल: 60 करोड़ लाभार्थी, ₹2.03 लाख करोड़ फंडिंग — नितिन नवीन का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 23 सितंबर 2026 को 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (PM-JAY) के आठ वर्ष पूरे होने पर कहा कि यह योजना स्वस्थ नागरिक और मजबूत राष्ट्र के विजन के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को सुलभ बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया।
योजना की मौजूदा स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 48.51 करोड़ से अधिक लोगों के पास आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 13.25 करोड़ मामलों के उपचार के लिए ₹2.03 लाख करोड़ की फंडिंग की गई है। यह आँकड़े इस योजना को दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक बनाते हैं।
नितिन नवीन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि इस योजना ने सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सालाना ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान किया है।
आरोग्य मंदिर और अस्पताल नेटवर्क
नितिन नवीन के अनुसार, देशभर में 1.86 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने समुदायों के लिए 500 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य सेवा विजिट को सुगम बनाया है। योजना के तहत 38,000 से ज्यादा सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क कार्यरत है, जो 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं में 1,961 प्रक्रियाओं के लिए कैशलेस सेवाएँ देता है।
गौरतलब है कि यह योजना भारत की लगभग 33 प्रतिशत आबादी को कवर करती है और परिवारों को भारी-भरकम चिकित्सा बिलों से राहत दिलाना इसका मूल उद्देश्य है।
योजना का विस्तार: आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
मार्च 2024 में केंद्र सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लगभग 37 लाख परिवारों को भी इसमें शामिल किया। इस विस्तार के परिणामस्वरूप, इन श्रेणियों के लिए अब तक 44.81 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।
यह कदम ऐसे समय में आया जब ज़मीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्वयं बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित पाया गया था — एक विरोधाभास जिसे इस विस्तार ने दूर करने की कोशिश की है।
आगे की राह
आठ वर्षों में योजना का यह विस्तार नीतिगत इरादे की मजबूती दर्शाता है। हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लाभार्थी संख्या के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता, अस्पताल नेटवर्क का समान भौगोलिक वितरण और दावा निपटान की पारदर्शिता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। योजना का अगला पड़ाव इन चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर निर्भर करेगा।