मोगा में दिवाली से पहले बाज़ारों में उमड़ी भीड़, महंगाई ने काटी खरीदारी की रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मोगा के बाज़ारों में दिवाली 2024 से पहले जबरदस्त चहल पहल देखी जा रही है — सजावट के सामान, मिठाइयाँ, पटाखे और उपहार खरीदने के लिए परिवार बड़ी संख्या में घरों से निकले हैं। हालाँकि, बाज़ार में विविधता और भीड़ के बावजूद बढ़ती महंगाई ने आम खरीदारों का बजट बिगाड़ दिया है और कई लोग पिछले वर्ष की तुलना में कम सामान खरीदने पर मजबूर हैं।
बाज़ार में रौनक, लेकिन उत्साह पर महंगाई की छाया
दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही सुबह से ही बनी हुई है। मोगा के एक दुकानदार रोहित ने बताया कि दिवाली के कारण बाज़ार में शुरू से ही भीड़ है, लेकिन अपेक्षित रौनक नज़र नहीं आ रही। उन्होंने कहा, "ग्राहक आ तो रहे हैं, लेकिन महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। पहले जो ग्राहक चार पाँच आइटम खरीदते थे, वे अब केवल दो तीन आइटम लेकर ही जा रहे हैं।"
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में खुदरा महंगाई आम परिवारों की जेब पर असर डाल रही है। मोगा के बाज़ार इस व्यापक आर्थिक दबाव का एक स्थानीय आईना बन गए हैं।
खरीदारों की आपबीती: बजट में कटौती मजबूरी
बाज़ार में खरीदारी करने पहुँचीं पलक ने बताया कि वह कई सामान खरीदने की योजना लेकर आई थीं, लेकिन कीमतें बढ़ने के कारण उन्हें सूची घटानी पड़ी। "पहले चार चीजें खरीदने की सोच थी, अब केवल दो ही ले पाऊँगी," उन्होंने कहा।
वेनिका गोयल ने महंगाई पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों सहित लगभग हर घर पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "जहाँ पहले लोग चार पाँच चीजें खरीदने की योजना बनाते थे, वहीं अब दो तीन चीजों में ही गुजारा करना पड़ रहा है।"
ग्रीन दिवाली की अपील, पटाखों से परहेज़
खरीदार प्रियंका ने बताया कि उनके परिवार ने इस बार ग्रीन दिवाली मनाने का फैसला किया है। उन्होंने थोड़े पटाखे और अधिक मिठाइयाँ खरीदीं, क्योंकि पहले से ही प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहार पर धैर्य बनाए रखें, आपसी विवाद से बचें और मिट्टी के दीये जलाएँ।
वेनिका ने भी सभी से सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त दिवाली मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहार के अवसर पर किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए और जरूरतमंद लोगों की यथासंभव मदद करनी चाहिए।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि दिवाली भारत का सबसे बड़ा उपभोक्ता खर्च का मौसम माना जाता है, और मोगा जैसे मध्यम आकार के शहरों में यह खर्च स्थानीय व्यापार की रीढ़ होता है। दुकानदार रोहित के अनुसार पिछले साल की तुलना में सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर बिक्री की मात्रा पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार महंगाई के दौर में त्योहारी खर्च में यह सतर्कता एक व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दिवाली के अंतिम दिनों में खरीदारी में तेजी आती है या महंगाई का असर बरकरार रहता है।