करवा चौथ 2026: बाराबंकी के बाजारों में महिलाओं की भीड़, मेहंदी की कीमतें ढाई गुना बढ़ीं
सारांश
मुख्य बातें
बाराबंकी में करवा चौथ की पूर्व संध्या पर बाजारों में असाधारण रौनक देखने को मिल रही है। पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़े इस पर्व की तैयारी में लइया मंडी, धनोखर, नगर पालिका मार्केट और घंटाघर स्थित सर्राफा बाजार में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। देर रात तक खरीदारी का सिलसिला जारी है और व्यापारियों को इस त्योहारी सीजन में अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
मेहंदी की माँग और बढ़ती कीमतें
लइया मंडी में मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। मेहंदी कारीगरों के अनुसार, पिछले तीन दिनों से सुबह 10 बजे से देर रात तक प्रतिदिन 100 से अधिक महिलाएं मेहंदी लगवाने पहुँच रही हैं। महिलाएं अपनी पसंद के आकर्षक डिज़ाइन बनवा रही हैं।
सामान्य दिनों में एक हाथ पर मेहंदी के लिए ₹50 से ₹100 तक खर्च होते हैं, लेकिन त्योहारी माँग के कारण डिज़ाइन के हिसाब से कीमतें दो से ढाई गुना तक बढ़ गई हैं। इसके बावजूद महिलाओं का उत्साह बरकरार है।
आभूषण और शृंगार बाजार में चहल-पहल
घंटाघर स्थित सर्राफा बाजार में महिलाएं सोने की चेन, अंगूठी, चाँदी की पायल और बिछिया की जमकर खरीदारी कर रही हैं। वहीं, डिज़ाइनर साड़ियों, फैंसी सलवार-सूट और चूड़ियों की दुकानों पर भी ग्राहकों की खासी भीड़ देखी जा रही है। पूजन सामग्री — विशेष रूप से करवा और व्रत में इस्तेमाल होने वाली अन्य वस्तुओं — की माँग भी तेजी से बढ़ी है।
महिलाओं की भावना और पर्व का महत्त्व
प्रीति नाम की महिला ने बताया कि उत्तर भारत में जिस तरह छठ पूजा का बेसब्री से इंतजार किया जाता है, उसी तरह महिलाओं को करवा चौथ का भी इंतजार रहता है। उनके अनुसार, यह पर्व आस्था, प्रेम और पारिवारिक परंपराओं का प्रतीक है।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि त्योहार की तैयारियाँ कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं — मेहंदी का स्थान, पहनावा, आभूषण और बालों की स्टाइल सब कुछ पहले से तय किया जाता है। उन्होंने करवा चौथ की तुलना बिहार में मनाए जाने वाले छठ पर्व से करते हुए इसे उत्तर भारत का एक प्रमुख सामाजिक-धार्मिक उत्सव बताया।
व्रत की परंपरा और पूजा विधि
करवा चौथ पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी उत्तर भारत में उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती रही है।
त्योहार की बढ़ती बाजारी गहमागहमी और लोक-उत्साह यह संकेत देते हैं कि इस वर्ष भी करवा चौथ अपनी पूरी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।