करवा चौथ 2026: लाजपत नगर में मेहंदी के लिए सुबह से कतारें, महिलाओं में उत्साह चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के लाजपत नगर बाजार में करवा चौथ 2026 के अवसर पर 29 अक्टूबर की सुबह से ही मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की लंबी कतारें लग गईं। सुहागिन महिलाएं भोर होते ही बाजार पहुँच गईं और फुटपाथ पर बैठे मेहंदी आर्टिस्टों के पास घंटों प्रतीक्षा करती नजर आईं। करवा चौथ के सोलह शृंगार में मेहंदी को सुहाग का प्रतीक माना जाता है, जो इस पर्व की केंद्रीय परंपरा है।
बाजार में रौनक और उत्साह का माहौल
लाजपत नगर के फुटपाथ पर कतार में बैठे मेहंदी आर्टिस्ट बारीक फूल, बेल-बूटे और दुल्हन स्टाइल के आकर्षक डिजाइन उकेरते दिखे। कुछ महिलाओं ने पूरे हाथ भरकर दुल्हन स्टाइल की मेहंदी लगवाई, जबकि अन्य ने फूलों वाले हल्के डिजाइन चुने। भीड़ इतनी अधिक थी कि कई महिलाओं को घंटों अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ा।
महिलाओं की आपबीती: 'कल नंबर नहीं आया, आज सुबह आ गई'
बाजार में मेहंदी लगवा रही एक महिला ने बातचीत में बताया कि वह सुबह पहले मंदिर गईं और उसके बाद मेहंदी लगवाने पहुँचीं। उन्होंने कहा, 'कल तो टाइम ही नहीं था, नंबर ही नहीं आया, इतनी भीड़ थी इसलिए घर वापस चले गए। फिर अभी मैंने आते हुए उनको देखा कि वो लोग बैठे हुए हैं तो मैंने कहा अभी लगवा लेती हूँ, क्योंकि शगुन तो करना ही है।' उन्होंने यह भी बताया कि मेहंदी लगने के बाद अब वह आराम से बैठेंगी और शाम की तैयारी करेंगी।
हफ्ते-दस दिन पहले से शुरू होती है तैयारी
करवा चौथ की तैयारियों के बारे में उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया बहुत पहले से शुरू हो जाती है। 'कम से कम हफ्ते-दस दिन से, जैसे ही गणेश चतुर्थी का त्योहार खत्म होता है उसके बाद से करवा चौथ के लिए तैयारी शुरू हो जाती है। कपड़े बनवाने होते हैं, फिर मैचिंग ज्वेलरी चाहिए, चूड़ियाँ चाहिए — इसीलिए पहले से तैयारी करनी पड़ती है।'
करवा चौथ का महत्व और परंपरा
करवा चौथ का निर्जला व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। मेहंदी, चूड़ियाँ, सिंदूर और सोलह शृंगार इस पर्व के अभिन्न अंग हैं। गौरतलब है कि करवा चौथ से दो-तीन दिन पहले से ही दिल्ली के बाजारों में मेहंदी कारीगरों के पास भीड़ जमा होनी शुरू हो जाती है, और यह सिलसिला व्रत वाले दिन तक जारी रहता है।
आगे का दिन: शाम को चाँद का इंतज़ार
मेहंदी लगवाने के बाद महिलाएं घर लौटकर शाम की पूजा और शृंगार की तैयारी में जुट जाएँगी। परंपरा के अनुसार, रात को चंद्रोदय के बाद चाँद देखकर और पति के हाथों जल पीकर व्रत तोड़ा जाएगा। यह पर्व दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत में बड़े उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है।