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क्या नैनीताल में पंजाबी महासभा ने करवाचौथ पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया?

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क्या नैनीताल में पंजाबी महासभा ने करवाचौथ पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया?

सारांश

नैनीताल में पंजाबी महासभा ने करवाचौथ के अवसर पर एक भव्य पूजा समारोह का आयोजन किया। स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हुए इस पर्व को धूमधाम से मनाया। इस उत्सव में भक्ति, संगीत और खुशियों का अनोखा संगम देखने को मिला।

मुख्य बातें

करवाचौथ पर महिलाओं ने भव्य पूजा का आयोजन किया।
संगीत और भक्ति से भरा वातावरण।
स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाला पर्व।
महिलाओं का उत्साह और एकजुटता।
पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर भाग लेना।

नैनीताल, 10 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। सरोवर नगरी नैनीताल में करवाचौथ का पर्व बेहद धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। शहर के मल्लीताल में स्थित प्रसिद्ध फेयर हेवेन्स होटल में पंजाबी महासभा द्वारा एक भव्य करवाचौथ पूजा समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर भाग लिया।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने बताया कि सुहाग के इस महापर्व की शुरुआत सूर्योदय से पूर्व निर्जला व्रत के साथ होती है। इस दिन महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए उपवास रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही अपना व्रत तोड़ती हैं।

नैनीताल की महिलाओं में करवाचौथ को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। दोपहर से ही महिलाएं फेयर हेवेन्स होटल में एकत्रित होने लगीं और शाम ढलते-ढलते पूरा वातावरण भक्ति और संगीत से सराबोर हो गया। लाल और सुनहरे परिधानों में सजी महिलाओं ने सामूहिक रूप से करवाचौथ की कथा सुनी और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान भजन-कीर्तन का दौर भी चला, जिससे चारों ओर खुशियों, गीतों और पारंपरिक संस्कृति का जीवंत माहौल बन गया।

स्थानीय निवासी डॉ. पल्लवी ने बताया कि वह हर साल करवाचौथ का व्रत रखती हैं और इस त्योहार को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाती हैं। उन्होंने कहा, "मुझे करवाचौथ का बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन पत्नियां अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखकर ईश्वर से प्रार्थना करती हैं।" उन्होंने सभी त्योहारों को मिल-जुलकर मनाने पर जोर दिया।

एक अन्य स्थानीय महिला, पारुल आहूजा ने बताया कि वे करवाचौथ की तैयारियां एक महीने पहले से ही शुरू कर देती हैं। उन्होंने कहा, "आज सुबह जल्दी उठकर सूर्य को अर्घ्य देने के साथ मैंने अपने व्रत की शुरुआत की थी।" उन्होंने भी परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर हर त्योहार को मनाने की बात कही, जिससे खुशियां दोगुनी हो जाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में एकता और प्रेम का प्रतीक भी है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा मिलता है, जो कि राष्ट्रीय धरोहर का हिस्सा हैं।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस दिन महिलाएं क्या करती हैं?
महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद अपना व्रत तोड़ती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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