यूसुफ हुसैन की विरासत: FD तोड़कर बचाया दामाद हंसल मेहता का करियर, 'शाहिद' को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
सारांश
मुख्य बातें
दिवंगत अभिनेता यूसुफ हुसैन ने अपने दामाद और फिल्म निर्देशक हंसल मेहता के करियर के सबसे कठिन दौर में अपनी जीवनभर की जमा पूंजी — फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) — दांव पर लगा दी, ताकि फिल्म 'शाहिद' की अधूरी शूटिंग पूरी हो सके। उनकी इस निस्वार्थ मदद का नतीजा यह रहा कि हंसल मेहता को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। 30 अक्टूबर 2021 को यूसुफ हुसैन के निधन के करीब पाँच वर्ष बाद भी यह किस्सा उनकी इंसानियत और रिश्तों के प्रति समर्पण की मिसाल बना हुआ है।
पर्दे का सहायक किरदार, असल जिंदगी का नायक
यूसुफ हुसैन का जन्म 21 जनवरी 1948 को हुआ था। अभिनय की दुनिया में आने से पहले वह लखनऊ में कपड़ों का कारोबार करते थे। परदे पर उन्हें अधिकतर सहायक भूमिकाओं में देखा गया, लेकिन उनके किरदार हमेशा दर्शकों के जेहन में बस जाते थे।
साल 2002 में आई 'दिल चाहता है' में उन्होंने आमिर खान के पिता की भूमिका निभाई, जो दर्शकों को खूब पसंद आई। इसके बाद उन्होंने 'धूम 2', 'कृष 3', 'ओएमजी : ओह माय गॉड' और 'रईस' जैसी चर्चित फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। टेलीविजन पर वह 'सीआईडी' और 'कुमकुम : प्यारा सा बंधन' जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों के ज़रिए घर-घर तक पहुँचे।
फिल्म 'शाहिद' और आर्थिक संकट
हंसल मेहता वकील एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शाहिद आज़मी की जिंदगी पर आधारित फिल्म 'शाहिद' बनाना चाहते थे। फिल्म के शुरुआती दो शेड्यूल की शूटिंग पूरी हो चुकी थी, लेकिन इसके बाद आर्थिक परेशानियों ने पूरी परियोजना को संकट में डाल दिया।
पैसों के अभाव में बची हुई शूटिंग रुक गई और हंसल मेहता के सामने यह डर खड़ा हो गया कि उनका करियर शायद यहीं थम जाए। यह वह दौर था जब अक्सर लोग साथ छोड़ देते हैं — लेकिन यूसुफ हुसैन ने अपने दामाद का हौसला टूटने नहीं दिया।
FD का चेक और एक जिंदगी बदलने वाला फैसला
जब यूसुफ हुसैन को हंसल मेहता की मुश्किल के बारे में पता चला, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट की रकम से मदद करने की पेशकश की और हंसल को चेक सौंप दिया। इस रकम से फिल्म की बची हुई शूटिंग पूरी हो सकी।
गौरतलब है कि यह महज एक वित्तीय लेनदेन नहीं था — यह एक पिता की उस भूमिका की अभिव्यक्ति थी जो परदे से बाहर, असल जिंदगी में निभाई गई। 'शाहिद' के रिलीज़ होने के बाद हंसल मेहता को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला — एक ऐसी उपलब्धि जो शायद बिना यूसुफ हुसैन की मदद के संभव न होती।
विरासत और अंतिम विदाई
30 अक्टूबर 2021 को यूसुफ हुसैन का निधन हो गया। उनके जाने से फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई। हंसल मेहता सहित कई हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
यूसुफ हुसैन की विरासत केवल उनके किरदारों में नहीं, बल्कि उस निःस्वार्थ समर्थन में भी जीवित है जो उन्होंने अपने परिवार के लिए दिया। बॉलीवुड में जहाँ संबंध अक्सर सुविधा तक सीमित रह जाते हैं, वहाँ यूसुफ हुसैन की यह कहानी एक अलग ही मानवीय आयाम प्रस्तुत करती है।