किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह को बताया 'खतरनाक अर्बन दिमागी नक्सल', लोकतंत्र के लिए हानिकारक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 29 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पर तीखा पलटवार किया, उन्हें 'खतरनाक अर्बन दिमागी नक्सल' करार देते हुए कहा कि ऐसी सोच भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है। यह विवाद तब गहराया जब शाह ने एक वीडियो में खुद को गर्व के साथ 'दिमागी नक्सल' बताया और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
रिजिजू का एक्स पर पोस्ट
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नसीरुद्दीन शाह का वह वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'मुझे लगता था कि नसीरुद्दीन शाह एक ऑर्डिनरी एक्टर हैं। मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था। मुझे कभी पता ही नहीं था कि वह एक खतरनाक 'अर्बन दिमागी नक्सल' था।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'मुझे उसके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला। भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है।'
नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा
वायरल वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने कैमरे के सामने कहा, 'मैं फक्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग, जो करना है करके देख लो। देख लेंगे जोर कितना बाजुए कातिल में है।' यह बयान उन्होंने उन तमगों के जवाब में दिया जो उनके अनुसार सरकार समर्थकों की ओर से आलोचकों को दिए जाते हैं।
शाह ने यह भी कहा, ''दिमागी नक्सली' के अलावा, पता नहीं 'चौकीदार' ने मुझ जैसे लोगों को और क्या-क्या नाम दिए हैं, जैसे 'राष्ट्र-विरोधी', 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' वगैरह। अगर इस देश में कोई 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है, तो वह यह अवैध सरकार है।' यह टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार की नीतियों की उनकी व्यापक आलोचना का हिस्सा है।
पृष्ठभूमि: 'दिमागी नक्सल' शब्द का संदर्भ
गौरतलब है कि 'दिमागी नक्सली' शब्द का प्रयोग सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त में अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान किया था। तब से यह शब्द राजनीतिक विमर्श में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। नसीरुद्दीन शाह ने इसी शब्द को उठाकर खुद पर लागू करते हुए इसे एक तरह की चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया।
यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड और सरकार के बीच वैचारिक टकराव नई ऊँचाइयों पर पहुँच रहा है। शाह पहले भी देश में 'असहिष्णुता' और 'अल्पसंख्यकों की सुरक्षा' को लेकर सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं।
राजनीतिक महत्व और आगे की स्थिति
रिजिजू का यह पलटवार केंद्र सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सार्वजनिक हस्तियों के असहमत बयानों पर त्वरित और कड़ी प्रतिक्रिया दी जाती है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बहस में 'राष्ट्र-विरोधी' जैसे लेबल का प्रयोग असहमति की आवाज़ों को दबाने का जरिया बन सकता है। दोनों पक्षों के बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बने हुए हैं और यह विवाद फिलहाल जारी है।