कंगना रनौत का नसीरुद्दीन शाह पर पलटवार: 'लोमड़ी बनने से बेहतर है कुत्ता कहलाना'
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पर सोशल मीडिया के ज़रिए तीखा पलटवार किया है। 11 अगस्त को इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा की गई अपनी पोस्ट में कंगना ने शाह की देश के प्रति वफादारी पर सवाल उठाए और उन्हें 'लोमड़ी' की संज्ञा दी। यह विवाद छात्र आंदोलनों को लेकर बॉलीवुड की भूमिका पर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया है।
विवाद की जड़: नसीरुद्दीन शाह की 'हड्डी वाली' टिप्पणी
दरअसल, नसीरुद्दीन शाह से जब पूछा गया था कि देश में चल रहे छात्र प्रदर्शनों के दौरान बॉलीवुड की बड़ी हस्तियाँ खुलकर अपनी बात क्यों नहीं रखतीं, तो उन्होंने एक कहावत का सहारा लेते हुए कहा था, 'वे ऐसा तब करेंगे जब उनका ज़मीर उनसे ऐसा करने को कहेगा। एक कहावत है — जिस कुत्ते के मुँह में हड्डी होती है, वह भौंक नहीं सकता। जैसे ही हड्डी उनके मुँह से गिर जाएगी या उनके दाँत टूट जाएँगे, तब वे भौंकेंगे।' शाह की यह टिप्पणी बॉलीवुड में चर्चा का विषय बन गई थी।
पीयूष मिश्रा ने भी उठाए सवाल
अभिनेता पीयूष मिश्रा ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मुद्दों पर रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में बोलते हुए शाह की इसी टिप्पणी का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'जिनके मुँह में हड्डियाँ होती हैं, वे बोल नहीं सकते। लेकिन मैं नसीर साहब से पूछना चाहता हूँ कि अभी किसके मुँह में हड्डियाँ हैं? क्या आप लोग इसलिए चुप रहे क्योंकि आपको पिज्ज़ा और बर्गर की तलब थी या इसलिए कि आप जिस भीड़ का हिस्सा थे, वह खास तरह की थी? माफ कीजिएगा नसीर साहब, लेकिन अब मुझे आपसे डर नहीं लगता।' मिश्रा के इस बयान को कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किया और उसके साथ अपनी प्रतिक्रिया जोड़ी।
कंगना का सीधा हमला
कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'सच तो यह है कि हर कोई किसी न किसी का कुत्ता है, लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस घर (देश) की रोटी खाती हूँ, उसकी रखवाली करती हूँ और उसके लिए लड़ती हूँ। नसीर साहब खाते तो इस देश का हैं, लेकिन लड़ते पड़ोसी देश के लिए हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'आज के समय में किसी इंसान को कुत्ता कहना भी एक तरह की तारीफ है, क्योंकि वफादारी और मासूमियत बहुत कम देखने को मिलती है। मैं नसीरुद्दीन शाह जैसे लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता कहलाना पसंद करूँगी।'
व्यापक संदर्भ: बॉलीवुड और राजनीतिक बहस
यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड कलाकारों की सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर चुप्पी या मुखरता लगातार बहस का केंद्र बनी हुई है। गौरतलब है कि कंगना रनौत पहले भी कई बार फिल्म उद्योग के भीतर असहमत आवाज़ों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलती रही हैं। भाजपा सांसद के रूप में उनकी राजनीतिक पहचान उनके सिनेमाई व्यक्तित्व के साथ जुड़ी है, जो इस तरह के बयानों को और अधिक चर्चित बनाती है।
आगे क्या
नसीरुद्दीन शाह की ओर से अब तक कंगना की इस पोस्ट पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद बॉलीवुड और राजनीति के बीच बढ़ते टकराव को रेखांकित करता है, जहाँ फिल्मी हस्तियों के बयान अब महज़ मनोरंजन की सीमा लाँघकर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन रहे हैं।