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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: तीन तलाक पीड़ित बेसहारा महिलाओं को मिलेगा घर, अगले महीने आएगा प्रस्ताव

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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: तीन तलाक पीड़ित बेसहारा महिलाओं को मिलेगा घर, अगले महीने आएगा प्रस्ताव

सारांश

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेसहारा महिलाओं को बोर्ड की संपत्तियों से आवास देने की पहल का ऐलान किया है। चेयरमैन शादाब शम्स अगले महीने की बैठक में प्रस्ताव रखेंगे। UCC लागू करने वाले उत्तराखंड में यह कदम वक्फ के मूल उद्देश्य को पुनर्जीवित करने का प्रयास बताया जा रहा है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 25 सितंबर 2026 को तीन तलाक व हलाला पीड़ित बेसहारा महिलाओं को आवास देने की पहल का ऐलान किया।
अगले महीने की बोर्ड बैठक में एक औपचारिक प्रस्ताव रखा जाएगा; वक्फ के लैंड बैंक और संपत्तियों का उपयोग होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शम्स को इस पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
योजना का दायरा केवल आवास तक नहीं — पीड़ित महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का भी लक्ष्य।
यह पहल वक्फ संशोधन अधिनियम और उत्तराखंड के UCC के व्यापक ढाँचे के अनुरूप बताई जा रही है।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने 25 सितंबर 2026 को तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेघर एवं बेसहारा महिलाओं को आवास उपलब्ध कराने की एक बड़ी पहल का ऐलान किया। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड के लैंड बैंक और संपत्तियों का उपयोग अब उनके असली हकदारों — यतीमों, मिस्कीनों और विधवाओं — के लिए किया जाएगा।

प्रस्ताव का स्वरूप और समयसीमा

शादाब शम्स ने स्पष्ट किया कि अगले महीने होने वाली बोर्ड की बैठक में एक औपचारिक प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने कहा, 'वक्फ प्रॉपर्टीज का एक लैंड बैंक है। हम केयरटेकर हैं, और हमारे पास कई घर और संपत्तियां हैं। हम सरकार के साथ बैठकर बात करेंगे कि हम उन्हें बेहतर तरीके से कैसे सौंप सकते हैं।' उनके अनुसार, जो महिलाएं तीन तलाक या हलाला से पीड़ित हैं और बेघर या बेसहारा हैं, उन्हें वक्फ बोर्ड रहने की जगह देगा ताकि वे बिना किसी सहारे के न भटकें।

मुख्यमंत्री धामी से मिला सकारात्मक संकेत

शम्स ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत की है और उन्हें 'बहुत सकारात्मक जवाब' मिला। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम के लागू होने के बाद से बेसहारा महिलाओं में उम्मीद जगी है। उनके अनुसार, उत्तराखंड की धामी सरकार इसी दिशा में एक निर्णायक फैसला लेने की तैयारी में है।

वक्फ के मूल उद्देश्य की पुनर्स्थापना

शम्स ने जोर देते हुए कहा कि वक्फ की संपत्ति वास्तव में सदके, जकात और खैरात का धन है, जो मूलतः यतीमों, मिस्कीनों, बेवाओं और बेसहाराओं का हक है। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं ने इन संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था, जिससे वक्फ का मूल मकसद खत्म हो गया। यह पहल उस मूल उद्देश्य को ज़मीन पर उतारने का प्रयास है।

हलाला पीड़ित महिलाओं की दुर्दशा का संदर्भ

बोर्ड चेयरमैन ने उत्तराखंड में सामने आए हलाला के कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पीड़ित महिलाओं को मजबूर किया जाता था — उनसे कहा जाता था कि तलाक के बाद न भाई रखेंगे, न पति, और 'तुम कहां जाओगी?' जैसे दबाव में वे गलत निर्णय लेने को विवश होती थीं। यह पहल उन्हीं महिलाओं को वह सहारा देने के लिए है ताकि वे किसी दबाव में न रहें।

महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

शम्स ने बताया कि योजना का अंतिम लक्ष्य केवल आवास तक सीमित नहीं है — बेसहारा महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना भी इसका हिस्सा होगा, ताकि वे स्वयं अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें और किसी के सामने झुकना न पड़े। गौरतलब है कि उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य है, और यह पहल उसी व्यापक ढाँचे का विस्तार मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद इस योजना की रूपरेखा और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में है। वक्फ संपत्तियों पर दशकों से कब्जे और कुप्रबंधन के आरोप लगते रहे हैं — ऐसे में 'लैंड बैंक' से आवास देने की बात तब तक अधूरी है जब तक यह स्पष्ट न हो कि कितनी संपत्तियाँ वास्तव में विवाद-मुक्त और आवासयोग्य हैं। UCC और वक्फ संशोधन अधिनियम की राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह घोषणा आई है, इसलिए इसे निष्पक्ष नीतिगत कदम के रूप में स्थापित करने के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया और स्वतंत्र निगरानी तंत्र ज़रूरी होगा। महिला सशक्तीकरण का लक्ष्य सराहनीय है, पर प्रस्ताव अभी केवल घोषणा के स्तर पर है — अगले महीने की बैठक में इसकी ठोस रूपरेखा ही बताएगी कि यह पहल वास्तविक बदलाव लाएगी या नहीं।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को घर कैसे देगा?
बोर्ड अपने लैंड बैंक और मौजूदा संपत्तियों का उपयोग करके बेघर व बेसहारा महिलाओं को आवास उपलब्ध कराएगा। चेयरमैन शादाब शम्स के अनुसार इसके लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर एक व्यवस्था तैयार की जाएगी।
शादाब शम्स कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
शादाब शम्स उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन हैं। उन्होंने इस पहल की घोषणा की है और अगले महीने की बोर्ड बैठक में औपचारिक प्रस्ताव रखने की बात कही है।
यह प्रस्ताव कब तक लागू होगा?
शादाब शम्स के अनुसार, अगले महीने होने वाली वक्फ बोर्ड की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव रखा जाएगा। फिलहाल यह घोषणा के स्तर पर है और क्रियान्वयन की समयसीमा बैठक के बाद स्पष्ट होगी।
इस पहल का वक्फ संशोधन अधिनियम और UCC से क्या संबंध है?
शम्स ने इस पहल को वक्फ संशोधन अधिनियम और उत्तराखंड के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के व्यापक ढाँचे का हिस्सा बताया है। उनके अनुसार, इन कानूनों के आने के बाद बेसहारा मुस्लिम महिलाओं में नई उम्मीद जगी है।
क्या इस योजना में केवल आवास दिया जाएगा?
नहीं, शादाब शम्स के अनुसार बेसहारा महिलाओं को आवास के साथ-साथ रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का भी लक्ष्य है, ताकि वे स्वयं अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें।
राष्ट्र प्रेस
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