उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का नया निकाहनामा: यूसीसी के तहत बहुविवाह और हलाला पर रोक, शादाब शम्स ने बताया मकसद
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के प्रावधानों के अनुरूप मुस्लिम समुदाय के लिए एक नया निकाहनामा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 3 सितंबर को देहरादून में स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को उन कानूनी मुश्किलों और अपराधों से बचाना है जो यूसीसी के लागू होने के बाद उत्पन्न हो सकती हैं।
नए निकाहनामे की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने यूसीसी लागू किया। इस कानून के अंतर्गत बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, तीन तलाक पर पाबंदी और हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इन्हीं बदलावों को ध्यान में रखते हुए वक्फ बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक में नया निकाहनामा लाने का निर्णय लिया।
शम्स ने कहा, 'मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बना। यूसीसी लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लग गई है, तीन तलाक पर पाबंदी है और हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध माना गया है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक में मुस्लिम समुदाय के लिए एक नया निकाहनामा लाने का फैसला किया, ताकि यूसीसी का सख्ती से पालन हो सके।'
निकाहनामे में क्या होगा
नए निकाहनामे में विस्तृत जानकारी भरना अनिवार्य होगा। शम्स के अनुसार, 'नए निकाहनामे से समाज में जागरूकता आएगी और लोग इन समस्याओं से बच सकेंगे। कोई भी व्यक्ति अब एक से अधिक शादी नहीं कर पाएगा। अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों में एक व्यक्ति एक ही पत्नी के साथ रहता है, और यहां भी ऐसा ही होना चाहिए।'
निकाहनामे के साथ संलग्न हलफनामे में दी गई सभी जानकारी पूरी तरह सत्य होनी चाहिए। गलत जानकारी देने या उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।
काजी और इमामों की नियुक्ति पर नियंत्रण
वक्फ बोर्ड अब केवल उन्हीं काजी और इमामों को निकाह पढ़ाने का अधिकार देगा जिन्हें बोर्ड स्वयं नियुक्त करेगा। शम्स ने स्पष्ट किया, 'निकाह वही काजी और इमाम करा पाएंगे, जिन्हें वक्फ बोर्ड नियुक्त करेगा। इसी निकाहनामे पर निकाह होगा। अलग से किसी दस्तावेज पर निकाह नहीं होगा।' यह कदम मस्जिदों और मदरसों पर वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र को देखते हुए उठाया गया है।
धर्मांतरण कराकर निकाह पर रोक
चेयरमैन शम्स ने यह भी स्पष्ट किया कि निकाह के समय लोगों को जागरूक किया जाएगा कि धर्म परिवर्तन कराकर किसी का निकाह कराना अपराध की श्रेणी में आएगा। उन्होंने कहा, 'अगर दो अलग-अलग धर्मों के लोगों को शादी करनी है तो कोर्ट जा सकते हैं। ऐसा नहीं होगा कि घर पर किसी को बुलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराएं और निकाह करा दें।'
उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से मौलानाओं को भी कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि वे नियमों के दायरे में रहकर ही कार्य करेंगे। गौरतलब है कि राज्य में अतीत में धर्म परिवर्तन से जुड़े निकाह के मामलों ने सामाजिक तनाव पैदा किया है।
आगे की राह
यह नया निकाहनामा उत्तराखंड में यूसीसी के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। वक्फ बोर्ड की यह पहल यूसीसी के प्रावधानों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास है, और इसके माध्यम से मुस्लिम समुदाय में कानूनी जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। बोर्ड के अनुसार, यह निकाहनामा समाज को सही दिशा देने का काम करेगा।