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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का नया निकाहनामा: यूसीसी के तहत बहुविवाह और हलाला पर रोक, शादाब शम्स ने बताया मकसद

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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का नया निकाहनामा: यूसीसी के तहत बहुविवाह और हलाला पर रोक, शादाब शम्स ने बताया मकसद

सारांश

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का नया निकाहनामा महज एक दस्तावेज नहीं — यह यूसीसी को ज़मीन पर उतारने की पहली संस्थागत कोशिश है। बहुविवाह, हलाला और धर्मांतरण-निकाह पर रोक के साथ, वक्फ बोर्ड अब काजी-इमाम नियुक्ति का नियंत्रण भी अपने हाथ में लेगा।

मुख्य बातें

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने यूसीसी के अनुरूप मुस्लिम समुदाय के लिए नया निकाहनामा तैयार करने का निर्णय लिया।
नए निकाहनामे में बहुविवाह , तीन तलाक और हलाला पर प्रतिबंध के प्रावधान शामिल होंगे।
केवल वक्फ बोर्ड द्वारा नियुक्त काजी और इमाम ही निकाह संपन्न करा सकेंगे।
धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कराना अपराध माना जाएगा; उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई होगी।
निकाहनामे के साथ संलग्न हलफनामे में गलत जानकारी देना भी दंडनीय होगा।
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यूसीसी लागू किया।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के प्रावधानों के अनुरूप मुस्लिम समुदाय के लिए एक नया निकाहनामा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने 3 सितंबर को देहरादून में स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को उन कानूनी मुश्किलों और अपराधों से बचाना है जो यूसीसी के लागू होने के बाद उत्पन्न हो सकती हैं।

नए निकाहनामे की पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने यूसीसी लागू किया। इस कानून के अंतर्गत बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, तीन तलाक पर पाबंदी और हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इन्हीं बदलावों को ध्यान में रखते हुए वक्फ बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक में नया निकाहनामा लाने का निर्णय लिया।

शम्स ने कहा, 'मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बना। यूसीसी लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लग गई है, तीन तलाक पर पाबंदी है और हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध माना गया है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक में मुस्लिम समुदाय के लिए एक नया निकाहनामा लाने का फैसला किया, ताकि यूसीसी का सख्ती से पालन हो सके।'

निकाहनामे में क्या होगा

नए निकाहनामे में विस्तृत जानकारी भरना अनिवार्य होगा। शम्स के अनुसार, 'नए निकाहनामे से समाज में जागरूकता आएगी और लोग इन समस्याओं से बच सकेंगे। कोई भी व्यक्ति अब एक से अधिक शादी नहीं कर पाएगा। अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों में एक व्यक्ति एक ही पत्नी के साथ रहता है, और यहां भी ऐसा ही होना चाहिए।'

निकाहनामे के साथ संलग्न हलफनामे में दी गई सभी जानकारी पूरी तरह सत्य होनी चाहिए। गलत जानकारी देने या उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा।

काजी और इमामों की नियुक्ति पर नियंत्रण

वक्फ बोर्ड अब केवल उन्हीं काजी और इमामों को निकाह पढ़ाने का अधिकार देगा जिन्हें बोर्ड स्वयं नियुक्त करेगा। शम्स ने स्पष्ट किया, 'निकाह वही काजी और इमाम करा पाएंगे, जिन्हें वक्फ बोर्ड नियुक्त करेगा। इसी निकाहनामे पर निकाह होगा। अलग से किसी दस्तावेज पर निकाह नहीं होगा।' यह कदम मस्जिदों और मदरसों पर वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र को देखते हुए उठाया गया है।

धर्मांतरण कराकर निकाह पर रोक

चेयरमैन शम्स ने यह भी स्पष्ट किया कि निकाह के समय लोगों को जागरूक किया जाएगा कि धर्म परिवर्तन कराकर किसी का निकाह कराना अपराध की श्रेणी में आएगा। उन्होंने कहा, 'अगर दो अलग-अलग धर्मों के लोगों को शादी करनी है तो कोर्ट जा सकते हैं। ऐसा नहीं होगा कि घर पर किसी को बुलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराएं और निकाह करा दें।'

उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से मौलानाओं को भी कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि वे नियमों के दायरे में रहकर ही कार्य करेंगे। गौरतलब है कि राज्य में अतीत में धर्म परिवर्तन से जुड़े निकाह के मामलों ने सामाजिक तनाव पैदा किया है।

आगे की राह

यह नया निकाहनामा उत्तराखंड में यूसीसी के क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। वक्फ बोर्ड की यह पहल यूसीसी के प्रावधानों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास है, और इसके माध्यम से मुस्लिम समुदाय में कानूनी जागरूकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। बोर्ड के अनुसार, यह निकाहनामा समाज को सही दिशा देने का काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो आमतौर पर विरोध का विषय रहा है। लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है: काजी-इमाम नियुक्ति पर केंद्रीकृत नियंत्रण कितना व्यावहारिक होगा, और क्या यह निकाहनामा राज्य के दूरदराज़ इलाकों में भी समान रूप से लागू हो पाएगा? धर्मांतरण-निकाह पर रोक का प्रावधान कानूनी दृष्टि से संवेदनशील है और इसे न्यायिक चुनौती मिल सकती है। बोर्ड का यह कदम सामाजिक सुधार की दिशा में है, पर इसकी विश्वसनीयता स्वतंत्र निगरानी तंत्र के बिना अधूरी रहेगी।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का नया निकाहनामा क्या है?
यह यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया जा रहा एक नया विवाह दस्तावेज है, जिसमें बहुविवाह, तीन तलाक और हलाला पर प्रतिबंध के नियम शामिल होंगे। वक्फ बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक में इसे लागू करने का निर्णय लिया।
इस नए निकाहनामे की ज़रूरत क्यों पड़ी?
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाएँ कानूनी अपराध बन गई हैं। वक्फ बोर्ड चेयरमैन शादाब शम्स के अनुसार, नया निकाहनामा मुस्लिम समुदाय को इन कानूनी उलझनों से बचाने और यूसीसी के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
क्या अब कोई भी काजी या इमाम निकाह करा सकेगा?
नहीं। नए नियमों के तहत केवल वही काजी और इमाम निकाह संपन्न करा सकेंगे जिन्हें वक्फ बोर्ड स्वयं नियुक्त करेगा। निकाह केवल इसी निकाहनामे पर होगा, किसी अन्य दस्तावेज पर नहीं।
धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कराने पर क्या होगा?
वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स के अनुसार, धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कराना अपराध की श्रेणी में माना जाएगा और उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अलग-अलग धर्मों के लोग चाहें तो कोर्ट के माध्यम से विवाह कर सकते हैं।
उत्तराखंड में यूसीसी कब और कैसे लागू हुआ?
उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। इस कानून के तहत बहुविवाह, तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित और अपराध घोषित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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