क्या उत्तराखंड में यूसीसी के एक साल पूरे होने पर मनु गौड़ खुश हैं?

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क्या उत्तराखंड में यूसीसी के एक साल पूरे होने पर मनु गौड़ खुश हैं?

सारांश

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के सफलतापूर्वक लागू होने का एक साल पूरा हो गया है। मनु गौड़ ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना की और यूसीसी के प्रभावों पर चर्चा की। जानें इस ऐतिहासिक कदम का महत्व क्या है।

Key Takeaways

  • यूसीसी का एक साल पूरा होना एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से यह संभव हुआ।
  • चार लाख विवाह यूसीसी पोर्टल पर पंजीकृत हुए हैं।
  • यूसीसी ने महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा में योगदान दिया है।
  • संशोधन की आवश्यकता यूसीसी को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए है।

देहरादून, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने का एक साल पूरा हो गया है। इस विशेष अवसर पर, यूसीसी को लागू करने के लिए गठित ड्राफ्ट समिति के सदस्य मनु गौड़ ने कहा कि यह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मेहनत का परिणाम है कि आज प्रदेश में यूसीसी का एक साल सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ।

मनु गौड़ ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं यह ठान लिया था कि यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बने। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि यूसीसी के ड्राफ्ट में मुझे योगदान देने का अवसर मिला। इस ऐतिहासिक कार्य में मेरा भी योगदान रहा।

उन्होंने बताया कि यूसीसी का निर्माण करने में तीन वर्ष का समय लगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राज्य की 50 प्रतिशत महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त हों, चाहे वो विवाह से संबंधित मुद्दे हों या संपत्ति से। एक साल पहले, 27 जनवरी 2025 को, राज्य में यूसीसी लागू किया गया था। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि यूसीसी पोर्टल पर अब तक चार लाख विवाह पंजीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा, 80 लाख ऐसे विवाह पंजीकृत हुए हैं जो यूसीसी लागू होने से पहले हुए थे। यह आंकड़े यूसीसी की लोकप्रियता को स्पष्ट करते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे केवल विवाह से संबंधित मुद्दा मानते हैं। ऐसे लोगों को बताना चाहूंगा कि पिछले वर्ष 11 मामले बहुविवाह से जुड़े दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, 54 मामले तीन तलाक से संबंधित दर्ज हुए हैं, जिससे 54 महिलाओं का शोषण रोकने में मदद मिली है। यह आंकड़े आम जनता तक नहीं पहुँच पाते।

लिव-इन रिलेशनशिप पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि यूसीसी समिति और सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि कोई लिव-इन रिलेशनशिप में माता-पिता बनता है, तो उसके हितों की सुरक्षा कैसे की जाए। इस संबंध में 162 आवेदन यूसीसी पोर्टल पर पंजीकृत किए गए थे, जिनमें से 70 को मंजूरी मिल गई।

मनु गौड़ ने यूसीसी में संशोधन पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत के संविधान में समय-समय पर संशोधन होते हैं, उसी तरह यूसीसी को भी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संशोधनों की आवश्यकता थी।

उन्होंने प्राइवेसी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विवाह एक व्यक्तिगत मामला है। भारत के उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों को विवाह पंजीकरण के संबंध में कानून लाने का निर्देश दिया है। यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण से सभी जानकारी दर्ज होती है, जिससे प्राइवेसी भी सुरक्षा में आती है।

Point of View

बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है। यूसीसी को लागू करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन इसका प्रभाव दीर्घकालिक होगा।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

यूसीसी क्या है?
यूसीसी का मतलब समान नागरिक संहिता है, जो सभी नागरिकों के लिए समान कानूनों का प्रस्ताव करता है।
यूसीसी का उद्देश्य क्या है?
यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना है।
यूसीसी लागू होने के फायदे क्या हैं?
यूसीसी लागू होने से महिलाओं को समानता, संपत्ति के अधिकार, और विवाह में सुरक्षा मिलती है।
क्या यूसीसी में कोई संशोधन हुआ है?
हाँ, यूसीसी में समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं ताकि यह प्रासंगिक और उपयोगी बना रहे।
यूसीसी का प्रभाव समाज पर क्या है?
यूसीसी का प्रभाव समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा देने में मदद करता है।
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