क्या भारतीय रॉक पाइथन वास्तव में बिना जहर का सबसे बड़ा सांप है?
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय रॉक पाइथन भारत का सबसे बड़ा बिना विष वाला सांप है।
- इसकी लंबाई 25 फीट तक हो सकती है।
- यह शिकार के लिए ताकतवर मांसपेशियों का उपयोग करता है।
- पाइथन का शिकार करने का तरीका अद्वितीय है।
- यह पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
नई दिल्ली, 5 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। घने जंगलों में निवास करने वाला एक विशालकाय अजगर, जिसकी त्वचा पर भूरे रंग की आकर्षक धारियां होती हैं, यह लंबाई में 25 फीट तक बढ़ सकता है। इसका शरीर अत्यंत मोटा, मजबूत और शक्तिशाली होता है। यहां हम भारतीय रॉक पाइथन की चर्चा कर रहे हैं, जिसे भारत का सबसे बड़ा बिना विष वाला सांप माना जाता है।
बिहार सरकार के वन और जंगल विभाग के अनुसार, भारतीय रॉक पाइथन में जहर नहीं होता, लेकिन इसकी मांसपेशियां काफी ताकतवर होती हैं। यदि यह शिकार को एक बार लपेट ले, तो दम घुटने के कारण उसकी मृत्यु हो जाती है। पाइथन की आंखों के पास खास सेंसरी पिट्स होते हैं, जो शिकार के शरीर की गर्मी को महसूस करते हैं, जिससे यह अंधेरे में भी आसानी से शिकार ढूंढ लेते हैं। यह आमतौर पर छोटे स्तनधारियों को अपना भोजन बनाता है।
यह सांप भारत के कई क्षेत्रों में पाया जाता है, जैसे उत्तर से लेकर दक्षिण, पश्चिमी घाट, पूर्वी राज्यों जैसे बंगाल, ओडिशा, झारखंड, असम, मध्य भारत और यहां तक कि गुजरात के जंगलों और अंडमान-निकोबार में भी।
पाइथन दलदल, नदियों, झीलों, मैंग्रोव और घने जंगलों में निवास करते हैं। उनकी खासियत यह है कि वे अच्छे तैराक होते हैं और पानी के किनारे अधिक समय बिताते हैं। यह पेड़ों पर भी चढ़ने में सक्षम होते हैं। इनका शिकार करने का तरीका भी अद्वितीय है। छोटे-मध्यम स्तनधारियों, पक्षियों, छिपकलियों से लेकर बड़े जानवर जैसे चिंकारा या चित्तीदार हिरण तक को यह जकड़ लेता है और फिर निगल जाता है।
गुजरात सरकार के वन विभाग के अनुसार, पाइथन शिकार को देखते ही तेजी से लपकता है, फिर अपने लंबे शरीर के कई लपेटे लगाकर शिकार पर दबाव डालता है, जिससे शिकार का दिल धड़कना बंद हो जाता है। इसके बाद, यह अपने मुंह को बहुत चौड़ा करके शिकार को साबुत निगल लेता है। भारतीय रॉक पाइथन की औसत लंबाई 8-12 फीट होती है, लेकिन कुछ 15-25 फीट तक पहुंच जाते हैं और उनका वजन 52 किलो तक हो सकता है।
इसके शरीर पर भूरे, स्लेटी या पीले-काले धारियां होती हैं, जो इसे जंगल में छिपने में मदद करती हैं। हालांकि, पाइथन अब खतरे में है, और इसकी जनसंख्या में कमी आ रही है। इस कारण से इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इसे संकट के करीब घोषित किया है। जंगल की कटाई, खेती, शहरीकरण, अवैध शिकार, सड़क हादसे और लोगों के साथ टकराव इसके कमी के प्रमुख कारण हैं।
एक अध्ययन में देखा गया है कि स्थानांतरित किए गए पाइथन 13 किमी दूर छोड़े जाने पर भी अपने आवास पर वापस आ सकते हैं, जिसमें अद्भुत दिशा ज्ञान होता है। सर्दियों में ये कम सक्रिय रहते हैं, जबकि गर्मियों में सुबह-शाम अधिक घूमते हैं। भारतीय रॉक पाइथन न केवल जंगल का हिस्सा हैं, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह चूहों, खरगोश जैसी प्रजातियों की संख्या को नियंत्रित करते हैं।