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क्या अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा भारत के लिए फायदेमंद है?

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क्या अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा भारत के लिए फायदेमंद है?

सारांश

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा अब सामने आ चुका है। यह सौदा भारत को पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक लाभ दे रहा है। जानिए इस समझौते के पीछे की खास बातें और इससे किस प्रकार का आर्थिक लाभ होगा।

मुख्य बातें

भारत को अमेरिका से टैरिफ में कमी मिली है।
30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार भारतीय छोटे व्यवसायों के लिए खुला है।
भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।
टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को सबसे अधिक लाभ होगा।
अमेरिका ने अन्य देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाया है।

नई दिल्ली, 7 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत और अमेरिका के व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा अब सामने आया है, जो दर्शाता है कि भारत को पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक लाभकारी सौदा प्राप्त हुआ है।

इस व्यापारिक समझौते से भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग में वृद्धि होगी। इसके साथ ही, देश के एमएसएमई, छोटे व्यवसायों और कुशल श्रमिकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर

भारत-यूएस व्यापार समझौते के तहत, अमेरिका में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से कम होकर 18 प्रतिशत हो गया है।

इस 18 प्रतिशत टैरिफ के कारण, अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी।

यह भारत को अमेरिकी बाजार में अपने मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के साथ मुकाबला करने में मदद करेगा और टैरिफ गैप को कम करेगा।

फिलहाल, अमेरिका ने यूरोप पर 15 प्रतिशत, यूके पर 10 प्रतिशत, स्विट्जरलैंड पर 15 प्रतिशत, जापान पर 15 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया पर 15 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है।

सबसे अधिक टैरिफ वाले देशों में ब्राजील 50 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद म्यांमार और लाओस 40 प्रतिशत, चीन 37 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका 30 प्रतिशत पर हैं।

अमेरिका के साथ यह व्यापार समझौता भारत की टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर गुड्स और केमिकल एवं इंजीनियरिंग गुड्स उद्योगों के लिए सबसे बड़ा लाभकारी साबित होगा।

इससे भारत की स्थिति क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भी मजबूत होगी। यह ढांचा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क हटाने का एक महत्वपूर्ण रास्ता खोलता है।

अमेरिकी शुल्क में कमी के कारण, भारत की दरें अधिकांश आसियान देशों से कम हो जाती हैं, और चीन की तुलना में भारत को बेहतर स्थिति प्राप्त होती है।

डीबीएस ग्रुप रिसर्च की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, "यह सफलता वास्तविक अर्थव्यवस्था, निर्यात, बाजार की भावनाओं और वित्तीय बाजारों के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक है, हालांकि विस्तृत जानकारी का इंतजार है।"

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किए गए टैरिफ दरों में से अब भारत, चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसी अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम दरों वाले देशों में से एक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अमेरिका के लिए भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर साबित हो सकता है। हम उम्मीद करते हैं कि यह समझौता भविष्य में और अधिक व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करेगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और अमेरिका के बीच इस नए व्यापारिक समझौते से क्या लाभ होगा?
इस समझौते से भारत को अमेरिका में निर्यात पर टैरिफ में कमी मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
क्या इस समझौते से भारत के छोटे व्यवसायों को लाभ होगा?
हां, इस समझौते से भारत के एमएसएमई और छोटे कारोबारियों को एक बड़ा बाजार मिलेगा।
अमेरिका ने किन देशों पर अधिक टैरिफ लगाया है?
अमेरिका ने ब्राजील, म्यांमार, लाओस, चीन और दक्षिण अफ्रीका पर अधिक टैरिफ लगाया है।
क्या यह समझौता भारत की टेक्सटाइल उद्योग को प्रभावित करेगा?
जी हां, यह समझौता भारत की टेक्सटाइल, अपैरल और अन्य उद्योगों को बड़ा लाभ देगा।
क्या इस समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था को कोई नुकसान होगा?
इस समझौते के सकारात्मक प्रभावों के अलावा, इससे अन्य देशों के साथ व्यापार में चुनौतियां भी आ सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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