ट्रंप ने मोदी को बताया 'अच्छा दोस्त', बोले — भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द होगी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 जून 2025 को व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना 'अच्छा दोस्त' बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता शीघ्र संपन्न हो सकता है। कोयला और ऊर्जा नीति पर आयोजित इस कार्यक्रम में ट्रंप की यह टिप्पणी तब आई जब उनसे विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया भारत दौरे के बाद व्यापार वार्ता की प्रगति के बारे में पूछा गया।
ट्रंप के बयान का सार
ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, 'हाँ, हम यह समझौता कर रहे हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'हम समझौता कर लेंगे, क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं। हमारी आपस में बहुत अच्छी बनती है और हम एक समझौता करेंगे। हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं।' यह बयान दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता को एक नई गति देने वाला माना जा रहा है।
टैरिफ पर पुरानी शिकायत फिर दोहराई
ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित शिकायत भी दोहराई कि भारत ने 'कई वर्षों तक' अमेरिकी उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाया। उन्होंने हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भारत इन पर 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता था, जिससे अमेरिकी कंपनी को अंततः भारत में ही अपने संयंत्र स्थापित करने पड़े। ट्रंप के अनुसार, 'वे हमारे उत्पादों पर बहुत ज़्यादा टैरिफ लगाते थे और हम उनसे कुछ नहीं लेते थे। लेकिन अब स्थिति बिल्कुल उलट है।'
रुबियो के भारत दौरे की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया भारत दौरे के बाद दोनों देशों में व्यापार समझौते के करीब पहुँचने की खबरें आ रही हैं। वॉशिंगटन और नई दिल्ली, दोनों में वार्ताकारों के बीच ऐसे समझौते की उम्मीद बढ़ी है जिससे बाज़ार तक पहुँच आसान होगी और टैरिफ से जुड़े कई विवाद सुलझ सकते हैं। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में व्यापार अब रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला के साथ-साथ एक केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।
मोदी-ट्रंप व्यक्तिगत संबंध
ट्रंप की टिप्पणियों में प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों की झलक भी स्पष्ट थी। अपने पहले कार्यकाल में दोनों नेताओं ने कई बड़े सार्वजनिक आयोजनों में साझेदारी की थी — जिनमें ह्यूस्टन का 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम और अहमदाबाद का 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम उल्लेखनीय हैं। यह व्यक्तिगत रसायन अब व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने में एक कूटनीतिक संसाधन के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या
दोनों देशों के वार्ताकार बाज़ार पहुँच और टैरिफ ढाँचे पर विस्तृत चर्चा में जुटे हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद व्यापार समझौते की समयसीमा को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी अंतिम समझौते में कृषि, डेयरी और डिजिटल व्यापार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर सहमति सबसे बड़ी चुनौती होगी।