9 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होगा अंतिम: मार्को रुबियो, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' आएगा भारत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होगा अंतिम: मार्को रुबियो, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' आएगा भारत

सारांश

नई दिल्ली में विदेश मंत्री जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को 'दीर्घकालिक और टिकाऊ' बताया। टैरिफ विवाद को भारत-विरोधी नहीं, बल्कि अमेरिकी व्यापार पुनर्गठन का हिस्सा बताते हुए उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की जल्द भारत यात्रा की घोषणा की।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 मई को नई दिल्ली में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में है।
रुबियो ने समझौते को दीर्घकालिक, दोनों पक्षों के लिए लाभकारी और टिकाऊ बताया।
ट्रंप प्रशासन के टैरिफ को भारत-विरोधी नहीं, बल्कि अमेरिका के वैश्विक व्यापार पुनर्गठन का हिस्सा बताया गया।
एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 'बहुत जल्द' भारत आएगा।
रुबियो ने विदेश मंत्री एस.
जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में द्विपक्षीय साझेदारी को सकारात्मक दिशा में बताया।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 मई को नई दिल्ली में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम चरण में है और यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में रुबियो ने यह भी घोषणा की कि एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' भारत की यात्रा करेगा।

रुबियो ने क्या कहा

संयुक्त प्रेस वार्ता में रुबियो ने कहा, "हमने द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में बड़ी प्रगति की है और मुझे लगता है कि हम अमेरिका और भारत के बीच एक ऐसे व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे जो दीर्घकालिक होगा, दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ होगा।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

टैरिफ विवाद पर अमेरिकी रुख

ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर रुबियो ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के वैश्विक व्यापार ढाँचे के पुनर्गठन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने कभी नहीं कहा कि कोई ऐसा तरीका निकालो, जिससे भारत के साथ टकराव बढ़े। हमारे सामने अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी कुछ ऐसी चुनौतियाँ हैं, जिनके साथ आगे नहीं जाया जा सकता।"

व्यापार असंतुलन की चुनौती

रुबियो ने स्वीकार किया कि अमेरिका के सामने एक बड़ा व्यापार असंतुलन है जिसे दूर करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के पास एक बड़ा व्यापार असंतुलन है, जिस पर काम किया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति की कोशिश केवल इसे ठीक करने की थी, न कि भारत को टारगेट करना।" गौरतलब है कि भारत अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा अत्यंत विशाल है।

आगे क्या होगा

रुबियो के अनुसार, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' भारत दौरे पर आएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में ऐसे व्यापारिक समझौतों की तलाश कर रहा है जो अमेरिका के साथ-साथ उसके व्यापारिक भागीदारों के लिए भी फायदेमंद हों। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी आर्थिक साझेदारियों को पुनर्परिभाषित करने में जुटा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस समयसीमा या शर्तों का अभाव इसे अधूरा छोड़ता है — 'बहुत जल्द' जैसे अस्पष्ट शब्द व्यापार वार्ताओं में अक्सर महीनों में बदल जाते हैं। टैरिफ को 'भारत-विरोधी नहीं' बताना राजनयिक भाषा है, लेकिन भारतीय निर्यातकों पर पड़ रहे वास्तविक दबाव को नकारता नहीं। असली सवाल यह है कि व्यापार असंतुलन सुधारने की अमेरिकी माँग और भारत की संरक्षणवादी नीतियों के बीच किस हद तक समझौता होगा — और क्या यह 'राष्ट्रीय हित' दोनों देशों के लिए एक समान परिभाषित होगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की वर्तमान स्थिति क्या है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, समझौता अंतिम चरण में है और जल्द ही एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल इसे अंतिम रूप देने के लिए भारत आएगा। रुबियो ने इसे दीर्घकालिक और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के अनुकूल बताया।
ट्रंप प्रशासन के टैरिफ का भारत पर क्या असर है?
रुबियो ने स्पष्ट किया कि टैरिफ भारत को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के वैश्विक व्यापार ढाँचे के पुनर्गठन की रणनीति का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार असंतुलन को ठीक करना है।
रुबियो और जयशंकर की बैठक में क्या हुआ?
24 मई को नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। इसमें व्यापार वार्ता में प्रगति, टैरिफ नीति और द्विपक्षीय साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर चर्चा हुई।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत कब आएगा?
रुबियो ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' भारत आएगा, हालाँकि उन्होंने कोई निश्चित तिथि नहीं बताई। यह यात्रा समझौते को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से होगी।
भारत-अमेरिका व्यापार असंतुलन क्या है और यह क्यों अहम है?
रुबियो ने स्वीकार किया कि अमेरिका के सामने भारत के साथ एक बड़ा व्यापार असंतुलन है, जिसे दूर करना ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता है। भारत अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है, इसलिए इस असंतुलन को ठीक करना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 9 महीने पहले