भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द होगा अंतिम: मार्को रुबियो, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' आएगा भारत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 मई को नई दिल्ली में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम चरण में है और यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में रुबियो ने यह भी घोषणा की कि एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' भारत की यात्रा करेगा।
रुबियो ने क्या कहा
संयुक्त प्रेस वार्ता में रुबियो ने कहा, "हमने द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में बड़ी प्रगति की है और मुझे लगता है कि हम अमेरिका और भारत के बीच एक ऐसे व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे जो दीर्घकालिक होगा, दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ होगा।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
टैरिफ विवाद पर अमेरिकी रुख
ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर रुबियो ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के वैश्विक व्यापार ढाँचे के पुनर्गठन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने कभी नहीं कहा कि कोई ऐसा तरीका निकालो, जिससे भारत के साथ टकराव बढ़े। हमारे सामने अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी कुछ ऐसी चुनौतियाँ हैं, जिनके साथ आगे नहीं जाया जा सकता।"
व्यापार असंतुलन की चुनौती
रुबियो ने स्वीकार किया कि अमेरिका के सामने एक बड़ा व्यापार असंतुलन है जिसे दूर करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के पास एक बड़ा व्यापार असंतुलन है, जिस पर काम किया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति की कोशिश केवल इसे ठीक करने की थी, न कि भारत को टारगेट करना।" गौरतलब है कि भारत अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा अत्यंत विशाल है।
आगे क्या होगा
रुबियो के अनुसार, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल 'बहुत जल्द' भारत दौरे पर आएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में ऐसे व्यापारिक समझौतों की तलाश कर रहा है जो अमेरिका के साथ-साथ उसके व्यापारिक भागीदारों के लिए भी फायदेमंद हों। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी आर्थिक साझेदारियों को पुनर्परिभाषित करने में जुटा है।