जयशंकर-रूबियो वार्ता: भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति, हैदराबाद हाउस में बैठक
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच 25 मई 2025 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। रूबियो ने स्पष्ट किया कि उनकी यह यात्रा संबंधों को 'पुनर्स्थापित' करने के लिए नहीं, बल्कि एक 'बहुत मजबूत और ठोस' साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए है।
बैठक का मुख्य संदेश
हैदराबाद हाउस में अपने शुरुआती संबोधन में रूबियो ने कहा, 'यह रिश्ता पुनर्स्थापना या पुनर्जीवन के बारे में नहीं है, जैसा कि कुछ लोग कहते हैं। यह पहले से मौजूद एक बहुत मजबूत और ठोस रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक है।'
उन्होंने दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों — भारत और अमेरिका — के बीच 'अद्भुत सहयोग' की नींव का उल्लेख किया और कहा कि यह साझेदारी किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रही है।
जयशंकर का रुख
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने शुरुआती संबोधन में भारत-अमेरिका संबंधों को 'व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' बताया। उन्होंने कहा, 'हमारे बीच बहुत गहरा और व्यापक सहयोग है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों पर भी प्रभाव डालता है।' जयशंकर ने यह भी कहा कि दोनों देश 'रणनीतिक सहयोगी हैं जिनका अत्यंत महत्वपूर्ण महत्व है।'
प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक
शुरुआती संबोधन के बाद दोनों नेताओं ने हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक की। इसमें व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। रूबियो ने कहा कि दोनों देशों के कई साझा हित हैं और आगे बढ़ते रहना 'पूरी तरह से स्वाभाविक' है।
वैश्विक संदर्भ में साझेदारी
रूबियो ने यह भी रेखांकित किया कि भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं है — दोनों देश 'पश्चिमी गोलार्ध के क्षेत्रों सहित' वैश्विक मुद्दों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ सैन्य तनाव का सामना किया है और वैश्विक कूटनीतिक समर्थन की दृष्टि से अमेरिका के साथ संबंध और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
गौरतलब है कि यह रूबियो की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है और ट्रंप प्रशासन के कार्यभार संभालने के बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच पहली औपचारिक द्विपक्षीय बैठक है। आगे दोनों देशों के बीच व्यापार और प्रौद्योगिकी समझौतों पर और ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है।