रूबियो-जयशंकर वार्ता: भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाई देने पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 24 मई 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद 'बहुत मजबूत और ठोस रणनीतिक साझेदारी' को और विस्तार देने पर जोर दिया गया। रूबियो ने स्पष्ट किया कि उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य संबंधों को 'पुनर्स्थापित' करना नहीं, बल्कि एक सुदृढ़ नींव को और आगे ले जाना है।
मुख्य घटनाक्रम
हैदराबाद हाउस में आयोजित बैठक के शुरुआती संबोधन में रूबियो ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों — भारत और अमेरिका — ने 'अद्भुत सहयोग' की नींव डाली है। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को दुनिया की 'सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक' करार दिया।
रूबियो ने कहा, 'यह रिश्ता पुनर्स्थापना या पुनर्जीवन के बारे में नहीं है, जैसा कि कुछ लोग कहते हैं। यह पहले से मौजूद एक बहुत मजबूत और ठोस रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक है।'
जयशंकर का रुख
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका 'रणनीतिक सहयोगी हैं जिनका अत्यंत महत्वपूर्ण महत्व है।' उन्होंने कहा, 'हमारी एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है, जिसका अर्थ है कि हमारे बीच बहुत गहरा और व्यापक सहयोग है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों पर भी प्रभाव डालता है।' जयशंकर ने आश्वस्त किया कि वार्ता सफल रहेगी।
वैश्विक सहयोग का दायरा
रूबियो ने इस साझेदारी की व्यापकता को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देश केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 'वैश्विक सहयोग की ओर अग्रसर हैं जिसमें पश्चिमी गोलार्ध के क्षेत्र भी शामिल हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका संबंध व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी — तीनों मोर्चों पर एक साथ सक्रिय हैं।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक
शुरुआती संबोधन के बाद दोनों नेताओं ने हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक की। इसमें व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है।
आगे की राह
रूबियो की यह भारत यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवाद की निरंतरता को दर्शाती है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि 'आगे बढ़ते रहना पूरी तरह से स्वाभाविक है' क्योंकि दोनों देशों के 'कई साझा हित' हैं। आने वाले महीनों में व्यापार, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में ठोस समझौतों की संभावना है।