रूबियो-जयशंकर वार्ता: 'भारत अमेरिका के सबसे अहम रणनीतिक साझेदारों में', क्रिटिकल मिनरल्स और आतंकवाद पर साझा रुख
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 24 मई 2025 को नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत को अमेरिका के 'सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक' बताया। रूबियो ने कहा कि दोनों देश क्रिटिकल मिनरल्स, सप्लाई चेन्स और आतंकवाद-रोधी सहयोग सहित कई वैश्विक मुद्दों पर समान रणनीतिक सोच रखते हैं।
वार्ता के मुख्य बिंदु
रूबियो ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका साझेदारी किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'रणनीतिक साझेदारी का मतलब केवल किसी एक क्षेत्र में सहयोग नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर साझा हितों के आधार पर मिलकर काम करना है।' दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र, होर्मुज जलडमरूमध्य की हालिया स्थिति और अन्य वैश्विक घटनाओं पर विचार-विमर्श किया।
आपूर्ति श्रृंखला की विविधता पर रूबियो ने कहा कि 21वीं सदी में महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच और किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता दोनों देशों के लिए साझा चुनौती है।
लोकतांत्रिक जवाबदेही पर ज़ोर
रूबियो ने दोनों देशों की लोकतांत्रिक प्रकृति को साझेदारी की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे हर निर्णय के लिए अमेरिकी जनता को जवाब देना पड़ता है और राष्ट्रपति को भी यह बताना पड़ता है कि यह हमारे देश के लिए क्यों अच्छा है। यहाँ भारत में भी आपके नेताओं को यही करना होता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'लोकतंत्र में जवाबदेही सीधे जनता के प्रति होती है। यहाँ विपक्षी दल होते हैं, स्वतंत्र मीडिया होता है। भारत में मीडिया बहुत है। इसका मतलब है अधिक जाँच और अधिक निगरानी।' यह साझा जवाबदेही ढाँचा ही दोनों देशों के हितों को जोड़ता है।
आतंकवाद और तकनीक पर सहयोग
रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों वैश्विक आतंकवादी नेटवर्कों से पीड़ित रहे हैं, इसीलिए आतंकवाद-रोधी सहयोग दोनों देशों की प्राथमिकता है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत हाल ही में सीमा-पार आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं का सामना कर चुका है।
तकनीक के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के लाभ और जोखिम दोनों होते हैं और उन्हें संतुलित करना इस सदी की बड़ी चुनौतियों में से एक है। दोनों देश इस क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमत दिखे।
भारत यात्रा का संदर्भ
रूबियो ने अपनी भारत यात्रा को 'शानदार' बताया। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत-अमेरिका संबंध व्यापार, रक्षा और तकनीक — तीनों मोर्चों पर नई गहराई की ओर बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रूबियो का यह दौरा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवाद की निरंतरता को दर्शाता है।
आगे दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स समझौते और सप्लाई चेन साझेदारी पर ठोस कदमों की उम्मीद जताई जा रही है।