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जयशंकर ने रूबियो के सामने रखा भारत का 5 सूत्रीय एजेंडा: संवाद, समुद्री व्यापार और आतंक पर शून्य सहिष्णुता

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जयशंकर ने रूबियो के सामने रखा भारत का 5 सूत्रीय एजेंडा: संवाद, समुद्री व्यापार और आतंक पर शून्य सहिष्णुता

सारांश

हैदराबाद हाउस में रूबियो से मुलाकात के बाद जयशंकर ने भारत का पाँच सूत्रीय वैश्विक दृष्टिकोण स्पष्ट किया — कूटनीति, समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानून, संसाधनों के हथियारीकरण का विरोध और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला। 10-वर्षीय रक्षा समझौते के नवीनीकरण और 26 मई की क्वाड बैठक के साथ यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों में नई परत जोड़ती है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने हैदराबाद हाउस में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की।
जयशंकर ने भारत का 5 सूत्रीय एजेंडा रखा: संवाद-कूटनीति, निर्बाध समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानून, हथियारीकरण का विरोध, और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला।
दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने और परमाणु सहयोग के विस्तार पर चर्चा की।
10-वर्षीय प्रमुख रक्षा साझेदारी समझौते का नवीनीकरण और पानी के नीचे डोमेन जागरूकता रोडमैप भी एजेंडे में रहा।
26/11 मुंबई हमलों के एक साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण का उल्लेख; आतंकवाद पर भारत की 'शून्य सहिष्णुता' नीति दोहराई गई।
26 मई को होने वाली क्वाड बैठक में इंडो-पैसिफिक मुद्दा प्रमुख एजेंडे पर।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार, 25 मई 2025 को हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद भारत का पाँच सूत्रीय वैश्विक दृष्टिकोण सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया। इसमें संघर्ष-समाधान के लिए कूटनीति, निर्बाध समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, व्यापार और संसाधनों के हथियारीकरण का विरोध, और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बल दिया गया।

पाँच सूत्रीय एजेंडा: भारत की स्पष्ट स्थिति

संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने भारत के पाँच सिद्धांत इस प्रकार गिनाए: पहला — संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन; दूसरा — सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार का पक्ष; तीसरा — अंतरराष्ट्रीय कानून का सख्त पालन; चौथा — बाज़ार हिस्सेदारी और संसाधनों के हथियार की तरह इस्तेमाल का विरोध; और पाँचवाँ — वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिमों से बचाने के लिए भरोसेमंद साझेदारी और मज़बूत आपूर्ति श्रृंखलाओं में विश्वास।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव, यूक्रेन संघर्ष और इंडो-पैसिफिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को और स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है।

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का विस्तार

जयशंकर ने बताया कि रूबियो की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी, लेकिन दोनों मंत्री पद संभालने के बाद से वाशिंगटन डी.सी., न्यूयॉर्क और फ्रांस में पहले मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, 'यह निरंतर संवाद दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग में सहायक रहा है।'

विदेश मंत्री ने हाल ही में नवीनीकृत 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा साझेदारी समझौते और पानी के नीचे डोमेन जागरूकता पर रोडमैप का उल्लेख किया। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' दृष्टिकोण और हालिया संघर्षों से मिले सबक को रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अहम बताया।

व्यापार, ऊर्जा और परमाणु सहयोग

आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर चर्चा की, जो आगे चलकर व्यापक व्यापार समझौते की नींव बनेगा। ऊर्जा व्यापार में विविधता को भारत की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि परमाणु सहयोग के नए अवसर खुले हैं। उभरती तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

गौरतलब है कि भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते (2008) के बाद से परमाणु सहयोग का यह विस्तार दोनों देशों के बीच एक नई रणनीतिक परत जोड़ता है।

क्षेत्रीय मुद्दे: खाड़ी, यूक्रेन और क्वाड

जयशंकर ने बताया कि उनकी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया और कैरेबियाई क्षेत्र की घटनाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि रविवार दोपहर की बातचीत खाड़ी क्षेत्र के नवीनतम घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष पर केंद्रित रहेगी। इंडो-पैसिफिक का मुद्दा 26 मई को होने वाली क्वाड बैठक के एजेंडे में भी है। इससे पहले शनिवार को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।

आतंकवाद पर भारत की कड़ी नीति

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की नीति 'शून्य सहिष्णुता' की है और दोनों देशों की एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण का उल्लेख करते हुए इसे द्विपक्षीय सहयोग की मिसाल बताया। अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ भी दोनों देशों का सहयोग जारी रहेगा।

आगे बढ़ते हुए, क्वाड बैठक (26 मई) और व्यापार समझौते की दिशा में होने वाली प्रगति यह तय करेगी कि इस कूटनीतिक संवाद के ठोस परिणाम कब और किस रूप में सामने आते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना नाम लिए। यह भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की परंपरागत नीति से एक कदम आगे है, जहाँ नई दिल्ली अब मूल्य-आधारित साझेदारी को खुलकर परिभाषित कर रही है। हालाँकि, अंतरिम व्यापार समझौते पर 'जल्द' की समयसीमा अस्पष्ट बनी हुई है — और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं का इतिहास बताता है कि 'जल्द' का अर्थ अक्सर वर्षों में निकलता है। क्वाड बैठक और यूक्रेन-खाड़ी पर रूबियो से संवाद यह भी दर्शाता है कि भारत अब बहुध्रुवीय संकटों में एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने की स्थिति में है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने रूबियो के सामने कौन-से 5 सूत्र रखे?
जयशंकर ने पाँच सिद्धांत रखे: संघर्ष-समाधान के लिए संवाद और कूटनीति; सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार; अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन; बाज़ार हिस्सेदारी और संसाधनों के हथियारीकरण का विरोध; और भरोसेमंद साझेदारी व मज़बूत आपूर्ति श्रृंखलाओं में विश्वास। यह एजेंडा हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में सामने आया।
रूबियो की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या था?
यह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की पद संभालने के बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात हुई, जिसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति क्या है?
दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई है, जो आगे चलकर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की नींव बनेगा। हालाँकि, इसकी कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक रूप से नहीं बताई गई है।
क्वाड बैठक 26 मई को किन मुद्दों पर होगी?
26 मई को होने वाली क्वाड बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र प्रमुख एजेंडे पर है। जयशंकर ने संकेत दिया कि खाड़ी क्षेत्र के घटनाक्रम और यूक्रेन संघर्ष भी इस दौर की वार्ताओं में शामिल हैं।
26/11 साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण का उल्लेख क्यों हुआ?
जयशंकर ने 26/11 मुंबई हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण का उल्लेख भारत-अमेरिका आतंकवाद-रोधी सहयोग की मिसाल के तौर पर किया। भारत की आतंकवाद पर 'शून्य सहिष्णुता' नीति और दोनों देशों की एजेंसियों के बीच सहयोग को इससे रेखांकित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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