जयशंकर ने रूबियो के सामने रखा भारत का 5 सूत्रीय एजेंडा: संवाद, समुद्री व्यापार और आतंक पर शून्य सहिष्णुता
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार, 25 मई 2025 को हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद भारत का पाँच सूत्रीय वैश्विक दृष्टिकोण सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया। इसमें संघर्ष-समाधान के लिए कूटनीति, निर्बाध समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, व्यापार और संसाधनों के हथियारीकरण का विरोध, और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बल दिया गया।
पाँच सूत्रीय एजेंडा: भारत की स्पष्ट स्थिति
संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने भारत के पाँच सिद्धांत इस प्रकार गिनाए: पहला — संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन; दूसरा — सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार का पक्ष; तीसरा — अंतरराष्ट्रीय कानून का सख्त पालन; चौथा — बाज़ार हिस्सेदारी और संसाधनों के हथियार की तरह इस्तेमाल का विरोध; और पाँचवाँ — वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिमों से बचाने के लिए भरोसेमंद साझेदारी और मज़बूत आपूर्ति श्रृंखलाओं में विश्वास।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव, यूक्रेन संघर्ष और इंडो-पैसिफिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को और स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
जयशंकर ने बताया कि रूबियो की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा थी, लेकिन दोनों मंत्री पद संभालने के बाद से वाशिंगटन डी.सी., न्यूयॉर्क और फ्रांस में पहले मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, 'यह निरंतर संवाद दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग में सहायक रहा है।'
विदेश मंत्री ने हाल ही में नवीनीकृत 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा साझेदारी समझौते और पानी के नीचे डोमेन जागरूकता पर रोडमैप का उल्लेख किया। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' दृष्टिकोण और हालिया संघर्षों से मिले सबक को रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अहम बताया।
व्यापार, ऊर्जा और परमाणु सहयोग
आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर चर्चा की, जो आगे चलकर व्यापक व्यापार समझौते की नींव बनेगा। ऊर्जा व्यापार में विविधता को भारत की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि परमाणु सहयोग के नए अवसर खुले हैं। उभरती तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
गौरतलब है कि भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते (2008) के बाद से परमाणु सहयोग का यह विस्तार दोनों देशों के बीच एक नई रणनीतिक परत जोड़ता है।
क्षेत्रीय मुद्दे: खाड़ी, यूक्रेन और क्वाड
जयशंकर ने बताया कि उनकी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया और कैरेबियाई क्षेत्र की घटनाओं पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि रविवार दोपहर की बातचीत खाड़ी क्षेत्र के नवीनतम घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष पर केंद्रित रहेगी। इंडो-पैसिफिक का मुद्दा 26 मई को होने वाली क्वाड बैठक के एजेंडे में भी है। इससे पहले शनिवार को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
आतंकवाद पर भारत की कड़ी नीति
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की नीति 'शून्य सहिष्णुता' की है और दोनों देशों की एजेंसियाँ मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के प्रत्यर्पण का उल्लेख करते हुए इसे द्विपक्षीय सहयोग की मिसाल बताया। अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ भी दोनों देशों का सहयोग जारी रहेगा।
आगे बढ़ते हुए, क्वाड बैठक (26 मई) और व्यापार समझौते की दिशा में होने वाली प्रगति यह तय करेगी कि इस कूटनीतिक संवाद के ठोस परिणाम कब और किस रूप में सामने आते हैं।