अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो नई दिल्ली पहुंचे, PM मोदी और जयशंकर से होगी मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अपने चार दिवसीय भारत दौरे के तहत कोलकाता से नई दिल्ली पहुंच गए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 23 मई 2025 को एक तस्वीर जारी कर इसकी पुष्टि की और उनके आगमन का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह दौरा भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करेगा। पदभार संभालने के बाद रूबियो की यह पहली भारत यात्रा है।
कोलकाता से हुई यात्रा की शुरुआत
रूबियो ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की, जहाँ उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी का दौरा किया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे पल ही हमें याद दिलाते हैं कि अमेरिका-भारत की साझेदारी न केवल मजबूत नीतियों पर टिकी है, बल्कि साझा मूल्यों और निस्वार्थ सेवा की भावना पर भी आधारित है।
राजदूत सर्जियो गोर ने विमान के भीतर रूबियो के साथ ली गई एक तस्वीर भी साझा की, जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ कूटनीतिक संबंधों को रेखांकित करती है।
मुख्य कार्यक्रम और द्विपक्षीय वार्ता
नई दिल्ली में रूबियो का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का कार्यक्रम निर्धारित है। इसके अलावा रविवार को वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के मुद्दे केंद्र में रहने की उम्मीद है।
इस दौरे के दौरान रूबियो आगरा और जयपुर सहित भारत के कई अन्य शहरों की भी यात्रा करेंगे।
26 मई को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक
26 मई 2025 को नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक होनी है, जिसकी मेजबानी विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे। इस बैठक में भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री शामिल होंगे।
ऑस्ट्रेलिया की ओर से विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान की ओर से विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी बैठक में भाग लेंगे। चर्चा का मुख्य केंद्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना होगा।
भू-राजनीतिक संदर्भ और रणनीतिक महत्व
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वाशिंगटन और नई दिल्ली बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में अपने सहयोग को और गहरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि क्वाड बैठक ऐसे दौर में हो रही है जब इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती सक्रियता एक साझा चिंता का विषय बनी हुई है।
आने वाले दिनों में इस दौरे के परिणामों और जारी होने वाले संयुक्त बयानों पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।