मार्को रुबियो की भारत यात्रा 23 मई से, क्वाड बैठक और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर केंद्रित रहेगा दौरा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 23 मई 2025 को भारत पहुँचेंगे और 26 मई तक देश के कई राज्यों का दौरा करेंगे। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस यात्रा को स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति बताया है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।
दौरे का कार्यक्रम और शहर
रुबियो भारत यात्रा के दौरान कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली जाएंगे। भारत आने से पहले शुक्रवार, 22 मई को वे स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग में नाटो विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार यह कार्यक्रम पहले से निर्धारित है।
क्वाड बैठक: चार देशों के विदेश मंत्री एक मंच पर
नई दिल्ली में रुबियो भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की 'क्वाड' बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक में क्वाड साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। भारतीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी इस दौरे का अहम हिस्सा होंगी।
अमेरिकी दूतावास का बयान और रुबियो का वीडियो संदेश
भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा, 'क्षेत्रीय सुरक्षा को समर्थन देने से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने तक, विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत की आगामी यात्रा क्वाड साझेदारी के महत्व पर जोर देती है।'
रुबियो ने एक वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी में है और वे इसे अपने भारतीय साझेदारों के साथ मनाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, 'भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और हम दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों में से हैं — इसलिए, हम इसे साथ में मनाने के लिए तत्पर हैं।' इस वीडियो संदेश को दूतावास ने एक्स पर साझा किया।
रणनीतिक संदर्भ: क्यों अहम है यह यात्रा
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर चिंताएँ गहरी हैं। क्वाड को इस क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के एक प्रमुख मंच के रूप में देखा जाता है। महत्वपूर्ण खनिजों — जिनमें लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्व शामिल हैं — की आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाना अमेरिका और भारत दोनों की साझा प्राथमिकता बन चुकी है।
आगे क्या
रुबियो की इस यात्रा से भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और गहराई मिलने की उम्मीद है। क्वाड बैठक के नतीजे इंडो-पैसिफिक रणनीति की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए समझौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।