मार्को रूबियो का चार दिवसीय भारत दौरा संपन्न, क्वाड बैठक के बाद आर्मेनिया रवाना
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 26 मई 2025 को अपना चार दिवसीय भारत दौरा समाप्त कर आर्मेनिया के लिए प्रस्थान किया। नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के बाद उन्होंने अगले गंतव्य की ओर रुख किया। यह दौरा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और इंडो-पैसिफिक सहयोग के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत दौरे का क्रम
रूबियो की भारत यात्रा 23 मई को कोलकाता से शुरू हुई थी। इसके बाद वे नई दिल्ली पहुँचे, जहाँ उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात की।
इसके बाद रूबियो अपनी पत्नी जेनेट डी. रूबियो के साथ आगरा में ताजमहल देखने पहुँचे। दंपती ने जयपुर का भी दौरा किया, जहाँ उनका पारंपरिक अंदाज़ में स्वागत हुआ और उन्होंने आमेर किले का भ्रमण किया।
क्वाड बैठक और रूबियो का बयान
मंगलवार सुबह रूबियो क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुँचे। उन्होंने इस बैठक को 'बहुउपयोगी और सफल' बताया।
बैठक के बाद रूबियो ने कहा, 'क्वाड अब सिर्फ समस्याओं पर चर्चा करने वाला मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह साझेदारी अब ठोस कार्रवाई की दिशा की ओर अग्रसर है।' उन्होंने मेजबानी के लिए भारत और विदेश मंत्री जयशंकर का आभार व्यक्त किया। रूबियो ने यह भी कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया अब अपनी-अपनी क्षमताओं का उपयोग करते हुए कई अहम वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया, 'जब मैं विदेश मंत्री बना, तो मेरी पहली आधिकारिक बैठक क्वाड के साथ ही थी — और इससे हमारी प्रतिबद्धता साफ दिखती है।'
आर्मेनिया में अगला कार्यक्रम
रूबियो के आर्मेनिया पहुँचने से पहले ही येरेवन स्थित अमेरिकी दूतावास ने बयान जारी कर बताया था कि वे 26 मई को कूटनीति और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा के लिए अलग-अलग बैठकें करेंगे।
दौरे के दौरान रूबियो की मुलाकात अपने आर्मेनियाई समकक्ष अरारात मीरजोयान से होगी। दोनों नेताओं के बीच वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस बयान जारी किए जाने की उम्मीद है। दूतावास के अनुसार, कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच कुछ द्विपक्षीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी शामिल हैं।
क्वाड की बढ़ती प्रासंगिकता
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक दबाव बढ़ रहे हैं। क्वाड की यह बैठक चारों देशों के बीच समन्वय को और गहरा करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। रूबियो का यह दौरा अमेरिकी विदेश नीति में भारत की केंद्रीय भूमिका को भी रेखांकित करता है।