11 जुलाई 2026
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असम बिहू, माजुली वैष्णव विरासत और रंगपुर के लिए यूनेस्को नामांकन का रोडमैप घोषित

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असम बिहू, माजुली वैष्णव विरासत और रंगपुर के लिए यूनेस्को नामांकन का रोडमैप घोषित

सारांश

चराईदेव मोइदम की यूनेस्को सफलता के बाद असम ने अगला बड़ा दांव खेला है — बिहू, माजुली की वैष्णव परंपरा और अहोम राजधानी रंगपुर के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता का रोडमैप। 2026-27 बजट में घोषित यह पहल राज्य को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर स्थापित करने की महत्वाकांक्षी कोशिश है।

मुख्य बातें

असम सरकार ने 10 जुलाई 2026 को बिहू , माजुली वैष्णव विरासत और रंगपुर के लिए यूनेस्को नामांकन का रोडमैप घोषित किया।
वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने 2026-27 बजट में यूनेस्को की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और अमूर्त विरासत — तीनों श्रेणियों में नामांकन की घोषणा की।
चराईदेव मोइदम के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सफल नामांकन के बाद यह नई पहल शुरू की गई।
रंग घर , करेन्ग घर और मधुपुर सत्र के संरक्षण व विकास के लिए वित्तीय प्रावधान किया गया।
राज्य की मठ परंपराओं के लिए असम सत्र आयोग के गठन और नई दिल्ली में भव्य बिहू उत्सव आयोजन का प्रस्ताव।
लचित बरफुकन और शहीद कुशल कोंवर पर फीचर फिल्मों के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा।

असम सरकार ने 10 जुलाई 2026 को राज्य की तीन प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों — बिहू, माजुली की वैष्णव सांस्कृतिक परंपरा और शिवसागर स्थित अहोम राजधानी रंगपुर — के लिए यूनेस्को की अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल करने का विस्तृत रोडमैप सार्वजनिक किया। यह घोषणा असम विधानसभा में 2026-27 के बजट के दौरान की गई, जो राज्य की सांस्कृतिक कूटनीति की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

बजट में क्या घोषित हुआ

वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि राज्य यूनेस्को की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और अमूर्त विरासत — तीनों श्रेणियों के तहत नामांकन प्रक्रिया शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि नामांकन चरणों में किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक धरोहर को आवश्यक दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण का पर्याप्त समय मिले। इस पहल का मकसद असम की अनूठी विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करना और सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति देना है।

चराईदेव मोइदम की सफलता से मिली प्रेरणा

यह रोडमैप चराईदेव मोइदम के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सफल नामांकन के बाद तैयार किया गया है। राज्य सरकार ने उस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने असम की सभ्यतागत गहराई को प्रमाणित करने वाला मील का पत्थर बताया था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की कोशिशें तेज हो रही हैं।

स्मारकों के संरक्षण पर विशेष ज़ोर

विरासत एजेंडे के तहत रंग घर संरक्षण परियोजना में काम की गति बढ़ाने की घोषणा की गई। इसके अलावा अहोम-युग के ऐतिहासिक स्मारक करेन्ग घर के जीर्णोद्धार, संरक्षण और पर्यटन बुनियादी ढाँचे के विकास का प्रावधान भी बजट में रखा गया। 15वीं सदी के संत-सुधारक श्रीमंत शंकरदेव के जीवन के अंतिम वर्षों से जुड़े पवित्र स्थल मधुपुर सत्र के व्यापक विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। राज्य की मठ-संबंधी परंपराओं को संस्थागत रूप देने के लिए असम सत्र आयोग का गठन और उसे अधिकार संपन्न बनाने की भी घोषणा की गई।

सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर

बजट में नई दिल्ली में एक भव्य बिहू उत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि राष्ट्रीय दर्शकों के सामने असम की सांस्कृतिक पहचान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। इसके साथ ही महान अहोम सैन्य कमांडर लचित बरफुकन और स्वतंत्रता सेनानी शहीद कुशल कोंवर पर कमर्शियल फीचर फिल्में बनाने के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई। भारत रत्न भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह का समापन कार्यक्रम भी नई दिल्ली में आयोजित करने का प्रस्ताव है।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों के अनुसार, यूनेस्को नामांकन प्रक्रिया लंबी और बहु-स्तरीय होती है — इसमें दस्तावेज़ीकरण, केंद्र सरकार की सिफारिश और यूनेस्को की समिति की समीक्षा सहित कई चरण शामिल हैं। राज्य सरकार की इस व्यापक रणनीति का अंतिम लक्ष्य असम को सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन का एक प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती प्रक्रियागत है — यूनेस्को नामांकन में वर्षों का दस्तावेज़ीकरण, केंद्र सरकार की सक्रिय भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय समिति की कड़ी समीक्षा शामिल होती है। चराईदेव मोइदम की सफलता एक उत्साहजनक मिसाल है, पर एक साथ कई धरोहरों के नामांकन की कोशिश संसाधनों और प्रशासनिक क्षमता पर दबाव डाल सकती है। बिहू पहले से अमूर्त विरासत सूची में है — इसलिए सरकार की असली परीक्षा माजुली और रंगपुर के लिए वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य केस तैयार करने में होगी। सांस्कृतिक पर्यटन की संभावना वास्तविक है, पर उसका लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुँचे — यह सुनिश्चित करना बजट घोषणाओं से कहीं अधिक कठिन काम है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम सरकार किन धरोहरों के लिए यूनेस्को नामांकन चाहती है?
असम सरकार बिहू, माजुली की वैष्णव सांस्कृतिक परंपरा और शिवसागर स्थित अहोम राजधानी रंगपुर के लिए यूनेस्को की मान्यता हासिल करना चाहती है। ये नामांकन यूनेस्को की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और अमूर्त विरासत — तीनों श्रेणियों में चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे।
यह घोषणा कब और कहाँ की गई?
यह घोषणा 10 जुलाई 2026 को असम विधानसभा में वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ द्वारा 2026-27 का बजट पेश करते समय की गई। इसे राज्य की सांस्कृतिक कूटनीति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
चराईदेव मोइदम का इस पहल से क्या संबंध है?
चराईदेव मोइदम को पहले ही यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिल चुका है, जिसे असम सरकार ने एक बड़ी उपलब्धि बताया था। इसी सफलता से प्रेरित होकर राज्य ने अन्य धरोहरों के लिए भी नामांकन का रोडमैप तैयार किया है।
बजट में किन ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण का प्रावधान है?
बजट में रंग घर संरक्षण परियोजना को गति देने, करेन्ग घर के जीर्णोद्धार और पर्यटन बुनियादी ढाँचे के विकास तथा मधुपुर सत्र के व्यापक विकास के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा असम सत्र आयोग के गठन की भी घोषणा की गई है।
असम की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर कैसे प्रस्तुत किया जाएगा?
नई दिल्ली में भव्य बिहू उत्सव आयोजित करने और भारत रत्न भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी का समापन समारोह राजधानी में करने का प्रस्ताव है। इसके साथ लचित बरफुकन और शहीद कुशल कोंवर पर कमर्शियल फीचर फिल्में बनाने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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