उत्तर प्रदेश 2047: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का रोडमैप
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विकास दृष्टिकोण
- 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य
- पर्यटन अवसंरचना में सुधार
- यूनेस्को विरासतों की संख्या में वृद्धि
- स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार
लखनऊ, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'विकसित उत्तर प्रदेश@2047' के दृष्टिकोण के तहत, वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्यटन विभाग ने अपना रोडमैप प्रस्तुत किया है। इस योजना के अंतर्गत, विभाग ने राज्य को वर्ष 2047 तक विश्व की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
इस दिशा में, प्रदेश के पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में उत्तर प्रदेश का योगदान वर्तमान में लगभग 9.2 प्रतिशत है, जिसे क्रमिक रूप से बढ़ाते हुए वर्ष 2029-30 तक 11 प्रतिशत, वर्ष 2035-36 तक 14 प्रतिशत और वर्ष 2046-47 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'विकसित उत्तर प्रदेश@2047' के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में, पर्यटन विभाग राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों को तेज करेगा। इस दिशा में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, राज्य के पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों का व्यापक सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार किया गया है। इसके साथ ही, यूपी पर्यटन नीति-2022 के तहत राज्य में पर्यटन आधारित अवसंरचना जैसे होटल, रेस्टोरेंट और होमस्टे का भी तेजी से विकास किया जा रहा है। इस क्रम में, राज्य में पर्यटकों के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या को वर्तमान में प्रति लाख जनसंख्या पर 30 से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 150 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, राज्य में विदेशी पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि को वर्तमान की 3 रात्रि से बढ़ाकर वर्ष 2046-47 तक 6 रात्रि करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पर्यटकों की संख्या के मामले में, उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। हालांकि, घरेलू पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश ने सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान अर्जित कर लिया है, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में राज्य का चौथा स्थान है, जिसमें वृद्धि के सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के मानक के अनुसार, राज्य में आने वाला एक पर्यटक 6 लोगों के लिए आय का सृजन करता है। इस दिशा में, वर्ष 2025 में महाकुंभ के भव्य आयोजन में आए रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों के अतिरिक्त, राज्य के अन्य पर्यटन स्थलों पर 64.9 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटन विभाग इस संख्या को वर्ष 2029-30 तक 75 करोड़ और वर्ष 2047 तक 100 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित कर चुका है।
उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भौतिक और अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के पास यूनेस्को से मान्यता प्राप्त 07 विरासतें हैं, जिनकी संख्या को वर्ष 2029-30 तक 08, वर्ष 2035-36 तक 14 और वर्ष 2047 तक 20 पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'विकसित उत्तर प्रदेश@2047' का दृष्टिकोण राज्य में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सनातन संस्कृति और भारत की प्राचीन सभ्यता के केंद्र काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन के विकास से उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यटन गतिविधियों का विकास हो रहा है, बल्कि यह वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि भी सुनिश्चित हो रही है।