प्रधानमंत्री मोदी का नागरकोइल में 15 अप्रैल को भव्य रोड शो, एनडीए को मिलेगी मजबूती
सारांश
Key Takeaways
- प्रधानमंत्री मोदी का रोड शो 15 अप्रैल को होगा।
- यह एनडीए के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित किया जा रहा है।
- रोड शो का मार्ग प्रमुख हिस्सों से होकर गुजरेगा।
- भाजपा ने तैयारियों में तेजी लाई है।
- राजनीतिक माहौल एनडीए के पक्ष में है।
नागरकोइल, ८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी १५ अप्रैल को तमिलनाडु के नागरकोइल में एक भव्य रोड शो का आयोजन करेंगे। यह कार्यक्रम आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवारों के समर्थन में किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए नैनार नागेंद्रन ने बुधवार को बताया कि रोड शो वेपमूडू जंक्शन से वडास्सेरी एमजीआर प्रतिमा तक निकाला जाएगा, जो शहर के प्रमुख हिस्सों से होकर गुजरेगा।
प्रधानमंत्री के आगमन का सटीक समय अभी निर्धारित नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा के नेताओं ने जिले में बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। कन्याकुमारी जिले की सभी छह विधानसभा सीटों से कार्यकर्ता और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता बड़ी संख्या में इस रोड शो में शामिल होंगे। इसे इस चुनावी सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा है।
नागेंद्रन ने गठबंधन की जीत को लेकर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि एनडीए आगामी चुनावों में १८० से अधिक सीटें जीत सकता है। उन्होंने कहा कि खासकर दक्षिण तमिलनाडु में जनता का रुख तेजी से गठबंधन के पक्ष में हो रहा है।
उन्होंने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार पर हमला करते हुए नीट परीक्षा का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि पार्टी अपने वादे के अनुसार इस परीक्षा को समाप्त करने में विफल रही है।
वहीं, अभिनेता से राजनेता बने विजय की चुनावी गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इसका चुनाव परिणामों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि राजनीतिक माहौल पहले से ही एनडीए के पक्ष में है।
उन्होंने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए मेट्रो रेल परियोजना में देरी का मुद्दा भी उठाया, और कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की कमी के कारण काम प्रभावित हुआ है।
पार्टी के भीतर सीट बंटवारे को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि के. अन्नामलाई विभिन्न राज्यों में सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं।
साथ ही, सथानकुलम कस्टोडियल डेथ मामले के हालिया फैसले पर उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए और कानून को अपना कार्य करने देना चाहिए।