असम के GI-टैग उत्पाद वैश्विक बाजारों में छाए, हिमंता बिस्वा सरमा ने बताई निर्यात रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 22 जून 2026 को कहा कि राज्य के स्वदेशी और पारंपरिक उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेज़ी से अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं और विभिन्न महाद्वीपों तक असम की सांस्कृतिक एवं कृषि विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात को विशेष प्राथमिकता दे रही है।
मुख्यमंत्री का बयान
सरमा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'असम में बने उत्पाद अब पूरी दुनिया में पसंद किए जा रहे हैं। राज्य के विशिष्ट उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेज़ी से अपनी जगह बना रहे हैं और विभिन्न महाद्वीपों तक असम की पहचान पहुंचा रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा, 'हम भविष्य में असम के और अधिक उत्कृष्ट उत्पादों को विश्व बाजार तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'
तेजपुर लीची की ऐतिहासिक खेप
इसी माह सरमा ने गुवाहाटी से सिंगापुर के लिए GI-टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप को रवाना किया। उन्होंने इसे असम के बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। इस पहल से स्थानीय किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
चार विरासत उत्पादों को मिला GI टैग
राज्य सरकार ने हाल ही में असम के चार विरासत उत्पादों — बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हथकरघा, बह शिल्प (बांस शिल्प) और देओरी हथकरघा उत्पाद — को GI टैग प्रदान किया है। गौरतलब है कि GI टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति और प्रामाणिकता को कानूनी संरक्षण देता है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में उसका मूल्य बढ़ता है।
सरकार की निर्यात रणनीति
मुख्यमंत्री के अनुसार, असम के स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्रमुख रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की आजीविका को सुदृढ़ करना, पारंपरिक शिल्प और संस्कृति का संरक्षण करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम की आर्थिक पहचान को और सशक्त बनाना है। राज्य सरकार कृषि, हथकरघा और पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग एवं बौद्धिक संपदा संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग और सरकारी प्रोत्साहन के संयोजन से असम के उत्पादों की निर्यात संभावनाएं आने वाले वर्षों में और विस्तृत होंगी। यह पहल उत्तर-पूर्व भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।