10 अगस्त 2026
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असम के GI-टैग उत्पाद वैश्विक बाजारों में छाए, हिमंता बिस्वा सरमा ने बताई निर्यात रणनीति

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असम के GI-टैग उत्पाद वैश्विक बाजारों में छाए, हिमंता बिस्वा सरमा ने बताई निर्यात रणनीति

सारांश

असम के GI-टैग उत्पाद — तेजपुर लीची से लेकर बिहू पेपा तक — अब वैश्विक बाजारों में दस्तक दे रहे हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सिंगापुर को पहली लीची खेप रवाना कर यह साबित किया कि असम की सांस्कृतिक विरासत अब आर्थिक ताकत भी बन रही है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 22 जून 2026 को कहा कि असम के उत्पाद वैश्विक बाजारों में तेज़ी से पहचान बना रहे हैं।
गुवाहाटी से सिंगापुर के लिए GI-टैग तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप इसी माह रवाना हुई।
असम के चार विरासत उत्पादों — बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हथकरघा, बह शिल्प और देओरी हथकरघा — को हाल ही में GI टैग प्रदान किया गया।
राज्य सरकार कृषि, हथकरघा और पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग एवं बौद्धिक संपदा संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय किसानों और शिल्पकारों की आजीविका को मज़बूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम की आर्थिक पहचान सशक्त बनाना है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 22 जून 2026 को कहा कि राज्य के स्वदेशी और पारंपरिक उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेज़ी से अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं और विभिन्न महाद्वीपों तक असम की सांस्कृतिक एवं कृषि विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात को विशेष प्राथमिकता दे रही है।

मुख्यमंत्री का बयान

सरमा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'असम में बने उत्पाद अब पूरी दुनिया में पसंद किए जा रहे हैं। राज्य के विशिष्ट उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेज़ी से अपनी जगह बना रहे हैं और विभिन्न महाद्वीपों तक असम की पहचान पहुंचा रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा, 'हम भविष्य में असम के और अधिक उत्कृष्ट उत्पादों को विश्व बाजार तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'

तेजपुर लीची की ऐतिहासिक खेप

इसी माह सरमा ने गुवाहाटी से सिंगापुर के लिए GI-टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप को रवाना किया। उन्होंने इसे असम के बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। इस पहल से स्थानीय किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

चार विरासत उत्पादों को मिला GI टैग

राज्य सरकार ने हाल ही में असम के चार विरासत उत्पादोंबिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हथकरघा, बह शिल्प (बांस शिल्प) और देओरी हथकरघा उत्पाद — को GI टैग प्रदान किया है। गौरतलब है कि GI टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति और प्रामाणिकता को कानूनी संरक्षण देता है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में उसका मूल्य बढ़ता है।

सरकार की निर्यात रणनीति

मुख्यमंत्री के अनुसार, असम के स्वदेशी और पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्रमुख रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों की आजीविका को सुदृढ़ करना, पारंपरिक शिल्प और संस्कृति का संरक्षण करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम की आर्थिक पहचान को और सशक्त बनाना है। राज्य सरकार कृषि, हथकरघा और पारंपरिक उत्पादों की ब्रांडिंग एवं बौद्धिक संपदा संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।

आगे क्या

विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग और सरकारी प्रोत्साहन के संयोजन से असम के उत्पादों की निर्यात संभावनाएं आने वाले वर्षों में और विस्तृत होंगी। यह पहल उत्तर-पूर्व भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा मात्रा और निरंतरता की होगी — सिंगापुर को एक खेप भेजना शुरुआत है, नीति की सफलता नहीं। उत्तर-पूर्व के उत्पादों को अक्सर लॉजिस्टिक्स लागत और कोल्ड-चेन अवसंरचना की कमी के कारण प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण में संघर्ष करना पड़ता है — ये बाधाएं GI टैग से नहीं हटतीं। चार विरासत उत्पादों को GI टैग मिलना सांस्कृतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, परंतु जब तक किसानों और बुनकरों तक वास्तविक मूल्य-वृद्धि नहीं पहुंचती, यह कदम कागज़ी उपलब्धि ही रहेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के किन उत्पादों को हाल ही में GI टैग मिला है?
हाल ही में असम के चार विरासत उत्पादों — बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हथकरघा, बह शिल्प (बांस शिल्प) और देओरी हथकरघा उत्पादों — को GI टैग प्रदान किया गया है। GI टैग इन उत्पादों की प्रामाणिकता को कानूनी संरक्षण देता है और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनका मूल्य बढ़ाता है।
तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप कहाँ भेजी गई?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी से सिंगापुर के लिए GI-टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप इसी माह रवाना की। इसे असम के बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया गया है।
असम सरकार की निर्यात रणनीति का क्या उद्देश्य है?
असम सरकार का उद्देश्य स्थानीय लोगों की आजीविका को सुदृढ़ करना, पारंपरिक शिल्प और संस्कृति का संरक्षण करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असम की आर्थिक पहचान को सशक्त बनाना है। इसके लिए GI टैग, ब्रांडिंग और बौद्धिक संपदा संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है।
GI टैग से असम के उत्पादों को क्या फायदा होगा?
GI टैग किसी उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति और प्रामाणिकता को कानूनी मान्यता देता है, जिससे नकल या मिलावट पर रोक लगती है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में उत्पाद का मूल्य बढ़ता है और किसानों व शिल्पकारों को बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने असम के उत्पादों के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि असम में बने उत्पाद अब पूरी दुनिया में पसंद किए जा रहे हैं और राज्य सरकार भविष्य में और अधिक उत्कृष्ट उत्पादों को विश्व बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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