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असम के 4 उत्पादों को जीआई टैग: बिहू पेपा, कार्बी हैंडलूम समेत, सीएम सरमा बोले — कारीगरों को मिलेंगे नए आर्थिक अवसर

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असम के 4 उत्पादों को जीआई टैग: बिहू पेपा, कार्बी हैंडलूम समेत, सीएम सरमा बोले — कारीगरों को मिलेंगे नए आर्थिक अवसर

सारांश

असम के चार पारंपरिक उत्पादों — बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हैंडलूम, बाह शिल्पा और देओरी हैंडलूम — को जीआई टैग मिला है। मुख्यमंत्री सरमा ने इसे कारीगरों की आजीविका और राज्य की सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम बताया।

मुख्य बातें

असम के 4 उत्पादों — बिहू पेपा , कार्बी आंगलोंग हैंडलूम , बाह शिल्पा और देओरी हैंडलूम — को आधिकारिक जीआई टैग प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 15 जून को एक्स पर इसकी जानकारी दी और इसे विरासत संरक्षण की दिशा में 'बड़ा बढ़ावा' बताया।
जीआई टैग उत्पादों की प्रामाणिकता की कानूनी रक्षा करेगा और असली उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाएगा।
नाबार्ड असम के पारंपरिक उत्पादों के जीआई प्रमाणन में सक्रिय सहयोग दे रहा है।
यह मान्यता ऐसे समय में मिली है जब असम के विरासत उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में तेज़ी से पहचान बना रहे हैं।

असम के चार पारंपरिक उत्पादोंबिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हैंडलूम, बाह शिल्पा (असमिया बांस शिल्प) और देओरी हैंडलूम — को आधिकारिक तौर पर ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। 15 जून को इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।

किन उत्पादों को मिला जीआई टैग

बिहू पेपा भैंस के सींग से निर्मित एक पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जो असम के प्रसिद्ध बिहू उत्सवों की पहचान है। कार्बी आंगलोंग हैंडलूम कार्बी समुदाय की सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि देओरी हैंडलूम उत्पाद देओरी जनजाति की विशिष्ट वस्त्र विरासत को सहेजते हैं।

बाह शिल्पा यानी असमिया बांस शिल्प, राज्य के बांस कारीगरों के उस परंपरागत कौशल को रेखांकित करता है जो पीढ़ियों से असमिया जनजीवन और सांस्कृतिक अनुष्ठानों का अभिन्न अंग रहा है।

मुख्यमंत्री सरमा की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह जीआई सर्टिफिकेशन असम की विरासत को बचाने के प्रयासों को 'एक और बड़ा बढ़ावा' है। उन्होंने कहा कि ये टैग इन उत्पादों की प्रामाणिकता की रक्षा करेंगे और कारीगरों तथा पारंपरिक उत्पादकों के लिए नए आर्थिक अवसर सुनिश्चित करेंगे।

सरमा के अनुसार, यह मान्यता ऐसे समय में मिली है जब असम के विरासत उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में तेज़ी से पहचान मिल रही है। जीआई प्रमाणन यह सुनिश्चित करेगा कि केवल असली उत्पाद ही उनके संबंधित नामों से बेचे जाएँ और वास्तविक उत्पादकों को उचित मूल्य प्राप्त हो।

जीआई टैग का महत्व

जीआई टैग मुख्य रूप से किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति, उसकी खूबियों और प्रतिष्ठा के आधार पर दिया जाता है। यह टैग न केवल नकली उत्पादों पर रोक लगाता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनाता है। गौरतलब है कि नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) जैसी संस्थाएँ असम के पारंपरिक उत्पादों के लिए जीआई मान्यता दिलाने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

आम जनता और कारीगरों पर असर

इन चार उत्पादों को जीआई टैग मिलने से असम के बुनकर, बांस शिल्पकार और पारंपरिक वाद्य निर्माता अपने उत्पादों को कानूनी संरक्षण के साथ बाज़ार में उतार सकेंगे। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बड़े पैमाने पर मशीन-निर्मित नकल उत्पाद इन कारीगरों की आजीविका को प्रभावित कर रहे थे।

आगे की राह

इन चार नए जीआई टैग के साथ असम अपनी अनूठी सांस्कृतिक और कारीगर विरासत के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और मज़बूत करेगा। परंपरा पर आधारित आर्थिक विकास के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, जो राज्य के ग्रामीण और जनजातीय समुदायों को दीर्घकालिक लाभ पहुँचा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रमाणन के बाद शुरू होती है — यानी इन टैग को बाज़ार में वास्तविक आय में बदलना। देश में दर्जनों जीआई-प्रमाणित उत्पाद ऐसे हैं जो मान्यता मिलने के बावजूद वैश्विक बाज़ार में अपनी जगह नहीं बना पाए, क्योंकि निर्यात संपर्क, पैकेजिंग और विपणन का ढाँचा कमज़ोर रहा। नाबार्ड की सक्रिय भागीदारी उत्साहजनक है, परंतु कार्बी और देओरी जैसे जनजातीय समुदायों के कारीगरों तक इस आर्थिक लाभ की वास्तविक पहुँच सुनिश्चित करना ही इस पहल की सफलता की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के किन चार उत्पादों को जीआई टैग मिला है?
असम के बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हैंडलूम, बाह शिल्पा (असमिया बांस शिल्प) और देओरी हैंडलूम उत्पादों को आधिकारिक जीआई सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। ये चारों उत्पाद असम की विभिन्न जनजातीय और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जीआई टैग से असम के कारीगरों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की प्रामाणिकता कानूनी रूप से सुरक्षित हो जाती है, जिससे नकली उत्पादों पर रोक लगती है। इससे वास्तविक कारीगरों और उत्पादकों को उनके उत्पादों का उचित बाज़ार मूल्य मिलेगा और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच आसान होगी।
बिहू पेपा क्या है और यह क्यों खास है?
बिहू पेपा भैंस के सींग से बना एक पारंपरिक असमिया वाद्य यंत्र है, जो असम के प्रसिद्ध बिहू उत्सवों का अभिन्न हिस्सा है। इसे जीआई टैग मिलने से इस अनूठे वाद्य यंत्र की पहचान और इसे बनाने वाले कारीगरों की आजीविका दोनों सुरक्षित होंगी।
असम के जीआई टैग प्रयासों में नाबार्ड की क्या भूमिका है?
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) असम के पारंपरिक उत्पादों के लिए जीआई मान्यता हासिल करने के प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है। यह संस्था दस्तावेज़ीकरण, आवेदन प्रक्रिया और स्थानीय उत्पादकों की क्षमता निर्माण में मदद करती है।
कार्बी आंगलोंग हैंडलूम और देओरी हैंडलूम में क्या अंतर है?
कार्बी आंगलोंग हैंडलूम असम के कार्बी समुदाय की पारंपरिक बुनाई शैली और डिज़ाइन को दर्शाता है, जबकि देओरी हैंडलूम उत्पाद देओरी जनजाति की विशिष्ट वस्त्र विरासत और बुनाई परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों को अलग-अलग जीआई टैग मिले हैं, जो उनकी स्वतंत्र सांस्कृतिक पहचान को मान्यता देते हैं।
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