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असम के 4 उत्पादों को जीआई टैग: कार्बी हैंडलूम से बिहू पेपा तक, नाबार्ड समर्थित 12 उत्पाद अब सूची में

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असम के 4 उत्पादों को जीआई टैग: कार्बी हैंडलूम से बिहू पेपा तक, नाबार्ड समर्थित 12 उत्पाद अब सूची में

सारांश

असम के चार पारंपरिक उत्पादों — कार्बी आंगलोंग हैंडलूम, बिहू पेपा, बांस शिल्प और देउरी हैंडलूम — को जीआई टैग मिला है। नाबार्ड के सहयोग से अब राज्य के 12 उत्पाद जीआई-प्रमाणित हो चुके हैं, जिससे हजारों ग्रामीण कारीगरों को बेहतर बाज़ार और कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

भारत सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने असम के 4 उत्पादों को जीआई टैग प्रदान किया।
जीआई टैग पाने वाले उत्पाद: कार्बी आंगलोंग हैंडलूम , असम बिहू पेपा , असम बांस शिल्प और देउरी हैंडलूम ।
नाबार्ड के सहयोग से अब असम के 12 उत्पाद जीआई-प्रमाणित हो चुके हैं।
जीआई प्रमाणीकरण से राज्य के हजारों ग्रामीण कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को बेहतर बाज़ार पहुँच और कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
नाबार्ड ब्रांडिंग, मार्केटिंग और वैल्यू चेन विकास पर केंद्रित इकोसिस्टम-आधारित रणनीति पर काम कर रहा है।

भारत सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने असम के चार पारंपरिक सांस्कृतिक और कारीगरी उत्पादों को प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग प्रदान किया है। 14 जून 2026 को अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह मान्यता राज्य की आदिवासी और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के साथ-साथ ग्रामीण कारीगरों की आजीविका को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

किन उत्पादों को मिला जीआई टैग

इस बार जीआई टैग पाने वाले चार उत्पाद हैं — कार्बी आंगलोंग हैंडलूम उत्पाद, असम बिहू पेपा, असम बांस शिल्प और देउरी हैंडलूम उत्पाद। ये सभी उत्पाद असम की बहुरंगी जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और पीढ़ियों से संरक्षित कारीगरी कौशल के जीवंत प्रतीक हैं। गौरतलब है कि बिहू पेपा असम के प्रसिद्ध बिहू उत्सव में बजाया जाने वाला पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जो भैंस के सींग से बनता है।

नाबार्ड की भूमिका और उपलब्धि

इस पंजीकरण प्रक्रिया में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने सक्रिय सहयोग और तकनीकी मदद प्रदान की। इस नई मान्यता के साथ, नाबार्ड द्वारा समर्थित जीआई-प्रमाणित उत्पादों की कुल संख्या अब 12 हो गई है — जो विरासत-आधारित ग्रामीण आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

नाबार्ड असम के मुख्य महाप्रबंधक लोकेन दास ने कहा कि ये प्रमाणपत्र न केवल इन उत्पादों की पहचान और प्रामाणिकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उनकी व्यावसायिक क्षमता को भी काफी बढ़ाते हैं।

कारीगरों और बुनकरों पर असर

अधिकारियों के अनुसार, जीआई प्रमाणीकरण से अनधिकृत नकल और दुरुपयोग के विरुद्ध कानूनी संरक्षण सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही राज्य भर के हजारों ग्रामीण कारीगरों, शिल्पकारों और बुनकरों को बेहतर बाज़ार पहुँच, उचित मूल्य और व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है। ये उत्पाद ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक ढाँचे से गहराई से जुड़े हैं और इनसे नए आर्थिक अवसर उत्पन्न होंगे।

आगे की रणनीति

दास ने बताया कि नाबार्ड अब जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम-आधारित रणनीति पर काम कर रहा है। इसका फोकस केवल पहचान दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मज़बूत वैल्यू चेन विकसित करना है — जिसमें ब्रांडिंग, मार्केटिंग, क्षमता निर्माण, बाज़ार से जुड़ाव और उद्यम विकास शामिल होंगे। उनके अनुसार, मुख्य विज़न जीआई-प्रमाणित उत्पादों को टिकाऊ, बड़े पैमाने पर विस्तार योग्य और लाभकारी आजीविका के अवसरों में बदलना है, साथ ही असम की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए समावेशी ग्रामीण विकास को गति देना है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें पारंपरिक शिल्प को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने के लिए नीतिगत प्रयास तेज़ कर रही हैं। असम के जीआई पोर्टफोलियो का यह विस्तार ग्रामीण आर्थिक विकास के लिए सांस्कृतिक संपदा के सदुपयोग की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रमाणपत्र मिलने के बाद शुरू होती है। अनेक राज्यों के अनुभव बताते हैं कि जीआई पंजीकरण के बाद भी बाज़ार तक पहुँच और उचित मूल्य सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। नाबार्ड की इकोसिस्टम-आधारित रणनीति सही दिशा में है, लेकिन वैल्यू चेन निर्माण और क्षमता विकास के लिए दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धता और ज़मीनी क्रियान्वयन की ज़रूरत होगी। असम की आदिवासी और हस्तशिल्प परंपराएँ जितनी समृद्ध हैं, उतनी ही कमज़ोर भी हैं — नई पीढ़ी के कारीगरों को इस विरासत से जोड़े रखना इस पूरी पहल की दीर्घकालिक सफलता की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के किन 4 उत्पादों को जीआई टैग मिला है?
कार्बी आंगलोंग हैंडलूम उत्पाद, असम बिहू पेपा, असम बांस शिल्प और देउरी हैंडलूम उत्पाद — इन चारों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग प्रदान किया गया है। ये सभी असम की जनजातीय और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
जीआई टैग से असम के कारीगरों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग से कारीगरों को अनधिकृत नकल के विरुद्ध कानूनी सुरक्षा मिलेगी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उनके उत्पादों की पहचान तथा मूल्य दोनों बढ़ेंगे। इससे हजारों ग्रामीण बुनकरों और शिल्पकारों के लिए नए आर्थिक अवसर खुलने की उम्मीद है।
नाबार्ड का असम के जीआई उत्पादों में क्या योगदान है?
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने इन चारों उत्पादों के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग दिया है। इस उपलब्धि के साथ नाबार्ड द्वारा समर्थित जीआई-प्रमाणित उत्पादों की कुल संख्या 12 हो गई है।
असम बिहू पेपा क्या है और इसे जीआई टैग क्यों मिला?
बिहू पेपा असम के प्रसिद्ध बिहू उत्सव में बजाया जाने वाला पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जो भैंस के सींग से बनाया जाता है। इसे जीआई टैग इसलिए दिया गया ताकि इस अनूठी लोक कला की प्रामाणिकता सुरक्षित रहे और इसके कारीगरों को उचित पहचान व बाज़ार मिल सके।
नाबार्ड जीआई उत्पादों के लिए आगे क्या योजना बना रहा है?
नाबार्ड एक इकोसिस्टम-आधारित रणनीति पर काम कर रहा है जिसमें ब्रांडिंग, मार्केटिंग, क्षमता निर्माण, बाज़ार से जुड़ाव और उद्यम विकास शामिल हैं। लक्ष्य जीआई-प्रमाणित उत्पादों को टिकाऊ और लाभकारी आजीविका के अवसरों में बदलना है।
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