असम के 4 उत्पादों को जीआई टैग: कार्बी हैंडलूम से बिहू पेपा तक, नाबार्ड समर्थित 12 उत्पाद अब सूची में
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने असम के चार पारंपरिक सांस्कृतिक और कारीगरी उत्पादों को प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग प्रदान किया है। 14 जून 2026 को अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह मान्यता राज्य की आदिवासी और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के साथ-साथ ग्रामीण कारीगरों की आजीविका को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
किन उत्पादों को मिला जीआई टैग
इस बार जीआई टैग पाने वाले चार उत्पाद हैं — कार्बी आंगलोंग हैंडलूम उत्पाद, असम बिहू पेपा, असम बांस शिल्प और देउरी हैंडलूम उत्पाद। ये सभी उत्पाद असम की बहुरंगी जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और पीढ़ियों से संरक्षित कारीगरी कौशल के जीवंत प्रतीक हैं। गौरतलब है कि बिहू पेपा असम के प्रसिद्ध बिहू उत्सव में बजाया जाने वाला पारंपरिक वाद्य यंत्र है, जो भैंस के सींग से बनता है।
नाबार्ड की भूमिका और उपलब्धि
इस पंजीकरण प्रक्रिया में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने सक्रिय सहयोग और तकनीकी मदद प्रदान की। इस नई मान्यता के साथ, नाबार्ड द्वारा समर्थित जीआई-प्रमाणित उत्पादों की कुल संख्या अब 12 हो गई है — जो विरासत-आधारित ग्रामीण आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
नाबार्ड असम के मुख्य महाप्रबंधक लोकेन दास ने कहा कि ये प्रमाणपत्र न केवल इन उत्पादों की पहचान और प्रामाणिकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उनकी व्यावसायिक क्षमता को भी काफी बढ़ाते हैं।
कारीगरों और बुनकरों पर असर
अधिकारियों के अनुसार, जीआई प्रमाणीकरण से अनधिकृत नकल और दुरुपयोग के विरुद्ध कानूनी संरक्षण सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही राज्य भर के हजारों ग्रामीण कारीगरों, शिल्पकारों और बुनकरों को बेहतर बाज़ार पहुँच, उचित मूल्य और व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है। ये उत्पाद ग्रामीण समुदायों के सामाजिक-आर्थिक ढाँचे से गहराई से जुड़े हैं और इनसे नए आर्थिक अवसर उत्पन्न होंगे।
आगे की रणनीति
दास ने बताया कि नाबार्ड अब जीआई उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक इकोसिस्टम-आधारित रणनीति पर काम कर रहा है। इसका फोकस केवल पहचान दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मज़बूत वैल्यू चेन विकसित करना है — जिसमें ब्रांडिंग, मार्केटिंग, क्षमता निर्माण, बाज़ार से जुड़ाव और उद्यम विकास शामिल होंगे। उनके अनुसार, मुख्य विज़न जीआई-प्रमाणित उत्पादों को टिकाऊ, बड़े पैमाने पर विस्तार योग्य और लाभकारी आजीविका के अवसरों में बदलना है, साथ ही असम की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए समावेशी ग्रामीण विकास को गति देना है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें पारंपरिक शिल्प को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने के लिए नीतिगत प्रयास तेज़ कर रही हैं। असम के जीआई पोर्टफोलियो का यह विस्तार ग्रामीण आर्थिक विकास के लिए सांस्कृतिक संपदा के सदुपयोग की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।