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तमिलनाडु के 10 कृषि उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की पहल, ₹30 लाख का आवंटन

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तमिलनाडु के 10 कृषि उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की पहल, ₹30 लाख का आवंटन

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने 10 पारंपरिक कृषि उत्पादों के लिए जीआई टैग हासिल करने की दिशा में ₹30 लाख की पहल की है। कांचीपुरम मिर्च से ऊटी लहसुन तक — यह कदम स्थानीय किसानों को बेहतर बाज़ार मूल्य और कानूनी सुरक्षा दिलाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर.
विनोद ने 1 सितंबर 2026 को 10 कृषि उत्पादों के लिए जीआई टैग पंजीकरण की घोषणा की।
पंजीकरण प्रक्रिया के लिए ₹30 लाख आवंटित; इसमें दस्तावेज़ीकरण, शोध और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
चिह्नित उत्पादों में ऊटी लहसुन , कांचीपुरम परिमिलागई , मनाप्पराई बैंगन और कुड्डालोर वेट्टीवर समेत 10 उत्पाद शामिल हैं।
सात जिलों में ₹11.64 करोड़ की लागत से 9 बीज भंडारण गोदाम बनाए जाएंगे।
सूखा-प्रभावित 6 जिलों में तीखी मिर्च की प्रायोगिक खेती के लिए ₹60 लाख का कार्यक्रम घोषित।

तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर. विनोद ने 1 सितंबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार अपनी विशिष्ट पहचान और भौगोलिक जड़ों के लिए प्रसिद्ध 10 कृषि उत्पादों के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग हासिल करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस पहल के लिए सरकार ने दस्तावेज़ीकरण, शोध और पंजीकरण प्रक्रियाओं हेतु ₹30 लाख आवंटित किए हैं।

किन उत्पादों को मिलेगा जीआई दर्जा

जीआई पंजीकरण के लिए चिह्नित 10 उत्पाद हैं — कांचीपुरम परिमिलागई, नागापट्टिनम का पोय्यूर कथिरी, चिदंबरम ब्लैक ग्राम, करुमांदुरई कडुक्कई, थिरुवैयारु इलाई वाज़हाई, एरैयुर करुनाई किलांगु, कुड्डालोर वेट्टीवर, मनाप्पराई बैंगन, ऊटी लहसुन और जव्वधु पेई तिल

ये सभी उत्पाद तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में पारंपरिक रूप से उगाए जाते हैं और अपनी विशेष गुणवत्ता, स्वाद तथा उत्पादन पद्धतियों के लिए जाने जाते हैं। जीआई टैग मिलने के बाद इनके नामों के दुरुपयोग को कानूनी संरक्षण मिलेगा।

जीआई टैग से किसानों को क्या फायदा

भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग किसी उत्पाद को उसके विशेष भौगोलिक उद्गम से जोड़ता है और उसकी प्रतिष्ठा, विशेषताओं तथा उत्पादन विधियों को कानूनी मान्यता देता है। इस मान्यता से स्थानीय किसानों और उत्पादक समूहों को बाज़ार में बेहतर मूल्य, मज़बूत ब्रांडिंग और नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलती है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जीआई-पंजीकृत उत्पादों की माँग और निर्यात क्षमता तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि तमिलनाडु पहले से ही कांजीवरम सिल्क और मदुरई मल्ली जैसे उत्पादों के लिए जीआई दर्जा हासिल कर चुका है।

बीज भंडारण गोदामों का निर्माण

मंत्री विनोद ने इसके साथ ही सात जिलों में ₹11.64 करोड़ की लागत से नौ बीज भंडारण गोदामों के निर्माण की भी घोषणा की। इन सुविधाओं का उद्देश्य किसानों से प्राप्त बीजों की गुणवत्ता, अंकुरण क्षमता और उर्वरता को संरक्षित करना है।

तंजावुर जिले के कट्टुथोट्टम और पट्टुकोट्टई में दो गोदाम स्थापित होंगे। शेष सात गोदाम मयिलादुथुराई के नागमंगलम, पुदुक्कोट्टई के वेल्लालाविदुथि, धर्मपुरी के पप्पारापट्टी, सेलम के डेनिशपेट, तिरुप्पुर के मदाथुकुलम और तिरुवरूर जिले के कांचीकुडिकाडु व कीरंधी में बनाए जाएंगे।

तीखी मिर्च की प्रायोगिक खेती को बढ़ावा

कृषि मंत्री ने सिंचाई व्यवस्था में तीखी मिर्च की किस्मों की प्रायोगिक खेती के लिए ₹60 लाख के कार्यक्रम की भी घोषणा की। यह पहल विरुधुनगर, थूथुकुडी, शिवगंगा, रामनाथपुरम, तेनकासी और तिरुनेलवेली जिलों में लागू होगी — वे क्षेत्र जहाँ अपर्याप्त वर्षा अक्सर मिर्च उत्पादन को प्रभावित करती है।

परीक्षणों से उपयुक्त किस्मों और खेती के तरीकों की पहचान होने की उम्मीद है, जिससे किसान अनियमित वर्षा के बावजूद उत्पादकता बनाए रख सकेंगे। आने वाले महीनों में इन तीनों पहलों के क्रियान्वयन पर नज़र रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पंजीकरण के बाद बाज़ार तक पहुँच और मूल्य-श्रृंखला विकास कितना होगा। तमिलनाडु के पूर्व जीआई उत्पादों का अनुभव बताता है कि टैग मिलने के बाद भी किसानों को प्रीमियम मूल्य दिलाने के लिए ठोस विपणन तंत्र की ज़रूरत होती है। ₹30 लाख का आवंटन दस्तावेज़ीकरण के लिए पर्याप्त हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण और निर्यात संवर्धन के लिए यह राशि सीमित है। बीज गोदाम और मिर्च प्रायोगिक खेती जैसी सहयोगी घोषणाएँ दर्शाती हैं कि राज्य एक समग्र कृषि नीति की ओर बढ़ रहा है — क्रियान्वयन की गति ही तय करेगी कि यह इरादा ज़मीन पर उतरता है या नहीं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु किन 10 कृषि उत्पादों के लिए जीआई टैग लेना चाहता है?
तमिलनाडु सरकार ने कांचीपुरम परिमिलागई, पोय्यूर कथिरी (नागापट्टिनम), चिदंबरम ब्लैक ग्राम, करुमांदुरई कडुक्कई, थिरुवैयारु इलाई वाज़हाई, एरैयुर करुनाई किलांगु, कुड्डालोर वेट्टीवर, मनाप्पराई बैंगन, ऊटी लहसुन और जव्वधु पेई तिल को जीआई पंजीकरण के लिए चिह्नित किया है। ये सभी उत्पाद राज्य के विभिन्न जिलों की पारंपरिक पहचान से जुड़े हैं।
जीआई टैग से किसानों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग मिलने से किसानों को बाज़ार में उनके उत्पाद की विशिष्ट पहचान मिलती है, जिससे बेहतर मूल्य प्राप्त करना संभव होता है। साथ ही उत्पाद के नाम के दुरुपयोग को कानूनी रूप से रोका जा सकता है और निर्यात के अवसर बढ़ते हैं।
तमिलनाडु सरकार ने जीआई टैग के लिए कितना बजट रखा है?
राज्य सरकार ने जीआई पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़ीकरण, अनुसंधान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं हेतु ₹30 लाख आवंटित किए हैं। यह राशि कृषि मंत्री आर. विनोद ने 1 सितंबर 2026 को घोषित की।
तमिलनाडु में नए बीज भंडारण गोदाम कहाँ बनेंगे?
₹11.64 करोड़ की लागत से सात जिलों में नौ बीज भंडारण गोदाम बनाए जाएंगे — तंजावुर (कट्टुथोट्टम व पट्टुकोट्टई), मयिलादुथुराई, पुदुक्कोट्टई, धर्मपुरी, सेलम, तिरुप्पुर और तिरुवरूर। इनका उद्देश्य बीजों की गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता को संरक्षित करना है।
तमिलनाडु में तीखी मिर्च की प्रायोगिक खेती की पहल क्या है?
₹60 लाख के इस कार्यक्रम के तहत विरुधुनगर, थूथुकुडी, शिवगंगा, रामनाथपुरम, तेनकासी और तिरुनेलवेली जिलों में सिंचाई व्यवस्था में तीखी मिर्च की उपयुक्त किस्मों का परीक्षण किया जाएगा। इन जिलों में अपर्याप्त वर्षा के कारण मिर्च उत्पादन प्रभावित होता है, और परीक्षण से बेहतर किस्मों की पहचान होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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