30 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश की 12 उद्यानिकी फसलों को जीआई टैग, देश में संभवतः पहली बार किसी राज्य को इतने जीआई टैग एकसाथ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश की 12 उद्यानिकी फसलों को जीआई टैग, देश में संभवतः पहली बार किसी राज्य को इतने जीआई टैग एकसाथ

सारांश

मध्य प्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है — 12 फसलों को जीआई टैग, 7 और के प्रस्ताव प्रक्रियाधीन। 28 लाख हेक्टेयर से 30 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य और कृषक कल्याण वर्ष 2026 के बीच यह उपलब्धि किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश की 12 उद्यानिकी फसलों को जीआई टैग मिला — संभवतः देश में किसी एक राज्य के लिए यह पहली बार है।
जीआई टैग प्राप्त फसलों में नूरजहाँ आम (आलीराजपुर) , बुरहानपुर का केला , गुना का धनिया और छतरपुर का पान प्रमुख हैं।
7 और फसलों — उज्जैन की इमली, मालवा का सफेद प्याज, मंदसौर का देशी जीरा सहित — के लिए जीआई टैग हेतु प्रस्ताव भेजे गए हैं।
राज्य में उद्यानिकी का रकबा फिलहाल 28 लाख हेक्टेयर ; 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर करने की कार्ययोजना।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए उद्यानिकी खेती से जुड़ने का आह्वान किया।
राज्य में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

मध्य प्रदेश ने उद्यानिकी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है — राज्य की 12 उद्यानिकी फसलों को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त हो चुका है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, संभवतः यह देश में पहला अवसर है जब किसी एक राज्य की इतनी अधिक उद्यानिकी फसलों को एकसाथ जीआई टैग मिला हो। राज्य में उद्यानिकी फसलों की पैदावार और पहचान बढ़ाने के प्रयास निरंतर जारी हैं।

किन फसलों को मिला जीआई टैग

जीआई टैग प्राप्त करने वाली फसलों में गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बैंगन, बैतूल गजरिया आम, खरगौर की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर गुड़, जबलपुर सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहाँ आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं। ये सभी फसलें अपने क्षेत्र विशेष की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी हैं।

और फसलों के लिए प्रस्ताव प्रक्रियाधीन

राज्य सरकार ने अतिरिक्त फसलों के लिए भी जीआई टैग दिलाने हेतु प्रस्ताव भेजे हैं। इनमें उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोक नगर की खिरनी शामिल हैं। यदि ये प्रस्ताव स्वीकृत होते हैं, तो जीआई टैग प्राप्त मध्य प्रदेश की उद्यानिकी फसलों की संख्या और बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का किसानों से आह्वान

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ उन्हें उद्यानिकी फसलों की खेती से जुड़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि जीआई टैग से इन फसलों को न केवल विशिष्ट पहचान मिलती है, बल्कि बाज़ार में बेहतर मूल्य भी सुनिश्चित होता है।

रकबा विस्तार और कृषक कल्याण वर्ष

फिलहाल मध्य प्रदेश में 28 लाख हेक्टेयर भूमि पर उद्यानिकी फसलों की खेती हो रही है। राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक इसे 30 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने की कार्ययोजना तैयार की है। गौरतलब है कि राज्य में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों को सुविधाएँ बढ़ाने और फसल का उचित मूल्य दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जीआई टैग की यह उपलब्धि इसी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।

आगे की राह

जीआई टैग मिलने से इन फसलों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में प्रीमियम मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उद्यानिकी क्षेत्र को मुख्यधारा की खेती के बराबर लाने के लिए नीतिगत स्तर पर सक्रिय है। आने वाले महीनों में प्रस्तावित फसलों पर जीआई टैग का निर्णय इस दिशा में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके बाद शुरू होती है — टैग मिलने से बाज़ार में प्रीमियम मूल्य अपने आप नहीं मिलता, उसके लिए ब्रांडिंग, निर्यात नेटवर्क और गुणवत्ता नियंत्रण की ज़रूरत होती है। मध्य प्रदेश के पास दार्जिलिंग चाय या बनारसी साड़ी जैसे जीआई टैग की सफलता से सीखने का अवसर है, जहाँ टैग के साथ-साथ संस्थागत समर्थन ने असली बदलाव किया। 28 लाख हेक्टेयर से 30 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर रकबा बढ़ाना और किसानों की आय दोगुनी करना दो अलग-अलग चुनौतियाँ हैं — यह अंतर नीति-निर्माताओं को स्पष्ट रखना होगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश की किन 12 उद्यानिकी फसलों को जीआई टैग मिला है?
जीआई टैग प्राप्त फसलों में गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बैंगन, बैतूल गजरिया आम, खरगौर की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर गुड़, जबलपुर सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहाँ आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल हैं।
जीआई टैग से मध्य प्रदेश के किसानों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक उत्पत्ति की कानूनी पहचान देता है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उसे प्रीमियम मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है। यह नकली या मिलावटी उत्पादों से भी सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे मूल उत्पादक किसानों को उचित आय मिल सकती है।
मध्य प्रदेश में उद्यानिकी फसलों का रकबा कितना है और लक्ष्य क्या है?
फिलहाल राज्य में 28 लाख हेक्टेयर भूमि पर उद्यानिकी फसलों की खेती हो रही है। राज्य सरकार ने 2030 तक इसे 30 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने की कार्ययोजना तैयार की है।
मध्य प्रदेश की और कौन-सी फसलों के लिए जीआई टैग का प्रस्ताव भेजा गया है?
उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी और अशोक नगर की खिरनी के लिए जीआई टैग हेतु प्रस्ताव भेजे गए हैं। इन पर निर्णय प्रक्रियाधीन है।
कृषक कल्याण वर्ष 2026 क्या है?
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया है। इसके तहत किसानों को खेती की सुविधाएँ बढ़ाने, फसल का उचित मूल्य दिलाने और उद्यानिकी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 6 दिन पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले