बुरहानपुर केले को मिला जीआई टैग: मध्य प्रदेश के 18,640 किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में उगाए जाने वाले प्रसिद्ध बुरहानपुर केले को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्राप्त हो गया है, जो जिले के 18,640 केला किसानों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। इस टैग के मिलने से बुरहानपुर के केले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में एक संरक्षित पहचान मिलेगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है।
जीआई टैग के लिए कैसे हुई पहल
जनवरी 2024 में खकनार कृषि विकास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने बुरहानपुर केले के लिए जीआई टैग हेतु आवेदन किया था। यह आवेदन जिले के केला उत्पादकों की सामूहिक पहल का परिणाम था, जो लंबे समय से अपनी विशिष्ट उपज को वैधानिक सुरक्षा दिलाने की कोशिश में लगे थे। गौरतलब है कि बुरहानपुर को मध्य प्रदेश में सर्वाधिक केला उत्पादन करने वाले जिले के रूप में जाना जाता है और यहाँ प्रदेश की एकमात्र केला मंडी भी स्थित है।
उत्पादन का विशाल आधार
बुरहानपुर जिले में 26,120 हेक्टेयर भूमि पर केले की खेती होती है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 18,28,400 मीट्रिक टन केले का उत्पादन होता है। यहाँ के केले अपनी विशिष्ट मिठास, स्वाद और गुणवत्ता के कारण पूरे देश में लोकप्रिय हैं। विशेष रूप से उत्तर भारत में इनकी माँग काफी अधिक रहती है और खाड़ी देशों में भी इनका निर्यात होता है।
किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर
जीआई टैग मिलने के बाद बुरहानपुर केले की ब्रांड वैल्यू में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे नकली या मिलते-जुलते उत्पादों से इस विशेष किस्म की कानूनी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जीआई टैग निर्यात के नए अवसर खोलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और कृषि आधारित उद्योगों को मज़बूती मिलेगी।
केला प्रसंस्करण उद्योग को नई गति
बुरहानपुर में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत पहले से ही 55 से अधिक केला प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जा चुकी हैं। इन इकाइयों में केले से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद और स्नैक्स तैयार किए जाते हैं। जीआई टैग के बाद इन उत्पादों की माँग और बढ़ने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने पर ज़ोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग के साथ बुरहानपुर के केले की मिठास अब और अधिक देशों तक पहुँच सकती है, जो इस क्षेत्र के किसानों और उद्यमियों दोनों के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है।