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जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग, मध्य प्रदेश को मिली ऐतिहासिक कृषि पहचान

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जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग, मध्य प्रदेश को मिली ऐतिहासिक कृषि पहचान

सारांश

जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग मिलना महज एक प्रमाणपत्र नहीं — यह नर्मदा घाटी के किसानों के लिए वैश्विक बाज़ार का दरवाज़ा खुलने जैसा है। भारत में पहली बार किसी एक क्षेत्र की दो फसलों को एक साथ यह मान्यता मिली है, जो जबलपुर को प्रीमियम कृषि उत्पादों के केंद्र के रूप में स्थापित करती है।

मुख्य बातें

जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री ने आधिकारिक जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग प्रदान किया।
जबलपुर भारत का पहला क्षेत्र बना जहाँ मटर और सिंघाड़े — दोनों को एक साथ जीआई सुरक्षा मिली।
आवेदन मैकलसुता फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने किया था।
जबलपुर के मटर पहले से ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) योजना में शामिल हैं; जीआई टैग से ब्रांड वैल्यू और बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार नर्मदा नदी के पोषक जल और क्षेत्र की विशेष जलवायु इन फसलों की गुणवत्ता का आधार है।
जीआई टैग से प्रीमियम मूल्य, निर्यात अवसर और किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है।

जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री ने प्रतिष्ठित जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग प्रदान किया है, जो मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस मान्यता के साथ जबलपुर भारत का पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है जहाँ मटर और सिंघाड़े — दोनों फसलों को एक साथ आधिकारिक जीआई सुरक्षा प्राप्त हुई है।

जीआई टैग के लिए किसने किया आवेदन

जबलपुर स्थित 'मैकलसुता फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' ने इन दोनों कृषि उत्पादों के लिए जीआई टैग हेतु आवेदन किया था। जीआई रजिस्ट्री के जर्नल में आधिकारिक पंजीकरण और प्रकाशन के पश्चात् इन उत्पादों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सुरक्षा मिल गई है, जो इनकी विशिष्ट भौगोलिक पहचान को संरक्षित रखती है।

नर्मदा घाटी की मिट्टी और जलवायु का योगदान

नर्मदा घाटी की उपजाऊ मिट्टी और इस क्षेत्र की अनुकूल जलवायु ने लंबे समय से इन फसलों की उत्कृष्ट गुणवत्ता, विशिष्ट स्वाद और अधिक पैदावार में निर्णायक भूमिका निभाई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नर्मदा नदी के पोषक तत्वों से भरपूर जल और क्षेत्र की विशेष भूगर्भीय संरचना इन फसलों के अनूठे गुणों का मुख्य कारण है। यही वजह है कि जबलपुर के मटर और सिंघाड़े की माँग वर्षों से स्थानीय बाज़ारों के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी बनी रही है।

ओडीओपी योजना और ब्रांड वैल्यू में बढ़ोतरी

गौरतलब है कि जबलपुर के मटर पहले से ही केंद्र सरकार की 'एक जिला-एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना में शामिल हैं। अब जीआई टैग मिलने से इनकी ब्रांड वैल्यू में और वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमाणित उत्पाद का दर्जा मिलने से देश-विदेश के व्यापारी किसानों को बेहतर मूल्य देने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे उत्पादकों की आय में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है।

किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

स्थानीय कृषि संस्थाओं और बागवानी अधिकारियों ने इस उपलब्धि को अभूतपूर्व बताया है। उनके अनुसार जीआई टैग से बाज़ार में पहचान बढ़ेगी, प्रीमियम मूल्य मिलेगा और निर्यात के नए अवसर खुलेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार कृषि उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में सक्रिय प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इससे एग्रो-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और जबलपुर को भौगोलिक रूप से प्रमाणित उत्पादों के केंद्र के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

आगे की राह

किसानों और संबंधित हितधारकों ने इस घटनाक्रम का उत्साहपूर्वक स्वागत किया है। उन्हें उम्मीद है कि जीआई मान्यता से अधिक किसान वैज्ञानिक कृषि पद्धतियाँ अपनाएंगे, पारंपरिक किस्मों का संरक्षण होगा और मूल्यवर्धन में निवेश बढ़ेगा। यह उपलब्धि जबलपुर को देश के कृषि मानचित्र पर एक नई और सशक्त पहचान दिलाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। देश में दर्जनों उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, फिर भी उनमें से अधिकांश किसानों तक प्रीमियम मूल्य का वास्तविक लाभ नहीं पहुँच पाया — कारण है कमज़ोर आपूर्ति शृंखला और निर्यात अवसंरचना की कमी। मैकलसुता जैसी किसान उत्पादक कंपनी की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन बिना ठोस विपणन तंत्र और सरकारी समर्थन के, यह टैग काग़ज़ी उपलब्धि बनकर रह सकता है। जबलपुर के किसानों को वास्तविक लाभ तब मिलेगा जब यह मान्यता निर्यात नीति और बाज़ार संपर्क से जुड़े।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग क्यों मिला?
जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को नर्मदा घाटी की विशेष मिट्टी, जलवायु और नर्मदा नदी के पोषक जल के कारण उनकी अनूठी गुणवत्ता, स्वाद और पैदावार के आधार पर जीआई टैग दिया गया है। यह मान्यता इन उत्पादों की भौगोलिक विशिष्टता की आधिकारिक पुष्टि करती है।
जीआई टैग से जबलपुर के किसानों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग से किसानों को बाज़ार में प्रीमियम मूल्य मिलने, निर्यात के नए अवसर खुलने और नकली उत्पादों से कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रमाणित उत्पाद का दर्जा मिलने से देश-विदेश के व्यापारी बेहतर दाम देने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
जीआई टैग के लिए आवेदन किसने किया था?
जबलपुर स्थित 'मैकलसुता फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' ने मटर और सिंघाड़े दोनों के लिए जीआई टैग हेतु आवेदन किया था। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री ने आवेदन स्वीकार कर इन उत्पादों को आधिकारिक मान्यता प्रदान की।
क्या जबलपुर का मटर पहले से किसी सरकारी योजना में शामिल था?
हाँ, जबलपुर के मटर पहले से केंद्र सरकार की 'एक जिला-एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना में शामिल हैं। जीआई टैग मिलने से इस उत्पाद की ब्रांड वैल्यू और अधिक मज़बूत होगी।
भारत में जीआई टैग पाने वाले अन्य प्रमुख कृषि उत्पाद कौन से हैं?
भारत में दार्जिलिंग चाय, बासमती चावल, अल्फांसो आम, नागपुर संतरा और कश्मीरी केसर जैसे उत्पाद जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं। जबलपुर के मटर और सिंघाड़े इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाले मध्य प्रदेश के नवीनतम कृषि उत्पाद हैं।
राष्ट्र प्रेस
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